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उत्तराखंड के चमोली में हाइड्रो प्रोजेक्ट टनल धंसी, 7 श्रमिकों की गई जान और 18 को सुरक्षित निकालाउत्तराखंड
14 अग॰ 2026, 6:50 am (59 मिनट पहले)· 1

उत्तराखंड के चमोली में हाइड्रो प्रोजेक्ट टनल धंसी, 7 श्रमिकों की गई जान और 18 को सुरक्षित निकाला

चमोली के पीपलकोटी में जलविद्युत परियोजना की सुरंग में अचानक कैविटी फटने से 7 मजदूरों की मौत हो गई। रेस्क्यू टीम ने 18 लोगों को सुरक्षित निकाल लिया है, जबकि 3 लापता श्रमिकों की तलाश जारी है।

उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित पीपलकोटी क्षेत्र में गुरुवार शाम एक बड़ा हादसा सामने आया, जहां हिंदुस्तान कंस्ट्रक्शन कंपनी (एचसीसी) की देखरेख में बन रही डीआरटी हाइड्रो प्रोजेक्ट सुरंग का एक हिस्सा अचानक धंस गया। सुरंग के भीतर करीब 1.8 किलोमीटर की गहराई में भारी मात्रा में पानी और गाद का सैलाब आने से वहां काम कर रहे श्रमिक फंस गए। इस आपदा में 7 श्रमिकों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि 18 लोगों को राहत एवं बचाव दल ने सुरक्षित बाहर निकाल लिया है। सुरंग के भीतर फंसे 3 अन्य लापता कर्मचारियों की तलाश के लिए बड़े पैमाने पर रेस्क्यू अभियान चलाया जा रहा है।

कैविटी फटने से सुरंग में भरा पानी और गाद

यह घटना गुरुवार शाम लगभग 6:30 बजे से 6:45 बजे के बीच घटित हुई। पीपलकोटी में निर्माणाधीन इस 3.5 किलोमीटर लंबी जलविद्युत सुरंग में कर्मचारी नियमित निर्माण कार्य में जुटे हुए थे। जब हादसा हुआ, उस समय सुरंग के अंदर लगभग 1.8 किलोमीटर की दूरी पर ग्रेविटी पैकिंग का कार्य किया जा रहा था। इसी दौरान सुरंग की अंदरूनी दीवार में बनी एक विशाल कैविटी अचानक धमाके के साथ फट गई।

कैविटी फटने के तुरंत बाद बहुत तीव्र प्रवाह के साथ कीचड़, मलबा और पानी का गुबार सुरंग के भीतर फैलने लगा। देखते ही देखते जलभराव और गाद का यह बहाव मुख्य प्रवेश द्वार की तरफ लगभग डेढ़ किलोमीटर तक आगे बढ़ गया। अचानक हुए इस घटनाक्रम से सुरंग के अंदर अफरा-तफरी मच गई और वहां मौजूद मजदूर संभल भी नहीं पाए। चीख-पुकार के बीच कई श्रमिक पानी के तेज बहाव और मलबे की चपेट में आकर इधर-उधर छिटक गए और दलदल में धंस गए।

राहत एवं बचाव कार्य की जमीनी स्थिति

दुर्घटना की सूचना मिलते ही राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ), राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), स्थानीय जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन की विशेषज्ञ टीमें बिना समय गंवाए मौके पर पहुंचीं। बचाव कर्मियों ने कठिन परिस्थितियों के बावजूद तुरंत राहत कार्य शुरू किया और सुरंग के शुरुआती हिस्सों में फंसे 18 श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकालने में सफलता प्राप्त की।

हालांकि, रात के समय सुरंग के भीतर अत्यधिक गाद और भारी मलबे के जमाव के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन को अस्थाई रूप से रोकना पड़ा। शुक्रवार सुबह उजाला होते ही बचाव दस्तों ने पोकलैंड और भारी मशीनों की मदद से मलबे को हटाने तथा शेष 3 लापता मजदूरों की तलाश का कार्य दोबारा शुरू कर दिया है। अधिकारी सुरंग के आंतरिक हिस्सों से पानी निकालने के लिए पंपिंग सेट का भी उपयोग कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने लिया स्थिति का जायजा

