चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अपनी सेना पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के भीतर जारी सफाई अभियान को एक नए स्तर पर पहुंचा दिया है। इस कड़ी में शुक्रवार को नेशनल पीपुल्स कांग्रेस (NPC) ने छह उच्च-स्तरीय सैन्य अधिकारियों की सांसद सदस्यता को समाप्त करने का निर्णय लिया। इन अधिकारियों का संबंध पीपुल्स लिबरेशन आर्मी की महत्वपूर्ण इकाइयों से था, जिनमें पूर्वी और पश्चिमी थिएटर कमांड, ग्राउंड फोर्स, एयर फोर्स, साइबरस्पेस फोर्स और सेंट्रल मिलिट्री कमीशन (CMC) का इक्विपमेंट डेवलपमेंट डिपार्टमेंट शामिल हैं। हालांकि चीन सरकार ने आधिकारिक रूप से इन वरिष्ठ सैन्य दिग्गजों को हटाए जाने के पीछे किसी ठोस कारण का खुलासा नहीं किया है, लेकिन इस कदम से सेना के शीर्ष स्तर पर उथल-पुथल मची हुई है। स्थिति यह है कि सेंट्रल मिलिट्री कमीशन में अब शी जिनपिंग के अलावा केवल एक सक्रिय सदस्य शेष बचा है, जो चीनी सैन्य इतिहास की एक अभूतपूर्व घटना है।
किन अधिकारियों पर गिरी गाज
इस बड़े प्रशासनिक बदलाव में जिन सैन्य अफसरों को पद से हटाया गया है, उनमें CMC के इक्विपमेंट डेवलपमेंट विभाग के शू शुएचियांग, पूर्वी थिएटर कमांड के वांग कांगपिंग, पश्चिमी थिएटर कमांड के ली फेंगबियाओ, ग्राउंड फोर्स के यिन होंगशिंग, एयर फोर्स के गुओ पुसियाओ और साइबरस्पेस फोर्स के झांग मिंगहुआ प्रमुख हैं।
2023 से जारी है सेना की बड़ी सफाई
सैन्य महकमे में अनुशासनहीनता और भ्रष्टाचार के खिलाफ यह व्यापक अभियान 2023 के मध्य से ही सक्रिय है। इस दौरान दो CMC उपाध्यक्ष, तीन CMC सदस्य, एक पूर्व रक्षा मंत्री और कई वरिष्ठ जनरलों को उनके ओहदों से मुक्त किया जा चुका है। चाइना पावर द्वारा फरवरी में साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2022 के बाद से कम से कम 36 जनरल और लेफ्टिनेंट जनरल को आधिकारिक तौर पर बर्खास्त किया गया है, जबकि 65 अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के लापता होने की सूचना है, जिनके खिलाफ जांच या कार्रवाई होने की प्रबल संभावना है। इस पूरे अभियान का दायरा 100 से अधिक वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों तक पहुंच चुका है।
दोस्ती से ऊपर निष्ठा को रखा
शी जिनपिंग ने अपने निजी और पुराने संबंधों को भी इस कार्रवाई के बीच आने नहीं दिया। इस वर्ष की शुरुआत में, उन्होंने अपने लंबे समय के सहयोगी जनरल झांग यूक्सिया के खिलाफ जांच के आदेश दिए। झांग और शी जिनपिंग के पिता 1949 के गृहयुद्ध में साथ थे, और दोनों नेता बचपन के परिचित हैं। झांग दशकों तक शी जिनपिंग के सबसे विश्वासपात्र सैन्य सलाहकारों में से एक रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी करीबी हस्ती पर जांच बिठाकर शी जिनपिंग ने यह संदेश साफ कर दिया है कि सेना के भीतर निष्ठा और अनुशासन के मामले में वे किसी भी स्तर की ढिलाई को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं हैं।
आखिर क्यों हो रही है इतनी बड़ी कार्रवाई?
विशेषज्ञों का तर्क है कि शी जिनपिंग 2027 तक PLA को युद्ध के लिए पूरी तरह से सक्षम बनाने के लक्ष्य पर काम कर रहे हैं, जो उनकी सेना की 100वीं वर्षगांठ का भी वर्ष है। पिछले कुछ समय में रॉकेट फोर्स में व्यापक स्तर पर तकनीकी खामियां और भ्रष्टाचार की खबरें सामने आई थीं। ऐसी चर्चाएं थीं कि कई मिसाइल साइलो में ईंधन के स्थान पर पानी भर दिया गया था, और कई लॉन्च सिस्टम तकनीकी खराबी के चलते काम नहीं कर रहे थे। कुछ मिसाइल साइलो के ढक्कन तक नहीं खुल पा रहे थे। इन रिपोर्टों ने शी जिनपिंग की चिंता बढ़ा दी थी कि कहीं महत्वपूर्ण समय पर उनकी मिसाइलें बेकार न साबित हो जाएं।
भारत के लिए क्या है इसके मायने
हटाए गए अधिकारियों में वांग कांगपिंग (पूर्वी थिएटर कमांड) और ली फेंगबियाओ (पश्चिमी थिएटर कमांड) शामिल हैं, जिनकी जिम्मेदारी के क्षेत्रों में भारत से जुड़ी संवेदनशील सीमाएं शामिल हैं। विशेषकर पश्चिमी थिएटर कमांड तिब्बत और शिनजियांग के माध्यम से भारत-चीन वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) की सुरक्षा और निगरानी का कार्य देखता है। हालांकि, इसे चीन का आंतरिक मामला माना जा रहा है और भारत के लिए सीधे तौर पर चिंता की बात नहीं है, क्योंकि चीन की नीति शी जिनपिंग द्वारा निर्धारित होती है। इन व्यापक बदलावों से यह संकेत तो जरूर मिलता है कि शी जिनपिंग PLA पर अपनी पकड़ को और अधिक कसना चाहते हैं। वहीं, इतनी बड़ी कार्रवाई से दुनिया भर के रणनीतिकार यह भी सोच रहे हैं कि चीनी सेना में भ्रष्टाचार का स्तर शायद उनकी उम्मीद से कहीं ज्यादा गहरा है।













