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डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के बीच फिर बढ़ा तनाव, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में सैन्य कार्रवाई की चेतावनीदुनिया
17 अग॰ 2026, 9:08 pm (28 दिन पहले)· 2

डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के बीच फिर बढ़ा तनाव, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में सैन्य कार्रवाई की चेतावनी

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव फिर से गहरा गया है। एक तरफ डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को आत्मसमर्पण करने की बात कही है, तो वहीं ईरान ने चेतावनी दी है कि तय समयसीमा में शर्तें पूरी न होने पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में सैन्य कदम उठाए जाएंगे।

अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा गतिरोध एक बार फिर बेहद खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। ईरान की तरफ से अमेरिका को दो टूक चेतावनी दी गई है कि यदि आने वाले कुछ हफ्तों के भीतर अंतरिम शांति समझौते की सभी शर्तों को पूरी तरह से लागू नहीं किया जाता है, तो वह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और उसके आसपास के क्षेत्रों में कड़े सैन्य कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा।

ईरान की सीधी चेतावनी और सैन्य कार्रवाई की तैयारी

एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने अपनी बातचीत में स्पष्ट किया कि अगर अमेरिका निर्धारित समयसीमा के दायरे में रहकर समझौते को लागू करने में विफल रहता है, तो ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पार हमला करने के लिए मजबूर होगा। स्थिति यहां तक पहुंच सकती है कि अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी को भेदने के लिए सटीक और आक्रामक सैन्य हमले किए जा सकें। ईरान का यह रुख इस बात का संकेत देता है कि अब उसकी रणनीति विशुद्ध रूप से रक्षात्मक रहने के बजाय आक्रामक रुख अपनाने की हो गई है।

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डोनाल्ड ट्रंप का कड़ा बयान और गुप्त संपर्कों का दावा

ईरान का यह आक्रामक बयान डोनाल्ड ट्रंप की उस तीखी टिप्पणी के बाद सामने आया है जिसमें उन्होंने ईरान को एक हारा हुआ देश बताया था। डोनाल्ड ट्रंप का कहना था कि ईरान के पास अब केवल एक ही रास्ता बचा है और उसे आत्मसमर्पण का सफेद झंडा थाम लेना चाहिए। उन्होंने टिप्पणी करते हुए कहा कि ईरानी भले ही बेहतरीन पोकर खिलाड़ी हों, लेकिन मौजूदा हालात में वे गंभीर संकट में फंस चुके हैं। इसके साथ ही, डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा दावा करते हुए यह भी कहा कि अमेरिका के पास ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी आईआरजीसी के साथ एक गुप्त बैकचैनल मौजूद है और अमेरिकी अधिकारी सीधे तौर पर वहां के अधिकारियों के संपर्क में हैं।

होर्मुज जलडमरूमध्य का सामरिक महत्व

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे संवेदनशील और बेहद महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में से एक गिना जाता है। इस रणनीतिक जलडमरूमध्य में किसी भी प्रकार का तनाव या सैन्य टकराव पूरी दुनिया की तेल आपूर्ति को बाधित कर सकता है और इसका सीधा असर अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर पड़ना तय माना जा रहा है। ईरानी अधिकारी का यह भी कहना है कि अब कूटनीति के माध्यम से किसी संतोषजनक समाधान तक पहुंचने में ईरान का भरोसा तेजी से कम होता जा रहा है।

टूटती कूटनीति और ठप पड़े प्रयास

ईरान का आरोप है कि अमेरिका युद्धविराम के मुद्दे पर बिल्कुल भी गंभीर नहीं है और न ही उसकी तरफ से किसी स्थायी युद्धविराम को लेकर कोई वास्तविक प्रतिबद्धता दिखाई जा रही है। केवल मध्यस्थों के भरोसे बातचीत की गाड़ी खींचना और स्थायी शांति की उम्मीद करना अब व्यावहारिक नहीं रह गया है। बीते जून महीने में हुए एक समझौते की बुनियाद पर दोनों देशों को एक बार फिर बातचीत की मेज पर लाने की कोशिशें जारी थीं, लेकिन पिछले कुछ हफ्तों से कूटनीतिक प्रयास ठंडे बस्ते में चले गए हैं। ईरान के विदेश मंत्री पहले ही यह साफ कर चुके हैं कि जब तक अमेरिका इस समझौते में पूरी तरह वापस नहीं लौटता, तब तक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते को नहीं खोला जाएगा।

