उत्तराखंड में मानसून की सुस्ती के बाद मौसम एक बार फिर पूरी तरह पलटने वाला है। भारत मौसम विज्ञान विभाग के देहरादून केंद्र ने आज यानी 16 जुलाई 2026 के लिए राज्य के कई संवेदनशील पहाड़ी और मैदानी जिलों में भारी बारिश का येलो और ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग के मुताबिक गुरुवार को देहरादून, नैनीताल, पिथौरागढ़, चम्पावत और बागेश्वर इन पांच जिलों में कहीं-कहीं मेघगर्जन के साथ मूसलाधार बारिश पड़ने की प्रबल आशंका जताई गई है। बीते 24 घंटों में राज्य के कई हिस्सों में छिटपुट बारिश दर्ज हुई, लेकिन मैदानी इलाकों में तीखी धूप के चलते तापमान सामान्य से काफी ऊपर पहुंच गया और लोग उमस तथा भीषण गर्मी से बेहाल रहे। अब आज से मौसम के करवट लेने के साथ तापमान में गिरावट आने और लोगों को गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
मौसम विभाग की ताजा बुलेटिन बताती है कि आने वाले कुछ दिन उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों के लिए बेहद मुश्किल भरे हो सकते हैं। पहाड़ों में गरज-चमक के साथ आकाशीय बिजली गिरने और बारिश के बेहद तीव्र दौर पड़ने की चेतावनी दी गई है। रुद्रप्रयाग और चमोली जैसे संवेदनशील जिलों के लिए यह मानसूनी बारिश एक बार फिर मुसीबत बनकर लौट रही है, क्योंकि यहां के ग्रामीण पिछले साल की आपदा का दर्द अब तक नहीं भूल पाए हैं। लगातार हो रही बारिश से भूस्खलन और बोल्डर गिरने का खतरा तेजी से बढ़ गया है, जिसके चलते प्रशासन ने स्थानीय निवासियों के साथ-साथ चारधाम यात्रा पर आ रहे श्रद्धालुओं से भी बेहद सतर्क रहने की अपील की है। खासतौर पर नदी-नालों के किनारे रहने वाले लोगों और संवेदनशील रास्तों से गुजरने वाले यात्रियों को रात के समय सफर न करने की सलाह दी गई है, क्योंकि अचानक आने वाला पानी और पहाड़ का दरकना जानलेवा साबित हो सकता है।
कौशलपुर में जमीन धंसी, रात भर सहमा रहा परिवार
पहाड़ों में मानसून की दस्तक के साथ ही जमीन धंसने और पहाड़ दरकने की डरावनी तस्वीरें सामने आने लगी हैं। रुद्रप्रयाग जिले के बसुकेदार क्षेत्र के कौशलपुर गांव से एक चिंताजनक मामला सामने आया है। पिछले साल भीषण आपदा झेल चुके इस इलाके में इस बार भी मानसून शुरू होते ही खतरा फिर मंडराने लगा है। यहां एक स्थानीय ग्रामीण के घर के ठीक आगे की पूरी जमीन रातोंरात हुई मूसलाधार बारिश के कारण अचानक धंस गई, और तब से वहां भूस्खलन लगातार जारी है। पीड़ित परिवार का रहने का यही एकमात्र आशियाना अब सीधे खतरे की जद में आ गया है। डरे और बदहवास परिवार के पास अब सिर छिपाने के लिए कोई और सुरक्षित ठिकाना नहीं बचा है, जिस वजह से पूरा परिवार इस खौफनाक मंजर के बीच रातभर सो तक नहीं पा रहा। परिवार ने स्थानीय प्रशासन से फौरन मदद की गुहार लगाई है ताकि कोई बड़ा हादसा होने से पहले ही उसे टाला जा सके।
कुमाऊं में झमाझम, काठगोदाम में सबसे ज्यादा बारिश
