पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में 14 जुलाई को तीसरा नमस्ते दिवस मनाया गया, जिसमें सफाई कर्मियों को सुरक्षित माहौल और सम्मान दिलाने की सरकार की कोशिशों पर जोर दिया गया। इसी दिन देशभर के शहरी स्थानीय निकायों में भी इससे जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए गए।
केंद्रीय मंत्री वीरेंद्र कुमार ने क्या कहा
कार्यक्रम में मौजूद केंद्रीय मंत्री वीरेंद्र कुमार ने कहा कि नमस्ते योजना यह दिखाती है कि सरकार हर सफाई कर्मी को गरिमा और सुरक्षा के साथ काम करने का मौका देने के लिए प्रतिबद्ध है। वे सफाई कर्मियों को सम्मानित करने के लिए खुद कोलकाता पहुंचे थे।
कोलकाता में पहली बार दिव्य कला मेला
नमस्ते दिवस के साथ ही केंद्र सरकार और पश्चिम बंगाल सरकार ने मिलकर कोलकाता में पहला दिव्य कला मेला भी आयोजित किया। इस तरह एक ही शहर में सफाई कर्मियों को समर्पित कार्यक्रम और दिव्यांगजनों की कला प्रतिभा दिखाने वाला आयोजन साथ साथ हुआ।
सिर्फ कोलकाता तक सीमित नहीं, पूरे देश में असर
तीसरा नमस्ते दिवस भले ही कोलकाता में मुख्य आयोजन के तौर पर मनाया गया हो, लेकिन इसी तर्ज पर देश के अलग अलग शहरी स्थानीय निकायों में भी समानांतर कार्यक्रम हुए, जो बताता है कि यह योजना किसी एक राज्य तक सीमित नहीं है। इससे पहले नमस्ते योजना को सफाई कर्मियों की गरिमा और सुरक्षा बढ़ाने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल करने वाली बताया गया था, और फरवरी में राज्य मंत्री बी.एल. वर्मा की मौजूदगी में पीलीभीत में भी नमस्ते योजना से जुड़ा एक कार्यक्रम हुआ था।
यह योजना क्यों अहम है
भारत के शहरों में सफाई का काम करने वाले कर्मियों को अक्सर असुरक्षित और जोखिम भरी परिस्थितियों में काम करना पड़ता है, जिससे उनकी सेहत और जान दोनों को खतरा रहता है। नमस्ते योजना का मकसद इन्हीं हालात को बदलकर सफाई कर्मियों को सुरक्षित और सम्मानजनक काम का माहौल देना है, और कोलकाता जैसे आयोजनों के जरिए सरकार इस मुहिम पर लोगों का ध्यान खींचने की कोशिश कर रही है।




















