हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के सरोआ क्षेत्र से ताल्लुक रखने वाले 42 वर्षीय रोशन लाल ने अपनी कड़ी मेहनत, अटूट लगन और मजबूत इच्छाशक्ति के बल पर सफलता की एक अनूठी कहानी लिखी है। बेहद साधारण और आर्थिक रूप से कमजोर मजदूर परिवार में जन्म लेने के बावजूद रोशन लाल ने तमाम बाधाओं को पार करते हुए अपनी पढ़ाई को कभी नहीं रोका। उन्होंने शिक्षा के साथ-साथ लगातार मेहनत-मजदूरी का काम भी जारी रखा और अंततः उच्च शिक्षा प्राप्त करने में कामयाबी हासिल की। जीवन में दो बार असफलता का सामना करने के बाद अपने तीसरे प्रयास में उन्होंने कमीशन की परीक्षा पास कर ली है, जिसके परिणामस्वरूप अब उनका चयन एक सीबीएसई स्कूल में म्यूजिक टीचर के पद पर हो गया है। इस परीक्षा के परिणाम 26 अगस्त 2026 को घोषित किए गए थे, जिसके बाद से पूरे इलाके में जश्न और खुशी का माहौल है।
शिक्षा का लंबा सफर और संघर्ष
मंडी जिले के पंडोह के पास स्थित सराज विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सरोआ गांव के निवासी रोशन लाल ने अपनी शुरुआती स्कूली शिक्षा और हाई स्कूल की पढ़ाई अपने ही गांव के सरोआ स्कूल से पूरी की। इसके बाद उन्होंने पंडोह स्कूल से अपनी वरिष्ठ माध्यमिक शिक्षा पूरी की और फिर मंडी कॉलेज से बीए की डिग्री प्राप्त की। अपनी उच्च शिक्षा के इस लंबे और कठिन सफर में उन्होंने संगीत और इतिहास विषयों में डबल एमए किया। इसके अलावा उन्होंने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से बीएड और एमफिल की डिग्रियां हासिल कीं, तथा दिल्ली विश्वविद्यालय से डीएलएड का पाठ्यक्रम भी पूरा किया। इस प्रतिष्ठित परीक्षा में सफलता पाने के लिए रोशन लाल ने काफी लंबे समय तक संघर्ष किया। उन्होंने साल 2012 में पहली बार और फिर साल 2017 में दूसरी बार इस परीक्षा में हाथ आजमाया, लेकिन दोनों ही बार उन्हें निराशा हाथ लगी और वे सफल नहीं हो पाए। हालांकि, इन असफलताओं के बावजूद उन्होंने कभी अपना हौसला नहीं खोया और साल 2026 में तीसरी बार पूरे आत्मविश्वास के साथ परीक्षा दी, जिसमें उन्होंने आखिरकार सफलता अपने नाम कर ली। 26 अगस्त को आए परिणामों के बाद उनके घर परिवार और पूरे क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ गई। रोशन लाल की संघर्ष गाथा सिर्फ यहीं तक सीमित नहीं है, क्योंकि उन्हें अपने एमफिल के दिनों में भी दो बार असफलता का सामना करना पड़ा था, लेकिन अपने तीसरे ही प्रयास में उन्होंने पूरे हिमाचल प्रदेश में टॉप करके अपनी प्रतिभा और मेहनत का लोहा मनवा दिया।
पारिवारिक पृष्ठभूमि और शुरुआती मुश्किलें
रोशन लाल के पिता परस राम एक मेहनतकश मजदूर के रूप में काम करते हैं और उनकी माता ब्रेसती देवी एक गृहणी हैं। उनके परिवार में दो भाई भी हैं, जिनमें से एक भाई बीरबल मिस्त्री का काम संभालते हैं और दूसरे भाई महेश कुमार एक इलेक्ट्रिशियन तथा प्लंबर के तौर पर कार्य करते हैं। रोशन लाल ने खुद इस बात का जिक्र किया है कि घर की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर होने के कारण उन्हें अपने बचपन के दिनों से ही अपनी पढ़ाई का खर्च उठाने और शिक्षा जारी रखने के लिए पढ़ाई के साथ-साथ अलग-अलग जगहों पर जाकर मजदूरी और मेहनत करनी पड़ी। इतनी सारी कठिन परिस्थितियों और आर्थिक तंगी के बीच भी उन्होंने कभी शिक्षा का साथ नहीं छोड़ा। इसके अलावा वह लंबे समय से शिक्षा के क्षेत्र में भी अपना योगदान देते आ रहे हैं। उन्होंने वर्ष 2012-13 के दौरान पालमपुर डीएवी में शिक्षण कार्य किया। इसके बाद उन्होंने साल 2013-14 और 2014-15 में नव भारती पब्लिक सीनियर सेकेंडरी स्कूल सरोआ में अपनी सेवाएं दीं। इसके बाद साल 2015 से वह लगातार एमएस पब्लिक स्कूल सरोआ में मुख्यध्यापक और चेयरमैन के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। संगीत की दुनिया में भी रोशन लाल की एक अलग और खास पहचान रही है। वह लंबे समय से विभिन्न धार्मिक आयोजनों में भजन गायन और कीर्तन करने का काम करते आए हैं और स्थानीय स्तर पर बच्चों तथा अन्य लोगों को संगीत सिखाने का कार्य भी पूरी निष्ठा से करते रहे हैं। इसके अलावा वह हिमाचल प्रदेश के विभिन्न मेलों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भी अपने संगीत का हुनर पेश करते रहे हैं। संगीत विषय में उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद अब एक सीबीएसई स्कूल में म्यूजिक टीचर के रूप में उनका चुना जाना उनके पूरे संगीत सफर की सबसे बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। उनकी पत्नी पार्वती देवी भी काफी शिक्षित हैं और उन्होंने एमए तथा बीएड की डिग्रियां हासिल की हैं।
माता-पिता और गुरु को दिया सफलता का श्रेय
अपनी इस बड़ी सफलता के बारे में बात करते हुए रोशन लाल का कहना है कि जीवन में कभी भी असफलता मिलने पर व्यक्ति को अपने प्रयास पूरी तरह से बंद नहीं करने चाहिए और लगातार आगे बढ़ते रहना चाहिए। उनका अपना पूरा जीवन संघर्ष का सफर इसी सोच का जीता-जागता प्रमाण है। रोशन लाल ने अपनी इस कामयाबी का पूरा श्रेय अपने माता-पिता की कठिन मेहनत, उनके बहुमूल्य त्याग और संस्कारों के साथ-साथ अपनी धर्मपत्नी पार्वती देवी के लगातार मिल रहे सहयोग और हौसला अफजाई को दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उनके इस पूरे संघर्षपूर्ण जीवन में उनके परिवार का साथ ही उनकी सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरा है। इसके अलावा रोशन लाल ने अपने संगीत गुरु डॉ कल्याण चंद मंढोत्रा का विशेष रूप से आभार व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि जब वह गरीबी और तंगी से जूझ रहे एक छात्र थे, तब उनके गुरु ने उन्हें सुबह और शाम के समय बिल्कुल मुफ्त में संगीत की शिक्षा दी और आज उन्हें इस मुकाम तक पहुँचाने में अपना बहुत बड़ा योगदान दिया।





















