अयोध्या के प्रसिद्ध राम मंदिर में सुरक्षा और वित्तीय व्यवस्था को मजबूत करने के लिए प्रशासन ने एक बड़ा कदम उठाया है। मंदिर परिसर में आने वाले दान और चढ़ावे की गिनती की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया गया है। अब श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए पैसे को गिनने के लिए केवल एक ही शिफ्ट निर्धारित की गई है। इस नई व्यवस्था के तहत चढ़ावे की गिनती का काम सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे के बीच ही किया जाएगा। चढ़ावे में चोरी का बड़ा मामला सामने आने के बाद मंदिर प्रबंधन ने यह कड़ा निर्णय लिया है ताकि पूरी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाया जा सके।
शेयर बाजार में लगाया जा रहा था चोरी का पैसा
चढ़ावे की चोरी के मामले में चल रही जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। इस मामले में पकड़े गए आरोपियों पर आरोप है कि वे चोरी किए गए पैसों का इस्तेमाल शेयर बाजार में निवेश करने के लिए करते थे। जांच के दौरान यह बात सामने आई है कि पकड़े गए आरोपी सबसे पहले चोरी की गई नकद राशि को अपने रिश्तेदारों और जान-पहचान के लोगों के बैंक खातों में जमा करते थे। इसके बाद, उस राशि को उनके खातों से अपने स्वयं के बैंक खातों में ऑनलाइन ट्रांसफर करवा लेते थे। ऐसा इसलिए किया जाता था ताकि चोरी के पैसों के मुख्य स्रोत को छिपाया जा सके और बैंकिंग प्रणाली में इसका पता न चल सके।
पूर्व सैनिकों पर जानकारी साझा करने पर रोक
मंदिर के चढ़ावे में सेंधमारी की इस गंभीर घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था और सूचनाओं के आदान-प्रदान पर भी कड़ी पाबंदी लगा दी गई है। मंदिर परिसर की सुरक्षा में तैनात पूर्व सैनिकों पर इस घटना के संबंध में किसी भी प्रकार की टिप्पणी करने या जानकारी बाहर देने पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई थी। सुरक्षाकर्मियों को निर्देशित करने के लिए 'अयोध्या धाम पूर्व सैनिक सेवा समूह' नाम के एक व्हाट्सएप ग्रुप पर संदेश भेजा गया था। इस संदेश में सभी कर्मियों को साफ तौर पर हिदायत दी गई थी कि यदि कोई भी उनसे इस विषय पर कुछ पूछे, तो उन्हें पूरी तरह से मौन रहना है। बाद में इस व्हाट्सएप ग्रुप का स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर भी वायरल हो गया, जिससे मामले को दबाने के प्रयासों पर बहस छिड़ गई।
ट्रस्टियों का इस्तीफा और गिरफ्तारियां
राम मंदिर के चढ़ावे में हेराफेरी का यह पूरा मामला जून 2026 में खुलकर सामने आया था, जब बड़े पैमाने पर दान राशि चोरी होने के आरोप लगे थे। इस घटना ने पूरे देश का ध्यान खींचा और श्रद्धालुओं के बीच गहरी नाराजगी पैदा कर दी थी। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए इस मामले में संलिप्त 8 लोगों को गिरफ्तार कर लिया था। इस बड़े विवाद का असर मंदिर की देखरेख करने वाले राम मंदिर ट्रस्ट पर भी पड़ा। भारी जन आक्रोश और जिम्मेदारी तय करते हुए ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया था, जिसे बाद में आयोजित हुई एक बैठक में स्वीकार कर लिया गया था।











