फ्रिज की तीखी दुर्गंध से छुटकारा दिलाएंगी रसोई में रखी ये 7 घरेलू चीजेंफ्लाईदुबई के जांबाज कैप्टन स्मित मच्छार से मिले यूएई के डिप्टी पीएम, कॉकपिट हमले के बाद बचाई थी 174 यात्रियों की जानमेटा के म्यूज एआई का नया खुलासा: दोस्तों और परिवार के हर सदस्य की तैयार हो रही है निजी प्रोफाइलभीलवाड़ा में दिन और रात के पारे में 13 डिग्री का फासला, मौसमी बीमारियों की चपेट में आए लोगरसोई के बर्तनों का किफायती मेकओवर: ₹2,000 के अंदर मिल रहे हैं 5 बेहतरीन स्टेनलेस स्टील कुकवेयर सेटकॉम्पैक्ट डिस्क का नया दौर: संगीत प्रेमियों के बीच फिर बढ़ी फिजिकल एल्बम की मांग और इसे संवारने का तरीकाराजस्थान के जयपुर में चार दौर में होंगे त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव, जानें मतदान और नतीजों की तारीखेंउत्तर बिहार के मेडिकल हब जूरन छपरा में दुकान शुरू करने का खर्च और बाजार का पूरा समीकरणपंजाब नेशनल बैंक की 665 दिनों वाली सावधि जमा योजना पर ब्याज दरें, जानें वरिष्ठ नागरिकों के लाभकरनाल में जन्मदिन की रात 20 साल के युवक की चाकू मारकर हत्या, चार हिरासत में
हरिद्वार में हर की पौड़ी के पास कैसे पड़ा 'चमगादड़ टापू' नाम, जानिए इसके पीछे का रोचक इतिहासउत्तराखंड
3 अक्तू॰ 2026, 6:25 pm (30 मिनट पहले)· 0

हरिद्वार में हर की पौड़ी के पास कैसे पड़ा 'चमगादड़ टापू' नाम, जानिए इसके पीछे का रोचक इतिहास

धर्मनगरी हरिद्वार में हर की पौड़ी के नजदीक स्थित एक विशाल मैदान को आज भी चमगादड़ टापू कहा जाता है। घने जंगलों से लेकर आधुनिक कंक्रीट के विस्तार तक, जानिए इस अनोखे नाम की पूरी कहानी।

तीर्थनगरी हरिद्वार अपनी पावन गंगा धाराओं, धार्मिक घाटों और सदियों पुरानी ऐतिहासिक धरोहरों के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है। इस धार्मिक शहर में कई ऐसे इलाके और चौराहे हैं, जिनके अनोखे नाम बरसों से लोगों के मन में जिज्ञासा पैदा करते रहे हैं। विश्व प्रसिद्ध हर की पौड़ी के बिल्कुल करीब स्थित एक विशाल खुला मैदान स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं के बीच आज भी चमगादड़ टापू के नाम से पहचाना जाता है। दशकों के अंतराल में इस पूरे इलाके का भौगोलिक स्वरूप पूरी तरह बदल चुका है, लेकिन विकास की इस तेज रफ्तार के बाद भी यह विचित्र नाम आज तक लोगों की जुबान पर जिंदा है।

ब्रिटिश हुकूमत के दौर में गंगा किनारे का सघन वन क्षेत्र

इस ऐतिहासिक जगह के पुराने स्वरूप को लेकर हरिद्वार के वरिष्ठ पत्रकार रत्नमणि डोभाल ने महत्वपूर्ण जानकारियां साझा की हैं। उनके अनुसार अंग्रेजी शासनकाल और देश की आजादी के शुरुआती वर्षों में यह पूरा भूभाग गंगा तट से सटा हुआ बेहद घना जंगल हुआ करता था। उस जमाने में न तो आधुनिक पक्की और चौड़ी सड़कें मौजूद थीं और न ही आज की तरह कंक्रीट के विशाल पुलों का कोई जाल फैला था। पूरे क्षेत्र में आवागमन के लिए केवल एक संकरी कच्ची पगडंडी ही सहारा हुआ करती थी। गंगा के किनारे खड़े विशालकाय और पुराने वृक्षों के कारण यह वीरान इलाका पूरी तरह चमगादड़ों का प्राकृतिक बसेरा बन गया था।

