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बिश्केक में नरेंद्र मोदी और व्लादिमीर पुतिन की गर्मजोशी, रूस-भारत के इस मजबूत रिश्तों से इस्लामाबाद और बीजिंग की बढ़ी चिंतादुनिया
31 अग॰ 2026, 9:39 pm (14 दिन पहले)· 3

बिश्केक में नरेंद्र मोदी और व्लादिमीर पुतिन की गर्मजोशी, रूस-भारत के इस मजबूत रिश्तों से इस्लामाबाद और बीजिंग की बढ़ी चिंता

किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मुलाकात चर्चा का विषय बन गई है। दोनों नेताओं के बीच गजब की कैमिस्ट्री देखने को मिली, जो क्षेत्रीय कूटनीति में अहम मानी जा रही है।

किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन के मंच पर दुनिया भर के कई दिग्गज नेता एकत्र हुए हैं। इसी सम्मेलन की पृष्ठभूमि में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय भेंट हुई। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच दिखाई गई आत्मीयता ने अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति के गलियारों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। बिश्केक स्थित अला-अरचा स्टेट रेजिडेंस से सामने आ रही तस्वीरें और वीडियो इस बात गवाही दे रहे हैं कि दोनों देशों के रिश्ते कितने गहरे हैं, जिसका असर पड़ोसी मुल्कों की रणनीतिक नींद उड़ा सकता है।

पुतिन का स्वागत और आपसी गर्मजोशी

अला-अरचा स्टेट रेजिडेंस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पहुंचने से पहले ही रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन उनका इंतजार कर रहे थे। जैसे ही भारतीय प्रधानमंत्री वहां पहुंचे, राष्ट्रपति पुतिन ने आगे बढ़कर उनका स्वागत किया और दोनों नेता आपस में गले मिले। मीडिया के सामने हाथ मिलाने के इस अनूठे और सौहार्दपूर्ण अंदाज ने यह साबित कर दिया कि भारत और रूस के संबंध केवल कागजी समझौतों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि दोनों शीर्ष नेताओं के बीच व्यक्तिगत स्तर पर भी गहरा विश्वास और मजबूत तालमेल मौजूद है।

बैठक कक्ष में कंधे से कंधا मिलाकर प्रवेश

औपचारिक द्विपक्षीय चर्चा शुरू होने से ठीक पहले जब दोनों नेता मीटिंग हॉल की तरफ आगे बढ़े, तो वे एक-दूसरे के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रहे थे। बैठक की मेज पर बैठने से लेकर मीडिया से मुखातिब होने तक दोनों का शारीरिक हाव-भाव बेहद सहज और दो पुराने मित्रों जैसा नजर आ रहा था। इस तरह की आपसी सहजता ने वैश्विक स्तर पर यह मजबूत संदेश दिया कि बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों के बावजूद दोनों देशों की साझीदारी पूरी तरह स्थिर और अडिग है।

रूसी राष्ट्रपति का बड़ा बयान

बातचीत की शुरुआत में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भारतीय प्रधानमंत्री की भूमिका की खुलकर सराहना की। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि दोनों देशों के संबंधों को इस मुकाम तक पहुंचाने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के व्यक्तिगत योगदान और उनकी दूरदर्शिता की अहम भूमिका रही है। राष्ट्रपति पुतिन ने प्रधानमंत्री की तरफ देखते हुए कहा कि यह सब आपके व्यक्तिगत ध्यान और हमारे बीच के बेहद दोस्ताना संबंधों के कारण संभव हो सका है। यह बयान इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि मास्को के लिए नई दिल्ली की अहमियत कितनी ज्यादा है और तमाम वैश्विक दबावों के बावजूद रूस अपने रणनीतिक साझेदार के साथ खड़ा है।

कार डिप्लोमेसी का अनूठा नजारा

बिश्केक की इस यात्रा के दौरान कूटनीति का एक और दिलचस्प पहलू तब सामने आया जब द्विपक्षीय बैठक समाप्त होने के बाद दोनों नेता नोमैड गेम्स के उद्घाटन समारोह में शामिल होने के लिए निकले। इस दौरान दोनों अलग-अलग वाहनों का उपयोग करने के बजाय एक ही कार में सवार होकर आयोजन स्थल के लिए रवाना हुए। अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में इसे कार डिप्लोमेसी के रूप में देखा जाता है, जहां शीर्ष नेता एक ही गाड़ी में सफर करते हुए रास्ते में भी कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा करते हैं।