सवाल-जवाब

ईरान ने अमेरिका को क्या चेतावनी दी है?
ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि कुछ हफ्तों के भीतर अंतरिम शांति समझौते की शर्तें लागू नहीं की गईं, तो वह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में सैन्य कार्रवाई करेगा।
डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के बारे में क्या बयान दिया है?
डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को एक हारा हुआ देश बताया और कहा कि उसे आत्मसमर्पण का सफेद झंडा दिखाना चाहिए क्योंकि वे अब मुश्किल में हैं।
डोनाल्ड ट्रंप ने किस गुप्त संपर्क का दावा किया है?
ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिका के पास ईरान के आईआरजीसी यानी इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के साथ एक गुप्त बैकचैनल और सीधा संपर्क है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज क्यों महत्वपूर्ण है?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है, जहां तनाव बढ़ने से वैश्विक तेल आपूर्ति और बाजार प्रभावित होते हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Arjun Mehta@arjun-mehta·27 दिन पहले

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे अहम समुद्री मार्ग पर सैन्य टकराव की चेतावनी वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है। ट्रंप की आक्रामक बयानबाजी और ईरान के रक्षात्मक से आक्रामक रुख में बदलने से कूटनीति के रास्ते लगभग बंद हो चुके हैं। यदि अमेरिका और आईआरजीसी के बीच गुप्त बैकचैनल प्रभावी नहीं हुए, तो वैश्विक तेल बाजार में भारी अस्थिरता और प्रत्यक्ष संघर्ष तय है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·28 दिन पहले

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में संभावित सैन्य टकराव केवल क्षेत्रीय कूटनीति का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय कानून, समुद्री नेविगेशन की स्वतंत्रता और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरा है। यदि अमेरिका और ईरान के बीच नौसैनिक नाकाबंदी या सैन्य कार्रवाई जैसी स्थिति उत्पन्न होती है, तो यह अंतरराष्ट्रीय समुद्री संधियों का गंभीर उल्लंघन साबित हो सकता है। आने वाले हफ्तों में इस जलमार्ग पर सुरक्षा एजेंसियों और नौसैनिक बलों की गतिविधियों पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी, क्योंकि जरा सी चूक एक बड़े वैश्विक संकट को जन्म दे सकती है।

Sophie Laurent@sophie-laurent·28 दिन पहले

यह तनाव केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर यूरोपीय अर्थव्यवस्था और ऊर्जा बाजारों पर पड़ेगा। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है, और इस मार्ग के बाधित होने से यूरोप में महंगाई और ईंधन संकट बढ़ सकता है। यूरोपीय संघ के राजनयिकों को इस भू-राजनीतिक अस्थिरता से निपटने के लिए अपनी कूटनीतिक सक्रियता तुरंत बढ़ानी होगी, अन्यथा वैश्विक व्यापार बुरी तरह प्रभावित होगा।

Carlos Mendoza@carlos-mendoza·28 दिन पहले

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में ईरान की आक्रामक सैन्य चेतावनी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का 'आत्मसमर्पण' संबंधी बयान इस बात का संकेत है कि वाशिंगटन और तेहरान के बीच पारंपरिक कूटनीति अब पूरी तरह विफल हो चुकी है। यदि यह गतिरोध ऐसे ही बना रहा, तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर इसका सीधा और गंभीर प्रभाव पड़ेगा, जिससे व्हाइट हाउस को अपनी नीति पर पुनर्विचार करना पड़ सकता है।

Ayesha Siddiqui@ayesha-siddiqui·28 दिन पहले

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे अहम समुद्री मार्ग पर ईरान द्वारा आक्रामक रुख और तेहरान के भीतर अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी भेदने की सीधी तैयारी वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद खतरनाक है। कूटनीति के ठप पड़ने और मध्यस्थों पर से भरोसा उठने के बाद, यदि तय सीमा में अंतरिम समझौते पर अमल नहीं हुआ, तो यह टकराव क्षेत्रीय स्थिरता को तहस-नहस कर सकता है।

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