कोलकाता पुलिस के प्रशासनिक अमले ने अनुशासनहीनता के खिलाफ एक बेहद सख्त कदम उठाते हुए अपने दो वरिष्ठ उपायुक्तों (डिप्टी कमिश्नरों) को निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई एक आंतरिक जांच के बाद की गई है, जिसमें सोशल मीडिया के इस्तेमाल से जुड़े नियमों और विभागीय दिशा-निर्देशों का गंभीर उल्लंघन पाया गया। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने इस फैसले की पुष्टि करते हुए स्पष्ट किया कि कानून व्यवस्था बनाए रखने वाले अधिकारियों से सार्वजनिक और डिजिटल मंचों पर जिस तरह की तटस्थता की उम्मीद की जाती है, उसका उल्लंघन किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
व्हाट्सऐप ग्रुप का विवाद और निलंबित अधिकारी
निलंबन का सामना करने वाले इन दोनों आला अधिकारियों की पहचान उत्तर मंडल के पुलिस उपायुक्त-तृतीय विधान साहा और बंदरगाह मंडल-द्वितीय के पुलिस उपायुक्त पार्थ प्रतिम दास के रूप में हुई है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस पूरे विवाद की जड़ें साल 2025 में पुलिसकर्मियों के एक व्हाट्सऐप ग्रुप में हुई बातचीत से जुड़ी हैं। इस ग्रुप में विधान साहा ने कथित तौर पर तत्कालीन नेता प्रतिपक्ष और वर्तमान मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के खिलाफ बेहद आपत्तिजनक और अमर्यादित टिप्पणियां की थीं। वहीं, दूसरे अधिकारी पार्थ प्रतिम दास पर आरोप है कि उन्होंने उन टिप्पणियों का समर्थन किया था। मामले की शिकायत मिलने के बाद कोलकाता पुलिस ने इस पर त्वरित संज्ञान लेते हुए जांच शुरू की और दोनों अधिकारियों को निलंबित करने का फैसला किया। पुलिस प्रशासन ने यह भी साफ किया है कि दोनों अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्यवाही भी आगे बढ़ाई जाएगी।
कमिश्नर अजय कुमार नंद की सख्त हिदायत
दो वरिष्ठ अधिकारियों पर यह गाज ऐसे समय में गिरी है, जब हाल ही में कोलकाता पुलिस कमिश्नर अजय कुमार नंद ने सोशल मीडिया पर संयम बरतने की सख्त हिदायत दी थी। पुलिस कमिश्नर नंद ने अपने मातहतों और विशेषकर वरिष्ठ अधिकारियों को ऑनलाइन मंचों पर किसी भी प्रकार की टिप्पणी करने या सामग्री साझा करते समय अत्यधिक सतर्क रहने का निर्देश दिया था। उन्होंने चेताया था कि पुलिस बल के किसी भी सदस्य द्वारा सोशल मीडिया पर की गई अभद्र या अनुचित टिप्पणी का समाज पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है और इससे पुलिस विभाग की छवि भी धूमिल होती है। उन्होंने ऑनलाइन गतिविधियों में पूर्ण रूप से अनुशासन बनाए रखने की आवश्यकता पर बल दिया था।
आरजी कर अस्पताल में तैनात CISF जवान पर संगीन आरोप
एक अन्य गंभीर घटनाक्रम में, कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल की सुरक्षा में तैनात केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के एक जवान को बलात्कार के गंभीर आरोपों में गिरफ्तार किया गया है। आरोपी की पहचान मोहम्मद पारुल अहमद के तौर पर हुई है, जो मूल रूप से असम का रहने वाला है और अस्पताल परिसर में सुरक्षा ड्यूटी पर तैनात था। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, पीड़िता की मां आरजी कर मेडिकल कॉलेज में उपचाराधीन थीं और इसी दौरान पीड़िता की पहचान इस सुरक्षाकर्मी से हुई थी। आरोप है कि सुरक्षाकर्मी ने युवती को झांसा देकर बीती 8 जून को एक होटल में बुलाया और उसके साथ दुष्कर्म किया। इसके बाद आरोपी ने युवती के कुछ आपत्तिजनक वीडियो भी बना लिए, जिनके आधार पर वह उसे ब्लैकमेल करने लगा और उसके साथ बार-बार इस घिनौने कृत्य को अंजाम दिया। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को हिरासत में ले लिया है।











