पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर में अन्नपूर्णा योजना के लिए किए गए एक आवेदन ने स्थानीय राजनीति में खलबली मचा दी है। विवाद का केंद्र दुर्गापुर नगर निगम के तृणमूल कांग्रेस के पूर्व पार्षद, मेयर परिषद सदस्य और पूर्व प्रशासक मंडली के उपाध्यक्ष धर्मेंद्र यादव की पत्नी सपना यादव द्वारा भरा गया आवेदन पत्र है। आरोप है कि इस आवेदन में परिवार की वार्षिक आय महज 60 हजार रुपये दर्शाई गई है। जब यह दस्तावेज सार्वजनिक हुआ, तो विपक्ष ने इसे सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग की कोशिश करार दिया है।
पूर्व नेता की पृष्ठभूमि और आय पर सवाल
धर्मेंद्र यादव की राजनीतिक पहचान काफी प्रभावशाली रही है। वे दुर्गापुर नगर निगम के वार्ड संख्या 13 के पार्षद रहे हैं और मेयर परिषद सदस्य के रूप में भी सेवा दे चुके हैं। नगर निगम का कार्यकाल समाप्त होने के बाद उन्हें पहले प्रशासक मंडली के सदस्य और फिर उपाध्यक्ष का पद मिला था। इस तरह के कद वाले नेता के परिवार द्वारा इतनी कम वार्षिक आय दिखाना आम लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। आलोचकों का तर्क है कि जिस व्यक्ति ने नगर निगम में बड़े पदों पर काम किया हो, उनके परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर होने का दावा संदेह पैदा करता है।
विपक्ष की निष्पक्ष जांच की मांग
इस पूरे घटनाक्रम पर भाजपा ने कड़ा रुख अपनाया है। दुर्गापुर पश्चिम के भाजपा विधायक लक्ष्मण घड़ुई ने इस पर तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा है कि सरकार बिना भेदभाव के पात्र लोगों तक लाभ पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन एक प्रभावशाली पद पर रह चुके परिवार द्वारा इतनी कम आय दिखाना जांच का गंभीर विषय है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके।
आरोप पर धर्मेंद्र यादव का पक्ष
दूसरी तरफ, आरोपों से घिरे धर्मेंद्र यादव ने खुद पर लगे तमाम दावों को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि वर्तमान में वे बेरोजगार हैं और उनकी अपनी कोई आय नहीं है। उन्होंने इन आरोपों को पूरी तरह से निराधार और राजनीति से प्रेरित बताया है। फिलहाल, इस मामले पर प्रशासनिक स्तर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है और आवेदन की सच्चाई की पुष्टि का इंतजार किया जा रहा है।











