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सतना के जंगल में दो महीने पुराना राज़: करंट से मरे बाघ का शव दफनाकर छिपाया, वन चौकीदार हिरासत मेंमध्य प्रदेश
4 जुल॰ 2026, 10:09 am (45 दिन पहले)· 2

सतना के जंगल में दो महीने पुराना राज़: करंट से मरे बाघ का शव दफनाकर छिपाया, वन चौकीदार हिरासत में

मध्य प्रदेश के सतना जिले के सरभंगा जंगल में जंगली सुअर के शिकार के लिए बिछाए गए बिजली के तार की चपेट में आकर एक बाघ की मौत हो गई थी, जिसे छिपाने के लिए शव को जंगल में ही दफना दिया गया था। दो महीने बाद वन विभाग के चौकीदार मिन्नता सिंह गोंड की पूछताछ में यह राज खुला और बीट करारिया से बाघ का कंकाल बरामद हुआ।

मध्य प्रदेश के सतना जिले के मझगवां वन परिक्षेत्र स्थित सरभंगा जंगल से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां जंगली सुअर के शिकार के लिए बिछाए गए बिजली के तार की चपेट में आकर एक बाघ की मौत हो गई और घटना को छिपाने के लिए उसके शव को जंगल में ही गड्ढा खोदकर दफना दिया गया। यह पूरा मामला करीब दो महीने पुराना है, जिसका खुलासा वन विभाग के ही एक चौकीदार ने पूछताछ के दौरान किया। इस घटना ने वन विभाग की कार्यप्रणाली और जंगल की निगरानी व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मुखबिर की सूचना पर शुरू हुई गोपनीय पड़ताल

वन विभाग को करीब पांच दिन पहले एक मुखबिर से गुप्त सूचना मिली थी कि सरभंगा जंगल में एक बाघ की संदिग्ध हालात में मौत हुई है और उसके शव को जंगल के अंदर ही दफना दिया गया है। इस सूचना को गंभीरता से लेते हुए अधिकारियों ने तुरंत गोपनीय जांच शुरू कर दी। संभावित इलाकों को चिन्हित किया गया और मामले की बारीकी से पड़ताल शुरू हुई। गुरुवार को डॉग स्क्वॉड, उड़नदस्ता दल और वन अधिकारियों की एक संयुक्त टीम ने सरभंगा जंगल में बड़े स्तर पर सर्च ऑपरेशन चलाया। हालांकि लगातार हो रही बारिश, दुर्गम पहाड़ी इलाके और घने जंगल के चलते टीम को उस दिन तुरंत कोई कामयाबी हाथ नहीं लगी।

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पूछताछ में वन चौकीदार ने उगला राज

जांच के दौरान गुरुवार देर रात वन विभाग को एक अहम सुराग हाथ लगा। इसी सुराग के आधार पर शुक्रवार सुबह सरभंगा क्षेत्र में तैनात वन चौकीदार मिन्नता सिंह गोंड को पूछताछ के लिए हिरासत में ले लिया गया। अधिकारियों के मुताबिक पूछताछ के दौरान उसने कबूल किया कि करीब दो महीने पहले जंगली सुअर का शिकार करने की नीयत से जंगल में बिजली का तार बिछाया गया था। इसी दौरान एक बाघ इस करंट की चपेट में आ गया और उसकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना उजागर होने के डर से बाघ के शव को ठिकाने लगाने की योजना बनाई गई।

निशानदेही पर गड्ढे से निकला बाघ का कंकाल

जांच में यह भी सामने आया कि किसी को भनक न लगे, इसके लिए बाघ के शव को जंगल में ही गड्ढा खोदकर दफना दिया गया था। आरोपी की निशानदेही पर वन विभाग की टीम बीट करारिया के कम्पार्टमेंट नंबर पीएफ-820 पहुंची। मौके पर खुदाई कराई गई तो वहां से बाघ का कंकाल और उससे जुड़े दूसरे अवशेष बरामद हुए। घटना को करीब दो महीने बीत चुके थे, इसलिए शव पूरी तरह गल-सड़ चुका था। बरामद अवशेषों को आगे की वैज्ञानिक प्रक्रिया के लिए सरभंगा वन विश्राम गृह लाया गया।