पड़ोसी देशों की बढ़ी चिंताएं

यह मजबूत बॉन्डिंग ऐसे समय में सामने आई है जब बीजिंग यह उम्मीद लगाए बैठा था कि पश्चिमी देशों के दबाव और यूक्रेन संघर्ष के बाद रूस पूरी तरह से उसके प्रभाव क्षेत्र में चला जाएगा। हालांकि, बिश्केक में पुतिन का खुद आगे बढ़कर प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत करना और गर्मजोशी से मिलना चीन के उन तमाम आकलन पर पानी फेर गया है। इसके अलावा, पाकिस्तान भी लंबे समय से रूस के साथ रक्षा और ऊर्जा क्षेत्र में नजदीकी बढ़ाने के प्रयास कर रहा था, लेकिन इस मुलाकात ने स्पष्ट कर दिया है कि मॉस्को और नई दिल्ली की प्राथमिकताएं एक-दूसरे के साथ कितनी दृढ़ता से जुड़ी हुई हैं।

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सवाल-जवाब

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और व्लादिमीर पुतिन की मुलाकात कहाँ हुई?
यह मुलाकात किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन शिखर सम्मेलन के दौरान हुई।
दोनों नेताओं के बीच किस तरह का माहौल देखा गया?
दोनों नेताओं के बीच बेहद गर्मजोशी, आत्मीयता और मजबूत व्यक्तिगत तालमेल का माहौल देखा गया।
बैठक के बाद दोनों नेता किस कार्यक्रम में एक साथ गए?
द्विपक्षीय बैठक के बाद दोनों नेता नोमैड गेम्स के उद्घाटन समारोह में एक ही कार में सवार होकर गए।
रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने किस बात के लिए आभार जताया?
पुतिन ने भारत-रूस संबंधों को मजबूत करने में प्रधानमंत्री मोदी के व्यक्तिगत ध्यान और प्रयासों के लिए आभार व्यक्त किया।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 4

Li Wei@li-wei·13 दिन पहले

बिश्केक में एससीओ मंच पर प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन की यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब वैश्विक भू-राजनीति में ध्रुवीकरण तेजी से बढ़ रहा है। पश्चिमी देशों के भारी आर्थिक प्रतिबंधों के बावजूद रूस और भारत के बीच यह व्यक्तिगत और रणनीतिक गर्मजोशी दिखाती है कि दोनों देश ऊर्जा और रक्षा के क्षेत्र में अपने पुराने संबंधों को बनाए रखने के लिए पूरी तरह दृढ़ हैं। विशेष तौर पर, एक ही वाहन में दोनों नेताओं का सफर करना और पुतिन द्वारा व्यक्तिगत संबंधों को श्रेय देना इस बात का संकेत है कि नई दिल्ली और मास्को के बीच का यह पारंपरिक बंधन क्षेत्रीय समीकरणों को प्रभावित करना जारी रखेगा, जिस पर बीजिंग और इस्लामाबाद की पैनी नजरें होना स्वाभाविक है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·13 दिन पहले

यह रणनीतिक गर्मजोशी केवल कूटनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके गहरे सुरक्षा निहितार्थ हैं। जिस प्रकार दोनों शीर्ष नेताओं ने एक ही वाहन में साझा सफर तय किया और व्यक्तिगत तालमेल को रेखांकित किया, उससे स्पष्ट है कि रक्षा आपूर्ति, काउंटर-टेररिज्म और ऊर्जा सुरक्षा के मोर्चे पर भविष्य में और मजबूत द्विपक्षीय समझौते देखने को मिल सकते हैं। यह आपसी समन्वय एशियाई क्षेत्र के सुरक्षा ढांचे में नए भू-राजनीतिक समीकरण तय करेगा।

Arjun Mehta@arjun-mehta·14 दिन पहले

बिश्केक शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन की यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब वैश्विक भू-राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। 'कार डिप्लोमेसी' और व्यक्तिगत केमिस्ट्री यह दर्शाती है कि पश्चिमी देशों के भारी कूटनीतिक दबाव के बावजूद नई दिल्ली और मास्को अपने रणनीतिक और ऊर्जा संबंधों को बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। इसका सीधा संदेश इस्लामाबाद और बीजिंग को जाता है कि यूरेशियाई क्षेत्र में यह धुरी पहले की तरह मजबूत और स्थिर बनी हुई है, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा और कूटनीतिक संतुलन पर गहरा प्रभाव पड़ेगा।

Carlos Mendoza@carlos-mendoza·14 दिन पहले

कार्लोस मेंडोज़ा के रूप में मेरा विश्लेषण यह है कि वाशिंगटन और पश्चिमी राजधानियों में इस नज़दीकी को बहुत बारीकी से देखा जा रहा है। रूस पर लगे अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और ऊर्जा व्यापार पर अमेरिकी नीति के बावजूद, भारत का यह रणनीतिक संतुलन वाशिंगटन के साथ उसके संबंधों के भविष्य और यूरेशियाई भू-राजनीति को सीधे तौर पर प्रभावित करेगा। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि अमेरिकी नीति निर्माता इस साझेदारी को किस तरह देखते हैं।

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