बीते 24 घंटों के आंकड़ों पर गौर करें तो कुमाऊं मंडल के कई हिस्सों में अच्छी-खासी बारिश दर्ज हुई है। कुमाऊं के प्रवेश द्वार कहे जाने वाले काठगोदाम में सबसे ज्यादा 95.0 मिमी मूसलाधार बारिश रिकॉर्ड हुई। इसके अलावा कपकोट के दोंगली और नैनीताल के ज्यूलीकोट में भी बारिश दर्ज हुई, जबकि डीडीहाट में 13.2 मिमी और मुनस्यारी में 7.2 मिमी बारिश हुई। आज यानी 16 जुलाई को भी मौसम विभाग ने कुमाऊं मंडल के बागेश्वर, पिथौरागढ़, चम्पावत और नैनीताल जिलों के लिए भारी बारिश का विशेष अलर्ट जारी किया है। मंडल के ज्यादातर पहाड़ी रास्तों पर मलबा आने की आशंका बनी हुई है, जिससे पिथौरागढ़ और धारचूला को जोड़ने वाले कई संपर्क मार्ग बाधित हो सकते हैं और आवाजाही मुश्किल हो सकती है।
देहरादून-मसूरी में बदला मौसम, उमस से मिलेगी राहत
राजधानी देहरादून और आसपास के पर्यटन स्थल मसूरी में आज मौसम का मिजाज पूरी तरह बदला नजर आएगा। बीते 24 घंटों में मसूरी में 12.0 मिमी बारिश दर्ज हुई, जबकि मालदेवता क्षेत्र में 37 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज झक्कड़ हवाएं चलीं। देहरादून शहर और आसपास के मैदानी इलाकों में बीते कुछ दिनों से उमस भरी गर्मी ने लोगों को परेशान कर रखा था, ऐसे में आज भारी बारिश के दौर के बाद बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। देहरादून मौसम केंद्र के वैज्ञानिकों के मुताबिक आज राजधानी और आसपास के इलाकों में गरज-चमक के साथ तीव्र बौछारें पड़ सकती हैं, और कुछ संवेदनशील इलाकों में भारी बारिश होने की भी पूरी संभावना है।
गढ़वाल के पहाड़ों पर बारिश और तेज होगी
गढ़वाल मंडल के पर्वतीय जिलों में भी मानसून की सक्रियता लगातार बनी हुई है। चमोली जिले के गैरसैंण में 43.0 मिमी बारिश दर्ज की गई है, जबकि उत्तरकाशी के सांकरी में 21.0 मिमी और नैतवाड़ में 11.0 मिमी बारिश हुई। मौसम विभाग का कहना है कि गढ़वाल मंडल के उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग और टिहरी जिलों में 17 और 18 जुलाई को बारिश की तीव्रता और बढ़ जाएगी। इन जिलों में कहीं-कहीं बादलों की गर्जना के साथ बिजली चमकने और बेहद तीव्र बारिश होने का अनुमान जताया गया है, जिससे अलकनंदा, मंदाकिनी और भागीरथी जैसी प्रमुख नदियों के जलस्तर में भी उफान आ सकता है।
मैदानी जिलों में गर्मी के बीच बिजली-आंधी का खतरा
अब बात करें उत्तराखंड के मैदानी जिलों की, तो बीते 24 घंटों में उधम सिंह नगर के पंतनगर में राज्य का सबसे ज्यादा अधिकतम तापमान 36.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ, जिसने उमस और गर्मी से लोगों का जीना मुहाल कर दिया। वहीं दूसरी ओर नैनीताल के मुक्तेश्वर में राज्य का सबसे कम न्यूनतम तापमान 14.9 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। आज 16 जुलाई को हरिद्वार में हल्की बारिश या गर्जना के साथ बौछारें पड़ने की संभावना जताई गई है। हालांकि 17 जुलाई से उधम सिंह नगर और हरिद्वार, दोनों ही मैदानी जिलों में आकाशीय बिजली चमकने और तेज हवाओं के साथ बारिश की गतिविधियों में तेजी आने की पूरी संभावना जताई गई है।











