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जांच में खुलासा: अयोध्या मंदिर में दान चोरी का पैसा कहां गया, आरोपियों के बैंक खाते खोल रहे राज़उत्तर प्रदेश
2 जुल॰ 2026, 8:49 am (46 दिन पहले)· 1

जांच में खुलासा: अयोध्या मंदिर में दान चोरी का पैसा कहां गया, आरोपियों के बैंक खाते खोल रहे राज़

अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा चोरी मामले की जांच में सामने आया है कि गिरफ्तार आरोपियों के बैंक खातों में लंबे समय से जमा हो रही मोटी रकम का वे कोई हिसाब नहीं दे पाए, जिससे जांच एजेंसियों का शक और गहरा हो गया है।

उत्तर प्रदेश के अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे नए और चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। पुलिस और एसआईटी की पड़ताल में साफ हो गया है कि मंदिर परिसर से पैसा उड़ाने का यह खेल कोई नया मामला नहीं, बल्कि काफी लंबे समय से चल रहा था। पूछताछ के दौरान गिरफ्तार आरोपी यह भी नहीं बता पाए कि उनके बैंक खातों में जमा भारी रकम आखिर कहां से आई। हालांकि जांच एजेंसी को अभी तक सिर्फ पिछले 45 दिनों का ही CCTV फुटेज मिल पाया है, जिसके आधार पर अब तक 8 आरोपियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार किया जा चुका है।

चोरी की रकम आखिर खर्च कहां हुई

गिरफ्तार आरोपियों के बैंक खातों की अब पुलिस बारीकी से जांच कर रही है। शुरुआती पड़ताल में पता चला है कि चोरी की गई रकम का इस्तेमाल या तो सीधे बैंक खातों में जमा करने के लिए किया गया, या फिर उससे प्रॉपर्टी खरीदी गई। जांच में सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई है कि आरोपी अपने खातों में जमा बड़ी-बड़ी रकम का कोई ठोस और संतोषजनक स्रोत नहीं बता पा रहे हैं। हर बार पूछताछ में उनके जवाब अधूरे और गोलमोल निकले। यही वजह है कि पुलिस अब इन्हीं बैंक लेन-देन के दस्तावेजों को आधार बनाकर आरोपियों से लगातार और गहराई से पूछताछ कर रही है, ताकि पैसे का असली स्रोत सामने आ सके।

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महाकुंभ के बाद अचानक बढ़ गई चोरी की रकम

जांच में यह बात भी सामने आई है कि पहले चढ़ावे में अपेक्षाकृत कम रकम की चोरी होती थी। लेकिन प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ के दौरान और उसके बाद मंदिर में आने वाले चढ़ावे की राशि कई गुना बढ़ गई, और इसी के साथ आरोपियों ने भी बड़ी रकम पर हाथ साफ करना शुरू कर दिया। प्रयागराज का महाकुंभ 13 जनवरी से 26 फरवरी 2025 तक आयोजित हुआ था। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु महाकुंभ से सीधे अयोध्या पहुंचे और रामलला के दर्शन किए। नतीजा यह हुआ कि अयोध्या में भारी भीड़ उमड़ पड़ी और राम मंदिर में रिकॉर्ड स्तर का चढ़ावा आया। भीड़ जितनी बढ़ी, गिनती में गड़बड़ी की गुंजाइश भी उतनी ही बढ़ती चली गई, और आरोपियों ने इसी मौके का फायदा उठाया।

45 दिन के CCTV फुटेज ने खोली पोल

एसआईटी के पास उपलब्ध 45 दिनों के CCTV फुटेज में चढ़ावे की गिनती के दौरान कुछ कर्मचारियों की संदिग्ध हरकतें कैद हुई हैं। इन्हीं फुटेज के आधार पर आरोपियों की पहचान की गई और उन्हें गिरफ्तार किया गया। लेकिन जांच अधिकारियों का मानना है कि चोरी का यह सिलसिला इससे कहीं पहले से चल रहा था, और सिर्फ 45 दिनों की फुटेज पूरी सच्चाई सामने लाने के लिए काफी नहीं है। आरोपियों ने अपने पुराने सबूत मिटाने की भी कोशिश की, लेकिन बैंक खातों में जमा रकम का रिकॉर्ड ही अब उनके खिलाफ सबसे बड़ा और पक्का सबूत बनकर सामने आया है।

सालों से बैंक खातों में जमा हो रही थी मोटी रकम

जांच में सामने आया है कि गिरफ्तार सभी 8 आरोपियों के बैंक खातों में लंबे समय से नियमित रूप से बड़ी रकम जमा होती रही है। पूछताछ में आरोपी यह बताने में पूरी तरह नाकाम रहे कि उनके खातों में आया यह पैसा आखिर कहां से आया। इसी वजह से पुलिस को गहरा शक है कि चोरी की रकम को लंबे अरसे से बैंक खातों के जरिए ठिकाने लगाया जा रहा था, ताकि किसी को शक न हो और पैसा आसानी से इस्तेमाल किया जा सके।

सुरक्षा नियमों की अनदेखी से बढ़ती गई गड़बड़ी

जांच में यह बात भी उभरकर आई है कि चढ़ावे की गिनती के लिए तय किए गए सुरक्षा नियमों का पालन समय के साथ धीरे-धीरे बंद कर दिया गया था। जांच में सामने आए प्रमुख तथ्य इस प्रकार हैं:

