उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में स्थित प्रसिद्ध दुधवा टाइगर रिजर्व से वन्यजीव संरक्षण को लेकर दो बड़ी खबरें सामने आई हैं। क्षेत्र में जैव विविधता को नया आयाम देते हुए पहली बार 2026 की बाघ गणना के दौरान तेंदुओं के विचरण और उनकी आबादी का अलग से मूल्यांकन किया जा रहा है। इसके साथ ही पार्क प्रशासन के लिए बड़ी राहत की बात यह है कि यहां संरक्षित एक सींग वाले गैंडों की कुल संख्या बढ़कर 53 हो गई है। तराई के इस समृद्ध प्राकृतिक आवास में वन्यजीवों की निगरानी को चाक-चौबंद बनाने के लिए अत्याधुनिक तकनीक का सहारा लिया जा रहा है।
1800 कैमरों के नेटवर्क से होगी तेंदुओं की पहली डिजिटल ट्रैकिंग
दुधवा टाइगर रिजर्व के जंगलों में अब तक केवल बाघों की मौजूदगी का आकलन ही नियमित रूप से होता रहा है। हालांकि इस बार वन्यजीव विशेषज्ञों ने तेंदुओं की गतिविधियों को भी विस्तृत गणना प्रक्रिया में शामिल करने का फैसला किया है। इस महत्वाकांक्षी पहल के तहत किशनपुर अभयारण्य, बफर जोन तथा कतर्नियाघाट वन्यजीव विहार के विस्तृत इलाकों में कुल 1,800 कैमरे स्थापित किए गए हैं। इन स्थानों पर लगाए गए कैमरा ट्रैप से प्राप्त सभी तस्वीरों और डिजिटल डेटा को विस्तृत अध्ययन के लिए भेजा जा रहा है।
इन तस्वीरों का गहन विश्लेषण करने की जिम्मेदारी भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) देहरादून के विशेषज्ञों को सौंपी गई है। संस्था के वैज्ञानिक कैमरों से मिले डेटा को डिजिटल रूप में प्रोसेस कर रहे हैं ताकि तेंदुओं के मूवमेंट एरिया और उनके रहने के पैटर्न को सटीक रूप से समझा जा सके। पूर्व की व्यवस्था के अनुसार दुधवा में हर चार साल में बाघों की संख्या का आकलन कैमरा ट्रैप के माध्यम से किया जाता था। परंतु तेंदुओं का डेटा अलग से प्रोसेस होने से पहली बार इस मुख्य शिकारी प्रजाति का एक प्रामाणिक आंकड़ा तैयार किया जा सकेगा।
वर्ष 2027 में जारी होंगे अंतिम परिणाम, 100 तेंदुओं की मौजूदगी का अनुमान
दुधवा टाइगर रिजर्व के अधिकारियों का मानना है कि इस नई गणना व्यवस्था से जंगलों में तेंदुओं की सही स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। वर्तमान अनुमानों के अनुसार दुधवा के जंगलों में लगभग 100 तेंदुए निवास कर रहे हैं। हालांकि कैमरा ट्रैप डेटा के पूरा होने के बाद ही इनकी सटीक संख्या सामने आ सकेगी। दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर डॉ. एच. राजामोहन ने जानकारी दी है कि वर्ष 2027 में इस राष्ट्रव्यापी गणना के अंतिम परिणाम सार्वजनिक किए जाएंगे।
वर्ष 2027 में आने वाली अंतिम रिपोर्ट से बाघों और तेंदुओं दोनों की ही वास्तविक आबादी का सटीक ब्योरा मिल सकेगा। ऐतिहासिक आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष 2022 की पिछली राष्ट्रीय गणना के दौरान दुधवा टाइगर रिजर्व में कुल 153 बाघ दर्ज किए गए थे। इस शानदार संख्या की बदौलत दुधवा को देश भर के प्रमुख बाघ अभयारण्यों में चौथा स्थान प्राप्त हुआ था। अब तेंदुओं को भी इसमें जोड़े जाने से पार्क के समग्र पारिस्थितिकी तंत्र की बेहतर तस्वीर सामने आएगी।
गैंडों की संख्या पहुंची 53, एक सींग है मुख्य पहचान
बाघों और तेंदुओं के अलावा दुधवा का जंगल भारतीय एक सींग वाले गैंडों के सफल संरक्षण के लिए भी जाना जाता है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक पार्क के जंगलों में गैंडों की कुल संख्या बढ़कर 53 हो चुकी है। इस संरक्षित कुनबे में 17 नर गैंडे, 25 मादा गैंडे और 11 शावक तथा उप-वयस्क शामिल हैं। यह वृद्धि तराई के इस अनोखे वातावरण में गैंडा पुनर्वास कार्यक्रम की सफलता को दर्शाती है।
भारतीय गैंडे की सबसे प्रमुख और विशिष्ट शारीरिक पहचान उसकी नाक पर स्थित एक सींग होती है। वन्यजीव वैज्ञानिकों के अनुसार इस सींग की लंबाई 20 से 60 सेंटीमीटर तक हो सकती है। दुधवा के सुरक्षित माहौल में इन विशालकाय जीवों का कुनबा लगातार बढ़ रहा है, जो पर्यावरण प्रेमियों और शोधकर्ताओं के लिए अत्यंत उत्साहजनक संकेत है।
पांच प्रजातियों के हिरणों का दुर्लभ ठिकाना और पर्यटन सत्र
दुधवा नेशनल पार्क अपनी अनूठी जैव विविधता के कारण पूरे भारत में एक खास पहचान रखता है। यह देश के उन बेहद गिने-चुने संरक्षित क्षेत्रों में शामिल है जहां एक साथ हिरणों की पांच अलग-अलग प्रजातियां पाई जाती हैं। दुधवा के घने जंगलों, विस्तृत प्राकृतिक घास के मैदानों और नमी वाले दलदली इलाकों का माहौल इन शाकाहारी जीवों के अनुकूल है। यहां बारहसिंगा, सांभर, चीतल, हॉग डियर और काकड़ बड़ी संख्या में स्वच्छंद विचरण करते हैं।
पार्क में वन्यजीवों का दीदार करने के लिए देश-विदेश से हर साल बड़ी संख्या में सैलानी पहुंचते हैं। पर्यटकों के लिए दुधवा नेशनल पार्क हर साल नवंबर महीने से लेकर जून महीने तक खुला रहता है। इस अवधि के दौरान आने वाले सैलानी न केवल दुर्लभ हिरणों और गैंडों को देखते हैं, बल्कि तराई के इस खूबसूरत जंगल के प्राकृतिक सौंदर्य का भी आनंद लेते हैं।


