घटनाक्रम के सामने आने के बाद उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पूरे मामले का संज्ञान लिया और अधिकारियों को युद्धस्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाने के कड़े निर्देश जारी किए। उन्होंने प्रभावित परिवारों को हर संभव प्रशासनिक और चिकित्सा सहायता देने का आश्वासन दिया है। मुख्यमंत्री स्वयं इस अभियान की पल-पल की निगरानी कर रहे हैं।

चुंकी निर्माणाधीन हाइड्रो प्रोजेक्ट की साइट पर उत्तराखंड के अलावा अन्य राज्यों के मजदूर भी कार्यरत थे, इसलिए मुख्यमंत्री धामी ने छत्तीसगढ़ और झारखंड के मुख्यमंत्रियों से फोन पर बात की। उन्होंने दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों को स्थिति की पूरी जानकारी दी और आश्वस्त किया कि उनके राज्यों के श्रमिकों की सुरक्षा और उपचार के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।

चमोली में सुरंग निर्माण और सुरक्षा की चुनौतियां

चमोली जिले में सुरंग के भीतर होने वाला यह कोई पहला बड़ा हादसा नहीं है। इससे पहले दिसंबर 2025 में भी चमोली में एक निर्माणाधीन सुरंग के अंदर दो लोको ट्रेनें आपस में टकरा गई थीं। उस भीषण दुर्घटना में कम से कम 70 मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गए थे। हिमालयी क्षेत्र की नाजुक भूगर्भीय बनावट के कारण इस प्रकार की सुरंग परियोजनाओं में सुरक्षा और आपातकालीन निकासी व्यवस्था को लेकर सवाल उठते रहे हैं।

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सवाल-जवाब

चमोली में टनल हादसा किस स्थान पर हुआ?
यह हादसा उत्तराखंड के चमोली जिले के पीपलकोटी इलाके में निर्माणाधीन एचसीसी हाइड्रो प्रोजेक्ट की डीआरटी सुरंग में हुआ।
हादसे में कुल कितने मजदूर प्रभावित हुए हैं?
सुरंग के अंदर फंसे 22 मजदूरों में से 7 की मृत्यु हो गई, 18 को सुरक्षित बचा लिया गया और 3 की तलाश जारी है।
सुरंग के अंदर दुर्घटना का मुख्य कारण क्या था?
सुरंग के करीब 1.8 किलोमीटर अंदर काम के दौरान अचानक एक कैविटी फट गई, जिससे भारी मात्रा में पानी और मलबा भर गया।
रेस्क्यू ऑपरेशन में कौन-सी एजेंसियां शामिल हैं?
एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन की टीमें रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·12 मिनट पहले

यह हादसा हिमालयी क्षेत्रों में चल रही बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की सुरक्षा और भौगोलिक चुनौतियों पर गंभीर सवाल खड़े करता है। सुरंगों के भीतर कैविटी फटने और जलभराव जैसी घटनाओं को रोकने के लिए भूगर्भीय जांच और सुरक्षा मानकों को और अधिक कड़ा करने की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में इस प्रकार के जानलेवा हादसों को टाला जा सके।

Karan Malhotra@karan-malhotra·11 मिनट पहले

यह हादसा हिमालयी क्षेत्रों में जारी अंधाधुंध निर्माण कार्यों और सुरक्षा मानकों के बीच के बड़े अंतर को उजागर करता है। ग्रेविटी पैकिंग के दौरान कैविटी फटने जैसी घटनाएं दर्शाती हैं कि टनलिंग के वक्त भूगर्भीय दबाव और जल स्रोतों का आकलन करने में गंभीर चूक हुई है। अब कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर यह सुनिश्चित करना होगा कि कंपनी और ठेकेदारों की जवाबदेही तय हो, ताकि भविष्य में इस तरह की लापरवाही से बचा जा सके।

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