  • कलेक्शन सेंटर में चढ़ावा गिनने के नियमों की लगातार अनदेखी की गई।
  • कर्मचारियों की आवाजाही के दौरान होने वाली तलाशी में भी धीरे-धीरे ढिलाई बरती जाने लगी।
  • शुरुआत में गिनती करने वाले कर्मचारियों के लिए बिना जेब वाली टी-शर्ट और पैंट पहनने का नियम था, ताकि नकदी कहीं छिपाई न जा सके, लेकिन बाद में इस नियम का पालन भी बंद हो गया।

प्राण प्रतिष्ठा के बाद बनाई गई थी चढ़ावा प्रबंधन की पूरी व्यवस्था

राम मंदिर में वर्ष 2024 में प्राण प्रतिष्ठा के बाद श्रद्धालुओं की सुविधा और चढ़ावे के सुरक्षित प्रबंधन के लिए विस्तृत व्यवस्था तैयार की गई थी। मंदिर परिसर में अलग-अलग जगहों पर कुल 40 दान पात्र लगाए गए थे। यात्री सुविधा केंद्र के बेसमेंट में एक कलेक्शन सेंटर बनाया गया, जहां चढ़ावे की गिनती होती थी। मंदिर ट्रस्ट ने वहां काम करने वाले कर्मचारियों के लिए सख्त सुरक्षा नियम भी तय किए थे। लेकिन जांच में पता चला है कि समय बीतने के साथ इन नियमों का पालन लगातार कमजोर पड़ता गया, जिसका फायदा उठाकर कुछ कर्मचारी चढ़ावे की रकम में हेरफेर करने लगे।

आउटसोर्स कर्मचारियों की नियुक्ति से शुरू हुई गड़बड़ी?

जांच के मुताबिक जब भगवान रामलला अस्थायी मंदिर में विराजमान थे, तब चढ़ावे की मात्रा भी सीमित हुआ करती थी। लेकिन भव्य मंदिर के गर्भगृह में विराजमान होने के बाद श्रद्धालुओं की संख्या और चढ़ावा दोनों तेजी से बढ़ने लगे। बढ़ते काम को देखते हुए बैंक ने चढ़ावा गिनने के लिए आउटसोर्स कर्मचारियों की नियुक्ति शुरू कर दी। महाकुंभ के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ अयोध्या पहुंचने से चढ़ावे की मात्रा और भी बढ़ गई। उस दौर में चढ़ावे की गिनती के लिए करीब 40 कर्मचारियों को लगाया गया था। जांच एजेंसियों का मानना है कि गड़बड़ियों की शुरुआत यहीं से हुई, और आउटसोर्स स्टाफ की भर्ती के साथ ही निगरानी में जो कमी आई, उसी का फायदा उठाकर चोरी का यह सिलसिला धीरे-धीरे बड़ा होता चला गया।

फिलहाल पुलिस और एसआईटी की टीमें आरोपियों के बैंक लेन-देन, संपत्ति के कागजात और पुराने CCTV फुटेज को खंगालने में जुटी हैं, ताकि यह साफ हो सके कि चढ़ावे की चोरी की रकम आखिर कहां-कहां तक पहुंची।

सवाल-जवाब

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में अब तक कितने आरोपी गिरफ्तार हुए हैं?
अब तक 8 आरोपियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार किया जा चुका है।
पुलिस को जांच में सबसे बड़ा सबूत क्या मिला?
आरोपियों के बैंक खातों में जमा भारी रकम, जिसका वे कोई संतोषजनक स्रोत नहीं बता पाए, सबसे अहम सबूत बनी है।
जांच एजेंसी को कितने दिनों का CCTV फुटेज मिल पाया है?
जांच एजेंसी को अभी तक सिर्फ पिछले 45 दिनों का ही CCTV फुटेज मिल सका है।
महाकुंभ के बाद चढ़ावे की चोरी क्यों बढ़ी?
प्रयागराज महाकुंभ के दौरान और उसके बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालु अयोध्या पहुंचे, जिससे मंदिर में चढ़ावा कई गुना बढ़ गया और आरोपियों ने बड़ी रकम चुरानी शुरू कर दी।
महाकुंभ कब आयोजित हुआ था?
प्रयागराज का महाकुंभ 13 जनवरी से 26 फरवरी 2025 तक आयोजित हुआ था।
मंदिर परिसर में कितने दान पात्र लगाए गए हैं?
प्राण प्रतिष्ठा के बाद मंदिर परिसर में अलग-अलग स्थानों पर कुल 40 दान पात्र लगाए गए थे।
चढ़ावा गिनने के लिए कौन से सुरक्षा नियम बनाए गए थे?
गिनती करने वाले कर्मचारियों के लिए बिना जेब वाली टी-शर्ट और पैंट पहनने का नियम था, ताकि नकदी छिपाई न जा सके, लेकिन बाद में इसका पालन बंद हो गया।
चोरी की रकम का इस्तेमाल किस तरह किया गया?
शुरुआती जांच के मुताबिक चोरी की रकम या तो बैंक खातों में जमा की गई या फिर उससे प्रॉपर्टी खरीदी गई।
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