पश्चिम बंगाल के रेजिनगर में एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए सुवेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और विधायक हुमायूं कबीर पर तीखा हमला बोला है। सुवेंदु अधिकारी ने जोर देकर कहा कि वे किसी भी सूरत में ऐसी गैर-जिम्मेदाराना बयानबाजी को स्वीकार नहीं करेंगे, जिससे राज्य में सांप्रदायिक माहौल बिगड़ने का खतरा हो। उन्होंने स्वयं को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की कार्यशैली से पूरी तरह अलग बताते हुए खुद को मजबूत और निडर नेतृत्व के रूप में पेश किया है।
चुनाव और बयानों पर तल्खी
यह पूरा विवाद आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) के विधायक हुमायूं कबीर द्वारा हाल ही में दिए गए कुछ बयानों के बाद खड़ा हुआ है। सुवेंदु अधिकारी का कहना है कि वे संविधान के दायरे में रहने वाले व्यक्ति हैं और उन्होंने संबंधित विधायक को भी चेतावनी दी है कि वे अपने शब्दों के चयन में सावधानी बरतें। अधिकारी का मानना है कि जनप्रतिनिधियों को ऐसे बयानों से बचना चाहिए जो किसी समुदाय की भावनाओं को भड़का सकें। रेजिनगर की सीट हुमायूं कबीर द्वारा नौदा सीट से जीतने के बाद खाली हुई है, और अब वहां उपचुनाव की सुगबुगाहट तेज है।
विकास बनाम राजनीति का मुद्दा
आगामी 30 से 45 दिनों के भीतर रेजिनगर में उपचुनाव होने की प्रबल संभावनाएं हैं। सुवेंदु अधिकारी ने स्पष्ट किया कि उनकी रणनीति अब केवल हिंदू-मुस्लिम के पुराने विवादों में उलझने की नहीं, बल्कि स्थानीय जनता की आवश्यकताओं को पूरा करने और क्षेत्र में विकास लाने की है। उन्होंने तृणमूल कांग्रेस की पूर्ववर्ती सरकार पर आरोप लगाया कि उन्होंने सीएए (संशोधित नागरिकता कानून), एनआरसी (राष्ट्रीय नागरिक पंजी) और वक्फ अधिनियम जैसे मुद्दों के बहाने पूरे मुर्शिदाबाद जिले में हिंसा को बढ़ावा दिया है, जिससे स्थानीय नागरिकों को निरंतर मुश्किलों का सामना करना पड़ा है।
उपचुनाव की सियासी बिसात
विधानसभा के बजट सत्र के दौरान 29 जून को भी सुवेंदु अधिकारी ने हुमायूं कबीर को निशाने पर लिया था। अधिकारी ने आरोप लगाया था कि कबीर मतदाताओं का ध्रुवीकरण करने के लिए जानबूझकर ऐसे भड़काऊ भाषण दे रहे हैं। चर्चा है कि रेजिनगर की रिक्त सीट पर उपचुनाव के दौरान हुमायूं कबीर के बेटे उम्मीदवार हो सकते हैं। उल्लेखनीय है कि सुवेंदु अधिकारी ने भवानीपुर में ममता बनर्जी को हराने के बाद नंदीग्राम की सीट छोड़ी थी, जहां अब रेजिनगर के साथ ही उपचुनाव होने के संकेत मिल रहे हैं। सुवेंदु अधिकारी ने दोहराया कि उनका रुख ममता बनर्जी के मुकाबले कहीं अधिक स्पष्ट और कठोर है।











