बर्नपुर के लोगों ने रविवार को अपनी आंखों के सामने एक जीता-जागता इतिहास मलबे में बदलते देखा। बर्दवान जिले के बर्नपुर इलाके में करीब 60 साल पुराने सिनेमाघर पर बुलडोजर चला और कुछ ही घंटों में पूरी इमारत जमींदोज हो गई। यह कार्रवाई सेल-आईएसपी यानी इस्को स्टील प्लांट की उस मुहिम का हिस्सा थी, जिसके तहत कंपनी अपनी जमीन से अवैध कब्जे लगातार हटा रही है। बर्नपुर सिनेमा हॉल के नाम से मशहूर यह इमारत दशकों तक इलाके की पहचान रही, और इसके गिरने की खबर फैलते ही मौके पर लोगों की भीड़ जमा हो गई।
दशकों पुरानी यादें और भावुक पल
सिनेमा हॉल को टूटता देख स्थानीय लोगों के चेहरे पर मायूसी साफ झलक रही थी। इलाके के बुजुर्गों के लिए यह इमारत सिर्फ ईंट-गारे का ढांचा नहीं, बल्कि जवानी के दिनों की यादों का खजाना थी। कई बुजुर्ग निवासियों ने बताया कि उन्होंने अपने परिवार और दोस्तों के साथ इसी हॉल में उस दौर की मशहूर फिल्में देखी थीं। लंबे समय से यह सिनेमा हॉल बंद पड़ा था, लेकिन अपने दौर में यह इलाके के मनोरंजन का सबसे बड़ा ठिकाना हुआ करता था। यही वजह है कि हॉल के गिरते ही पुरानी यादें फिर से ताजा हो गईं और लोगों में भावनात्मक कसक साफ देखने को मिली। कुछ बुजुर्गों ने तो यह भी कहा कि इस हॉल की दीवारों के साथ उनकी जवानी के सबसे खूबसूरत लम्हे जुड़े हुए थे, और उसे इस तरह गिरता देखना किसी अपने को खोने जैसा अनुभव था।
क्यों चला बुलडोजर
दरअसल राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद से सेल-आईएसपी अपनी जमीन पर बने कथित अवैध निर्माणों के खिलाफ लगातार अभियान चला रहा है। इस मुहिम के तहत पहले भी कई राजनीतिक दलों के कार्यालय, क्लब और दूसरे ढांचे तोड़े जा चुके हैं। जानकारी के अनुसार बर्नपुर सिनेमा हॉल भी सेल-आईएसपी की ही जमीन पर बना हुआ था, इसलिए प्रशासन ने इसे भी अतिक्रमण की सूची में रखकर ध्वस्त करने का फैसला लिया। स्थानीय प्रशासन और कंपनी अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई पूरी तरह से जमीन को कब्जा मुक्त कराने की योजना का हिस्सा है, न कि किसी खास इमारत को निशाना बनाने का मामला।
संरक्षण की मांग उठी, कंपनी अब भी चुप
हालांकि स्थानीय लोगों के एक तबके का कहना है कि इतनी पुरानी इमारत को पूरी तरह गिराने के बजाय इसे बचाया जा सकता था। उनका सुझाव है कि इस हॉल को सामुदायिक भवन या किसी और जनहित के काम में बदला जा सकता था, जिससे इमारत भी बच जाती और स्थानीय लोगों को इसका फायदा भी मिलता। इन लोगों के मुताबिक यह सिनेमा हॉल सिर्फ मनोरंजन की जगह नहीं था, बल्कि बर्नपुर और आसपास के इलाकों की सामूहिक यादों और विरासत का हिस्सा भी था। इसके बावजूद प्रशासन ने अतिक्रमण हटाओ अभियान के तहत इसे गिराने का ही रास्ता चुना। फिलहाल इस पूरे मामले पर सेल-आईएसपी यानी इस्को स्टील प्लांट की तरफ से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, जिसके चलते स्थानीय लोगों में असमंजस और नाराजगी दोनों बनी हुई है।