ये भी पढ़ें

पेड़ों पर लटके हजारों जीव और बोलचाल में दर्ज हुआ नाम

उस समय की स्थिति ऐसी थी कि दिन के उजाले में भी इन घने दरख्तों की शाखाओं पर हजारों की तादाद में चमगादड़ उल्टे लटके साफ नजर आते थे। रास्ते से गुजरने वाले राहगीरों, संन्यासियों और स्थानीय निवासियों की नजर जब भी इन विशाल पेड़ों पर पड़ती थी, तो उन्हें केवल चमगादड़ों का झुंड ही दिखाई देता था। इसी प्राकृतिक दृश्य के आधार पर आम बोलचाल में लोगों ने इस भूभाग को चमगादड़ टापू कहना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे यह अनौपचारिक संबोधन इतना प्रचलित हुआ कि पूरे इलाके की स्थाई पहचान ही बन गया।

शहरीकरण की रफ्तार, मेला क्षेत्र का विस्तार और पेड़ों की कटाई

स्थानीय निवासी राजीव भट्ट इस क्षेत्र में आए बदलावों की गवाही देते हुए बताते हैं कि दशकों पहले हरिद्वार चारों दिशाओं से सघन हरियाली और जंगलों से घिरा हुआ था। गंगा किनारे के इस खास हिस्से में कई प्रजातियों के बड़े पेड़ खड़े थे, जहां अनगिनत चमगादड़ डेरा जमाए रहते थे। समय बीतने के साथ धर्मनगरी में श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ को संभालने के लिए बुनियादी ढांचे का तेजी से विस्तार शुरू हुआ। कुंभ और अर्धकुंभ जैसे बड़े धार्मिक आयोजनों के लिए मेला लैंड का दायरा बढ़ाया गया, गाड़ियों के लिए बड़ी-बड़ी पार्किंग बनाई गईं और रास्तों को चौड़ा करने के लिए पेड़ों को काटना पड़ा।

बदले हालात के बावजूद अमर रह गई पुरानी पहचान

पेड़ों के कटने और हरियाली छिन जाने के कारण चमगादड़ इस इलाके को छोड़कर दूसरी जगहों पर चले गए। प्राकृतिक पर्यावास उजड़ जाने के बाद यह घना जंगल एक खुले मैदान में तब्दील हो गया, लेकिन इस स्थान की ऐतिहासिक पहचान नहीं बदली। हरिद्वार में कई ऐसे स्थान हैं जिनके सरकारी या औपचारिक नाम चाहे जो भी हों, स्थानीय लोग उन्हें उनके पुराने नामों से ही पुकारते हैं। चमगादड़ टापू भी आधुनिकता की इस आंधी के बीच अपने अतीत और प्राकृतिक इतिहास की गवाही देता हुआ आज भी उसी नाम से जाना जाता है।

सवाल-जवाब

हरिद्वार में चमगादड़ टापू किस प्रसिद्ध धार्मिक स्थल के पास स्थित है?
चमगादड़ टापू हरिद्वार में विश्व प्रसिद्ध हर की पौड़ी के बिल्कुल नजदीक स्थित एक बड़ा खुला मैदान है।
इस जगह का नाम चमगादड़ टापू कैसे पड़ा?
ब्रिटिश काल में यहां गंगा किनारे घना जंगल था, जहां बड़े पेड़ों पर हजारों चमगादड़ दिन में उल्टे लटके रहते थे, जिसके चलते लोगों ने इसे चमगादड़ टापू कहना शुरू कर दिया।
क्या आज भी इस मैदान में चमगादड़ दिखाई देते हैं?
नहीं, विकास कार्यों, मेला लैंड विस्तार और पार्किंग निर्माण के चलते पेड़ कट जाने के कारण चमगादड़ अब वहां से उड़कर दूसरी जगहों पर चले गए हैं।
ब्रिटिश काल और आजादी के समय इस इलाके का स्वरूप कैसा था?
उस समय यहां पक्की सड़कों या कंक्रीट पुलों के बजाय केवल एक कच्ची पगडंडी थी और पूरा इलाका गंगा किनारे घने जंगलों से घिरा हुआ था।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp