पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर से एक बेहद दर्दनाक हादसे की खबर सामने आई है, जिसमें दो ठेका मजदूरों की जान चली गई और एक अन्य मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गया। यह हादसा दुर्गापुर प्रोजेक्ट लिमिटेड, यानी डीपीएल के कूलिंग टावर पर उस वक्त हुआ, जब तीनों मजदूर ऊंचाई पर काम कर रहे थे। हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस घटनास्थल पर पहुंची और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी।
रेलिंग काटते वक्त अचानक बिगड़ा तीनों का संतुलन
मिली जानकारी के मुताबिक, कूलिंग टावर पर मजदूर रेलिंग काटने का काम कर रहे थे। इसी दौरान अचानक तीनों का संतुलन बिगड़ गया और वे ऊंचाई से सीधे नीचे जा गिरे। यह गिरावट इतनी तेज थी कि दो मजदूरों ने गिरते ही मौके पर दम तोड़ दिया। तीसरे मजदूर की हालत बेहद नाजुक बताई जा रही है और उसे तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया, जहां फिलहाल उसका इलाज चल रहा है। डॉक्टर उसकी हालत पर लगातार नजर बनाए हुए हैं, क्योंकि हादसे की गंभीरता को देखते हुए उसकी जान को लेकर भी खतरा बना हुआ है।
कोक ओवन थाना पुलिस और बीएमएस पदाधिकारी मौके पर पहुंचे
हादसे की जानकारी मिलते ही कोक ओवन थाना पुलिस और भारतीय मजदूर संघ, यानी बीएमएस के पदाधिकारी तुरंत मौके पर पहुंच गए। पुलिस ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि हादसे के वक्त कूलिंग टावर पर सुरक्षा मानकों का ठीक से पालन किया जा रहा था या नहीं। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि कहीं सुरक्षा इंतजामों में कोई चूक तो नहीं हुई, जिसकी वजह से तीन मजदूरों को अपनी जान गंवानी पड़ी या गंभीर चोट झेलनी पड़ी। इस दुखद घटना के बाद डीपीएल परिसर में शोक का माहौल है और कर्मचारियों में गहरा सन्नाटा पसरा हुआ है। पुलिस ने हादसे की वास्तविक वजह जानने के लिए अपनी जांच को और तेज कर दिया है, ताकि यह साफ हो सके कि यह हादसा तकनीकी खामी से हुआ या फिर सुरक्षा उपकरणों में कमी की वजह से।
हल्दिया में पाइपलाइन में आग लगने से भी जा चुकी है एक जान
पश्चिम बंगाल में औद्योगिक परिसरों में हादसों की यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले पूर्व मेदिनीपुर जिले में स्थित हल्दिया पेट्रोकेमिकल्स परिसर में नेफ्था की एक पाइपलाइन में भीषण आग लग गई थी, जिसमें एक व्यक्ति की जान चली गई थी। इस हादसे में 20 से ज्यादा लोग भी घायल हुए थे। आग इतनी भयानक थी कि इसकी चपेट में आकर आसपास के कई घर जलकर राख हो गए थे। इतना ही नहीं, घटनास्थल के पास से गुजर रही रेलवे की ओवरहेड विद्युत लाइन भी इस आग में क्षतिग्रस्त हो गई थी। ये दोनों घटनाएं एक बार फिर औद्योगिक परिसरों में सुरक्षा इंतजामों पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं।











