उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य की मेधावी छात्राओं के लिए बड़ा ऐलान किया है। लखनऊ में हुई राज्य कैबिनेट की बैठक में रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना को हरी झंडी मिल गई है, जिसके तहत बेहतर प्रदर्शन करने वाली छात्राओं को स्कूटी दी जाएगी। उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने बैठक के बाद इसकी जानकारी दी।
400 करोड़ रुपये का बजट और मकसद
मंत्री योगेंद्र उपाध्याय के मुताबिक, महिला सशक्तिकरण की दिशा में छात्राओं को प्रोत्साहित करने के लिए रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। इस दायरे में राज्य के सभी सरकारी कॉलेज, राज्य विश्वविद्यालय, निजी विश्वविद्यालय, इनसे संबद्ध महाविद्यालय और स्ववित्तपोषित महाविद्यालय शामिल किए गए हैं। योजना पर कुल 400 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। सरकार की मंशा है कि छात्राओं के लिए उच्च शिक्षा तक पहुंचना आसान हो और वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकें।
किन छात्राओं को मिलेगा स्कूटी का फायदा
- हर संस्थान में 2025-26 में ग्रेजुएशन पास करने वाली छात्राओं में से टॉप 5 प्रतिशत छात्राओं को स्कूटी दी जाएगी।
- जिन छात्राओं के परिवार की सालाना आय 12 लाख रुपये से कम है, उनके लिए रजिस्ट्रेशन शुल्क और वाहन बीमा का खर्च सरकार उठाएगी। साथ ही उन्हें 5 लीटर पेट्रोल भी मुफ्त मिलेगा।
- स्कूटी की खरीद सरकारी GeM पोर्टल के जरिए होगी।
- दिव्यांग छात्राओं, निराश्रित छात्राओं और शहीदों के परिवार की बेटियों को भी यह स्कूटी दी जाएगी, इनके लिए मेरिट की कोई शर्त नहीं रखी गई है।
योजना की पृष्ठभूमि
छात्राओं को स्कूटी देने की तैयारी नई नहीं है। फरवरी 2026 में पेश हुए यूपी के बजट में ही सरकार ने छात्राओं को स्कूटी देने के लिए चार सौ करोड़ रुपये का प्रावधान कर दिया था। अब कैबिनेट की मंजूरी के साथ यह योजना जमीन पर उतरने के लिए तैयार है। रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना के जरिए सरकार मेधावी छात्राओं को प्रोत्साहित करना, उनके रोजाना के सफर को आसान बनाना और महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देना चाहती है।
शिक्षा से जुड़े दूसरे बड़े फैसले
कैबिनेट बैठक में शिक्षा से जुड़ा एक और अहम प्रस्ताव पास हुआ। भारतीय ज्ञान परंपरा को पढ़ाई में शामिल करने के लिए एनईपी 2020 के तहत कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में 'शोधपीठ' स्थापित करने को मंजूरी दी गई है। इसके लिए विश्वविद्यालय स्तर पर 1 करोड़ रुपये का अनुदान दिया जाएगा। यह रकम फिक्स्ड डिपॉजिट में रखी जाएगी और इससे मिलने वाले ब्याज से शोधपीठ का रोजमर्रा का कामकाज चलाया जाएगा। यह अनुदान उन्हीं कॉलेजों को मिलेगा जो 50 साल पूरे कर चुके हैं या जहां छात्रों की संख्या 5 हजार से ज्यादा है।