मुकुंदपुर जू के विशेषज्ञों ने की जांच, हुआ अंतिम संस्कार

मामले की गंभीरता को देखते हुए वन विभाग ने मुकुंदपुर जू से वन्यप्राणी चिकित्सक डॉ. नितिन गुप्ता और उनकी विशेषज्ञ टीम को मौके पर बुलाया। टीम ने बाघ के अवशेषों की बारीकी से जांच की और डीएनए सहित अन्य वैज्ञानिक परीक्षण के लिए जरूरी नमूने सुरक्षित रखे। जांच पूरी होने के बाद वरिष्ठ वन अधिकारियों और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में बाघ के अवशेषों का विधिवत अंतिम संस्कार किया गया।

दो और संदिग्ध बेनकाब, कुछ आरोपी अब भी फरार

वन विभाग के मुताबिक पूछताछ के दौरान दो अन्य संदिग्ध व्यक्तियों की भूमिका भी सामने आई है, जिनसे फिलहाल पूछताछ जारी है। वहीं कुछ आरोपी अभी फरार बताए जा रहे हैं। विभाग का दावा है कि इस पूरे घटनाक्रम में शामिल हर व्यक्ति की पहचान की जाएगी और उनके खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

वन विभाग की अपनी ही निगरानी व्यवस्था पर सवाल

इस पूरे मामले ने वन विभाग की निगरानी व्यवस्था की पोल खोल दी है, क्योंकि जिस इलाके की सुरक्षा और वन्यजीवों की निगरानी की जिम्मेदारी विभाग के अपने कर्मचारियों पर थी, वहीं उसी तंत्र से जुड़े परिवार के सदस्य अगर शिकार और सबूत मिटाने जैसी गतिविधियों में शामिल पाए जाते हैं, तो इसे सुरक्षा व्यवस्था की बड़ी नाकामी माना जाएगा। सबसे बड़ा सवाल यही है कि प्रदेश के एक महत्वपूर्ण टाइगर लैंडस्केप में बाघ की मौत जैसी गंभीर घटना पूरे दो महीने तक विभाग की नजरों से कैसे ओझल रही। फिलहाल वन विभाग पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जांच में जुटा है। अधिकारियों का कहना है कि बाघ की मौत के असली कारण, शिकार में शामिल लोगों की सही संख्या, करंट बिछाने की योजना और घटना को छिपाने की पूरी साजिश की तह तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

सवाल-जवाब

यह घटना कहां हुई?
मध्य प्रदेश के सतना जिले के मझगवां वन परिक्षेत्र स्थित सरभंगा जंगल में यह घटना हुई।
बाघ की मौत कैसे हुई?
जंगली सुअर का शिकार करने के लिए जंगल में बिछाए गए बिजली के तार की चपेट में आने से करंट लगने से बाघ की मौके पर ही मौत हो गई।
यह मामला कब हुआ था और कब सामने आया?
बाघ की मौत करीब दो महीने पहले हुई थी, लेकिन इसका खुलासा हाल ही में पूछताछ के दौरान हुआ।
मामले का खुलासा कैसे हुआ?
वन विभाग को करीब पांच दिन पहले एक मुखबिर से सूचना मिली थी, जिसके आधार पर जांच शुरू हुई और वन चौकीदार की पूछताछ में सच सामने आया।
किसे हिरासत में लिया गया?
सरभंगा क्षेत्र में तैनात वन चौकीदार मिन्नता सिंह गोंड को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया।
बाघ का शव कहां से बरामद हुआ?
आरोपी की निशानदेही पर बीट करारिया के कम्पार्टमेंट नंबर पीएफ-820 में खुदाई करने पर बाघ का कंकाल और अन्य अवशेष मिले।
अवशेषों की जांच किसने की और उनका क्या हुआ?
मुकुंदपुर जू के वन्यप्राणी चिकित्सक डॉ. नितिन गुप्ता और उनकी टीम ने अवशेषों की जांच कर नमूने सुरक्षित किए, फिर वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में उनका अंतिम संस्कार किया गया।
आगे क्या कार्रवाई होगी?
जांच पूरी होने के बाद वन विभाग सभी दोषियों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई करेगा; दो अन्य संदिग्धों से पूछताछ जारी है और कुछ आरोपी फरार हैं।
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