पश्चिम बंगाल की राजनीति में कोलकाता स्थित तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) कार्यालय में हुई हिंसा के बाद नया राजनीतिक विवाद गहरा गया है। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी के कैमैक स्ट्रीट स्थित कार्यालय में तड़के हुई तोड़फोड़ की घटना के बाद प्रशासन और राजनीतिक विरोधियों पर तीखे सवाल खड़े किए गए हैं। तृणमूल कांग्रेस के नेताओं का आरोप है कि हथियारबंद असामाजिक तत्वों ने तड़के दफ्तर परिसर में जबरन घुसकर संपत्ति को नुकसान पहुंचाया और वहां मौजूद कर्मचारियों के साथ मारपीट की। घटना की सूचना मिलने के बाद हरकत में आई कोलकाता पुलिस ने मामले में तीन अलग-अलग प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज कर छह संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है।
कैमैक स्ट्रीट दफ्तर में सुबह तड़के हुई हिंसा
घटना के संदर्भ में विवरण देते हुए तृणमूल कांग्रेस के नेताओं ने दावा किया कि यह हमला पूरी तरह से पूर्व-नियोजित था। अभिषेक बनर्जी के अनुसार, तड़के लगभग 4:30 बजे हथियारों से लैस लोग पार्टी कार्यालय में दाखिल हुए। उपद्रवियों ने वहां तैनात स्टाफ सदस्यों के साथ न केवल मारपीट की, बल्कि उनके मोबाइल फोन भी छीन लिए ताकि वे तुरंत पुलिस सहायता न बुला सकें। इसके बाद दफ्तर के अंदर रखी सामग्रियों, दस्तावेजों और फर्नीचर में तोड़फोड़ की गई। वहीं, टीएमसी की आईटी सेल की प्रमुख उपासना चौधरी ने बताया कि हमला सुबह करीब 3:30 बजे हुआ था। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस पूरी वारदात की सीसीटीवी फुटेज पार्टी के पास सुरक्षित है, जिसे आगे की कानूनी प्रक्रिया के तहत पुलिस को सौंपा जाएगा।
पुलिस की सुस्ती पर सवाल और संवैधानिक संस्थाओं से गुहार
इस घटना के तुरंत बाद अभिषेक बनर्जी ने प्रशासनिक रवैये पर गहरा असंतोष व्यक्त किया। सोशल मीडिया के माध्यम से जारी बयान में उन्होंने कोलकाता पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए। उन्होंने बताया कि घटना के दौरान पार्टी कार्यकर्ताओं और वकीलों ने लगातार पुलिस को फोन किए और ईमेल के जरिए भी तत्काल कार्रवाई का संदेश भेजा। इसके बावजूद पुलिस टीम को मौके पर पहुंचने और कार्रवाई शुरू करने में लगभग दो घंटे का समय लग गया। सांसद ने मांग की है कि केवल मौके पर मौजूद हमलावरों की गिरफ्तारी ही काफी नहीं है, बल्कि इस बात की भी गहन जांच होनी चाहिए कि इस साजिश की योजना किसने बनाई और किसके निर्देशों पर इसे अंजाम दिया गया।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अभिषेक बनर्जी ने राज्य के संवैधानिक प्रमुखों और न्यायपालिका से हस्तक्षेप की अपील की है। उन्होंने पश्चिम बंगाल के राज्यपाल, केंद्रीय गृह मंत्री तथा कलकत्ता हाई कोर्ट से इस स्थिति का स्वतः संज्ञान लेने का अनुरोध किया। उनका कहना है कि राज्य में कानून का शासन बनाए रखने और राजनीतिक दलों के संवैधानिक अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए न्यायपालिका का हस्तक्षेप अनिवार्य हो चुका है।
एक महीने के भीतर दो कार्यालयों को बनाया गया निशाना
तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव ने यह भी उजागर किया कि पिछले एक महीने की अवधि में यह दूसरी घटना है जब उनके कार्यालयों को निशाना बनाया गया है। इससे पहले अमतला स्थित पार्टी कार्यालय में भी इसी तरह घुसकर तोड़फोड़ और लूटपाट की घटना को अंजाम दिया गया था। अभिषेक बनर्जी ने कहा कि लगातार हो रही ये घटनाएं महज आम कानून-व्यवस्था की विफलता नहीं हैं, बल्कि यह देश में कानून के शासन की खुली अवहेलना का प्रतीक हैं।
पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज और हालिया राजनीतिक तनाव
घटना के बाद प्रशासनिक हलचलों के तहत कोलकाता पुलिस ने तीन एफआईआर दर्ज की हैं और छह लोगों को हिरासत में लिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सीसीटीवी फुटेज और चश्मदीदों के बयानों के आधार पर आगे की जांच की जा रही है। यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब कुछ ही दिन पहले पश्चिम बंगाल पुलिस ने खुद अभिषेक बनर्जी, टीएमसी सांसद डेरेक ओ'ब्रायन और पार्टी के अन्य नेताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। वह मामला कैमैक स्ट्रीट स्थित 9 नंबर की इमारत से अनधिकृत होर्डिंग हटाने के दौरान पुलिसकर्मियों के काम में बाधा डालने और उन पर हमला करने के आरोपों से जुड़ा हुआ था। ऐसे में ताज़ा तोड़फोड़ ने राज्य के राजनीतिक माहौल को और अधिक गर्मा दिया है।



