वाराणसी के बसंत महिला महाविद्यालय, राज फोर्ट के लिए भी अलग से महिला छात्रावास बनाने का प्रस्ताव पास हुआ। यह महाविद्यालय काशी हिंदू विश्वविद्यालय से जुड़ा हुआ है। अभी यहां सिर्फ एक छात्रावास है, अब 'त्वरित आर्थिक विकास योजना' के तहत 248.30 लाख रुपये की लागत से नया महिला छात्रावास बनाया जाएगा, जिसमें 112 छात्राओं के रहने की व्यवस्था होगी। इसके अलावा 'मुख्यमंत्री श्रमजीवी महिला छात्रावास योजना' के तहत वाराणसी में 500 छात्राओं की क्षमता वाला एक और महिला छात्रावास बनाने के लिए 6000 वर्ग मीटर सरकारी जमीन मुफ्त में देने के प्रस्ताव को भी मंजूरी मिल गई। इस योजना के तहत झांसी, आगरा, मेरठ और गोरखपुर के लिए पहले ही सहमति दी जा चुकी है, अब वाराणसी की बारी आई है।
सड़क और परिवहन को लेकर बड़े ऐलान
कैबिनेट ने प्रयागराज, भदोही, मिर्जापुर और सोनभद्र जिलों को जोड़ने वाले 'विंध्य एक्सप्रेस-वे' को भी मंजूरी दी है। शुरुआत में यह 6 लेन का बनेगा, लेकिन आगे चलकर इसे 8 लेन तक बढ़ाया जा सकेगा। यह एक्सप्रेस-वे कुल 333 किलोमीटर लंबा होगा और 36 महीने में बनकर तैयार होगा। इस पर 18514 करोड़ रुपये खर्च होंगे, जिसमें से 4613 करोड़ रुपये सिर्फ जमीन खरीदने में लगेंगे। यह एक्सप्रेस-वे प्रयागराज में गंगा एक्सप्रेस-वे के खत्म होने वाली जगह से शुरू होगा। दोनों एक्सप्रेस-वे को जोड़कर देखा जाए तो कुल लागत करीब 26315 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है।
इसके साथ ही 'विंध्य-पूर्वांचल स्पर लिंक' नाम से एक नया ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे भी मंजूर किया गया है, जो शुरुआत में 6 लेन का होगा और बाद में 8 लेन तक बढ़ाया जा सकेगा। इस परियोजना पर 9039 करोड़ रुपये खर्च होंगे, जिसमें से 5628 करोड़ रुपये निर्माण कार्य पर और बाकी 3379 करोड़ रुपये 1731 हेक्टेयर जमीन खरीदने पर खर्च होंगे। यह लिंक गाजीपुर, मिर्जापुर और चंदौली जिलों को जोड़ते हुए कुल 117 किलोमीटर लंबा होगा।
यात्री परिवहन को लेकर भी कैबिनेट ने अहम फैसला लिया। राज्य सड़क परिवहन निगम के लिए 220 नई बसें खरीदी जाएंगी, इनमें कुछ 50 सीटर इलेक्ट्रिक बसें होंगी तो कुछ 42 सीटर बसें भी शामिल होंगी। इस पर 400 करोड़ रुपये खर्च करने का बजट तय किया गया है।
प्रशासनिक और आपातकालीन सेवाओं से जुड़े फैसले
'आउटसोर्सिंग सेवा निगम' के लिए 20 करोड़ रुपये देने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई है। यह रकम शून्य ब्याज दर पर दी जाएगी और इसकी अदायगी 5 साल बाद शुरू होगी, जो अगले 10 साल तक 2 करोड़ रुपये सालाना की दर से चलेगी।
अग्निशमन और आपातकालीन सेवाओं को मजबूत करने के लिए भी कैबिनेट ने मंजूरी दी। नई मांग के तहत 2500 लीटर क्षमता वाले 5 वाटर टेंडर चेसिस समेत हाई प्रेशर पंप, फैब्रिकेशन और जरूरी सामान के साथ बनाए जाएंगे। इसके अलावा पुराने और अनुपयोगी हो चुके 39 वाटर टेंडर (2500 लीटर क्षमता) की जगह भी नए वाहन इसी तरह चेसिस, हाई प्रेशर पंप, फैब्रिकेशन और एसेसरीज के साथ बनाए जाएंगे। साथ ही 5000+500 लीटर क्षमता वाले 5 फोम टेंडर की चेसिस सहित खरीद और निर्माण को भी मंजूरी दी गई है। कुल मिलाकर इस बैठक में 18 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई, जो शिक्षा, सड़क, परिवहन और आपातकालीन सेवाओं से जुड़े हैं।




















