प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आर्थिक नीतियों और दूरदर्शी फैसलों के चलते तमाम वैश्विक बाधाओं के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था रॉकेट की रफ्तार से आगे बढ़ रही है। दुनिया के कई बड़े देश जैसे चीन और रूस जहां सुस्ती का सामना कर रहे हैं, वहीं भारत ने 7.8 फीसद की मजबूत विकास दर हासिल की है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत के साथ ही दुनिया भर में टैरिफ वॉर छेड़ दिया है। भारत समेत कई देशों पर भारी आयात शुल्क थोप दिए गए हैं, जबकि पश्चिम एशिया में ईरान संघर्ष ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। इस भू-राजनीतिक माहौल में यूरोपीय देश वैश्विक नेतृत्व करने में असमर्थ नजर आ रहे हैं। ऐसे में भारत, चीन, रूस और ब्राजील जैसे प्रमुख देशों का एक मंच पर आना स्वाभाविक है। किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में चल रहे शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के शिखर सम्मेलन से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने वाशिंगटन से लेकर इस्लामाबाद तक खलबली मचा दी है।
बिश्केक में भविष्य के वैश्विक समीकरण की झलक
शिखर सम्मेलन की शुरुआत से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच द्विपक्षीय बातचीत हुई, जिसमें आपसी सहयोग को और मजबूत करने पर जोर दिया गया। यह मुलाकात ऐसे समय में हुई जब एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम की पांच अतिरिक्त स्क्वाड्रन की खरीद को लेकर चर्चाएं गर्म हैं। इसके बाद मंगलवार, 1 सितंबर 2026 को प्रधानमंत्री मोदी, व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग एक साथ नजर आए और तीनों नेताओं के बीच बेहद गर्मजोशी भरा माहौल देखने को मिला। तीनों दिग्गजों के चेहरों पर मुस्कान भविष्य के विश्व की एक नई तसवीर पेश कर रही थी। हालांकि, उसी सम्मेलन में मौजूद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के माथे पर चिंता की लकीरें साफ देखी जा सकती थीं। दूसरी तरफ, बिश्केक से हजारों किलोमीटर दूर वाशिंगटन में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बेचैनी भी बढ़ गई है। शरीफ और ट्रंप दोनों की चिंता के कारण भले ही अलग-अलग हों, लेकिन वैश्विक पटल पर बदलते समीकरण दोनों के लिए असहज करने वाले हैं।
डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीतियों का असर और अमेरिका की मुश्किलें
डोनाल्ड ट्रंप मेक अमेरिका ग्रेट Again का नारा बुलंद करते हुए दूसरी बार सत्ता में लौटे हैं। व्हाइट हाउस संभालते ही उन्होंने वैश्विक व्यापार में टैरिफ वॉर की शुरुआत कर दी और पारंपरिक मित्रों पर भी भारी कर लगाने से गुरेज नहीं किया। उनकी यह संरक्षणवादी नीति भारत, चीन, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका जैसे विकासशील देशों के आर्थिक हितों के खिलाफ है। नतीजतन, भारत, चीन और रूस जैसे देश अमेरिका के समानांतर एक नया आर्थिक मोर्चा तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। भारत और चीन दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाले देश हैं और उनके पास विशाल उपभोक्ता बाजार है, जिस पर पूरी दुनिया की निगाहें टिकी रहती हैं। ट्रंप की इस आक्रामक टैरिफ नीति ने भारत जैसे करीबी साझीदार को भी नए विकल्प तलाशने के लिए मजबूर कर दिया है। अपनी अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए भारत ने दुनिया के अन्य देशों के साथ द्विपक्षीय संबंधों को नए आयाम दिए हैं, जिसमें नई दिल्ली को खासी सफलता मिली है। अब जब भारत को रूस और चीन का भी मजबूत साथ मिल रहा है, तो वाशिंगटन की बेचैनी का बढ़ना लाजिमी है।
पाकिस्तान की बढ़ी परेशानी और आगे के बड़े कूटनीतिक मंच
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कुछ समय पहले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर को व्हाइट हाउस में आमंत्रित किया था, जहां उनके आतिथ्य का पूरा ध्यान रखा गया था। इसके बाद ट्रंप प्रशासन ने कुछ ऐसे कदम उठाए जिससे पाकिस्तान उत्साहित हो गया था, लेकिन अब भू-राजनीतिक स्थितियां तेजी से बदल रही हैं। ट्रंप के टैरिफ फैसलों के बाद भारत अपने पड़ोसी चीन के भी करीब आया है, जिसे कभी इस्लामाबाद का सबसे परम मित्र माना जाता था। इसके अलावा, भारत और रूस की पारंपरिक मित्रता से पूरी दुनिया भली-भांति परिचित है। मास्को भारत का एक प्रमुख रक्षा साझीदार और हथियार आपूर्तिकर्ता है। रूस से हासिल किए गए Su-30MKI फाइटर जेट ने ही अतीत में ब्रह्मोस मिसाइल के जरिए अपनी ताकत का अहसास कराया था। वैश्विक मंचों पर भारत का बढ़ता कद पाकिस्तान को लगातार परेशान कर रहा है। एससीओ सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रुतबे और रसूख को देखकर शहबाज शरीफ का बेहाल होना स्वाभाविक है। जानकारों का मानना है कि इस सम्मेलन के तुरंत बाद भारत में ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन का आयोजन होना है, जहां एक बार फिर प्रधानमंत्री मोदी, व्लादिमीर पुतिन और शी जिनपिंग वैश्विक मंच पर एक साथ तालमेल बिठाते नजर आएंगे।





















