उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले में डॉक्टर भीमराव अम्बेडकर की प्रतिमा स्थापित करने को लेकर पैदा हुए तनाव के बीच बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती ने बुधवार को लोगों से शांति, संवैधानिक अधिकारों और धार्मिक मान्यताओं का सम्मान करने की अपील की। बसपा प्रमुख ने स्थानीय प्रशासन से इस पूरे मामले का सौहार्दपूर्ण और उचित समाधान तलाशने की मांग की। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश का संविधान प्रत्येक नागरिक को अपनी धार्मिक परंपराओं का पालन करते हुए शांतिपूर्ण जीवन जीने का अधिकार प्रदान करता है।
बदायूं प्रतिमा विवाद और हिंसा की स्थिति
उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले के अंतर्गत आने वाले सिकरी गांव में मंगलवार शाम स्थिति उस समय बिगड़ गई, जब एक सरकारी जमीन पर भारत रत्न डॉक्टर भीमराव अम्बेडकर की प्रतिमा लगाने की योजना को लेकर दो पक्षों के बीच असहमति जताई गई। इस प्रस्ताव को लेकर स्थानीय स्तर पर शुरू हुआ मतभेद देखते ही देखते उग्र रूप लेने लगा और वहां तनाव का माहौल बन गया।
घटनाक्रम के दौरान दोनों ओर से हिंसक झड़प शुरू हो गई, जिसमें उपद्रवियों द्वारा किए गए पथराव के कारण ड्यूटी पर तैनात कई पुलिसकर्मी और एक स्थानीय निवासी घायल हो गए। इस हिंसा के बाद पूरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को कड़ा कर दिया गया है। बदायूं की इस घटना पर संज्ञान लेते हुए मायावती ने शासन और प्रशासन से आग्रह किया कि इस संवेदनशील मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए शांतिपूर्ण और न्यायसंगत तरीका अपनाया जाए, ताकि क्षेत्र में सौहार्द बना रहे।
संवैधानिक अधिकारों और धार्मिक सौहार्द पर बसपा प्रमुख का रुख
सामाजिक मीडिया मंच एक्स पर अपने विचार साझा करते हुए मायावती ने कहा कि बाबा साहेब डॉक्टर भीमराव अम्बेडकर द्वारा तैयार किया गया धर्मनिरपेक्ष संविधान देश के सभी धर्मों और जातियों के लोगों को बराबरी का अधिकार देता है। उन्होंने लिखा कि यह संविधान भारत को एक सूत्र में पिरोकर सशक्त बनाने की गारंटी देता है। इसके तहत हर नागरिक को अपने धार्मिक ग्रंथों, रीति-रिवाजों और मान्यताओं के अनुसार सुखद और शांत जीवन व्यतीत करने की पूरी स्वतंत्रता है।
मायावती ने कहा कि किसी को भी दूसरों के धार्मिक मामलों में अनुचित दखल देने या उनकी अनदेखी करने से बचना चाहिए। इसके बजाय सभी लोगों को एक-दूसरे की धार्मिक पवित्रता और परंपराओं का आदर करना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि देश और समाज के व्यापक हित में यह बेहद जरूरी है कि लोग संवेदनशील मुद्दों पर गैर-जिम्मेदाराना टिप्पणी करने से खुद को दूर रखें।
संवेदनशील सामाजिक मुद्दों और स्कूली विवादों पर सुझाव
अपने बयान में बसपा प्रमुख ने महिलाओं के सम्मान, अस्मिता और पर्दा जैसी परंपराओं से जुड़े आत्मसम्मान के विषयों पर भी संवेदनशीलता बरतने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे व्यक्तिगत और सामाजिक मामलों को बेहद समझदारी और आदर के साथ देखा जाना चाहिए।
इसके अलावा, विभिन्न शिक्षण संस्थानों में यूनिफॉर्म, पर्दा, चादर या हिजाब को लेकर सामने आने वाले विवादों पर अपनी राय रखते हुए मायावती ने कहा कि इन मुद्दों को जरूरत से ज्यादा तूल देकर अदालती कार्रवाई का कानूनी विवाद नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि स्कूल प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन को आपसी बातचीत तथा सूझबूझ के जरिए इन मामलों का हल निकालना चाहिए। ऐसा करने से किसी भी वर्ग को इन संवेदनशील विषयों की आड़ में संकीर्ण राजनीति चमकाने का अवसर नहीं मिलेगा। उन्होंने दोहराया कि बहुजन समाज पार्टी सर्वसमाज के मान-सम्मान और सुरक्षा की गारंटी देने वाली अम्बेडकरवादी नीति पर चलती है।





















