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गिनी की राजधानी कोनाक्री में कचरे का टीला ढहने से तबाही, 30 लोगों की मौतदुनिया
24 अग॰ 2026, 12:19 am (22 दिन पहले)· 2

गिनी की राजधानी कोनाक्री में कचरे का टीला ढहने से तबाही, 30 लोगों की मौत

पश्चिमी अफ्रीकी देश गिनी में कचरे के विशाल ढेर के अचानक ढह जाने से कई झुग्गियां मलबे में समा गईं, जिससे कम से कम 30 लोगों की मौत हो गई और कई अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।

पश्चिमी अफ्रीका के गिनी देश में एक बड़ी आपदा सामने आई है, जहां कचरे का एक विशाल पहाड़ भरभराकर गिर गया। इस भयानक हादसे में कुल 30 बेकसूर लोगों की मौत हो गई है। सरकारी आंकड़ों से इस बात की पुष्टि हुई है कि राजधानी कोनाक्री स्थित सबसे बड़े लैंडफिल यानी कचरा डंपिंग साइट पर यह भूस्खलन हुआ, जिसकी चपेट में वहां बनी कई झुग्गियां आ गईं।

भारी बारिश ने बढ़ाई मुश्किलें

अधिकारियों के मुताबिक, यह दुर्घटना रविवार तड़के करीब 2 बजे शुरू हुई भारी बारिश के बाद हुई। मूसलाधार पानी की वजह से 'Dar Es Salam' इलाके में जमा कचरा खिसकने लगा और लैंडस्लाइड की स्थिति पैदा हो गई। देखते ही देखते कचरे का यह दरिया पास की बस्तियों पर आ गिरा, जिससे कई गरीब परिवारों के आशियाने मिट्टी और कचरे के नीचे दब गए। इस आपदा में 6 लोग गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं, जबकि कई मकान पूरी तरह नेस्तनाबूद हो गए हैं। प्रभावित इलाके में लोगों की तलाश और राहत कार्य तेजी से चलाए जा रहे हैं।

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पहले भी जारी किए गए थे निर्देश

सैनिटेशन ऑफिसर लेफ्टिनेंट कर्नल बाल्डे मामादौ बाइलो, जो कि मिलिट्री इंजीनियरिंग बटालियन से ताल्लुक रखते हैं, ने जानकारी दी कि कोनाक्री के इस मुख्य ओपन कचरा डंप को बंद करने का फैसला रविवार के लिए ही तय किया गया था। प्रशासन की तरफ से पहले ही आसपास रिहाइश बनाकर रहने वाले लोगों को वहां से हटने का नोटिस थमा दिया गया था। यही वजह थी कि कई सतर्क परिवारों ने समय रहते वह क्षेत्र छोड़ दिया था, लेकिन इसके बावजूद हादसे के वक्त भी कई लोग वहां मौजूद रह गए थे जो इस त्रासदी का शिकार बन गए।

बेघर हुए परिवारों के पुनर्वास का वादा

घटनास्थल पर हालात का जायजा लेने पहुंचीं क्षेत्रीय प्रशासन और विकेंद्रीकरण मंत्री डिएनाबू टुरे ने मीडिया से बात करते हुए कहा, "हम यह पक्का करेंगे कि बाकी परिवारों को दूसरी जगह बसाया जाए, उनके रहने का इंतजाम कराया जाएगा।" प्रशासन की प्राथमिकता अब उन लोगों को सुरक्षित ठिकाना देना है जिनके सिर से छत छिन चुकी है।

राहत और बचाव कार्य जारी

स्थानीय प्रशासन ने आशंका जताई है कि मलबे के नीचे फंसे लोगों को तलाशने का काम जैसे-जैसे आगे बढ़ेगा, मृतकों का आंकड़ा और भी बढ़ सकता है। बचाव दलों द्वारा मलबे को हटाने और जीवित बचे लोगों की तलाश के लिए युद्धस्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। साथ ही, आम नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे दुर्घटना वाली जगह के आसपास न भटकें और मलबे से सुरक्षित दूरी बनाए रखें ताकि राहत कार्यों में कोई रुकावट न आए। इससे पहले भी ऐसे हादसे दुनिया के अन्य हिस्सों में देखने को मिले हैं, जिनमें इंडोनेशिया के जावा द्वीप पर हुई लैंडस्लाइड की घटना में 21 लोगों की जान चली गई थी।

सवाल-जवाब

गिनी में यह लैंडस्लाइड की घटना कहां हुई?
यह हादसा गिनी की राजधानी कोनाक्री के सबसे बड़े लैंडफिल यानी कचरा डंपिंग साइट पर हुआ।
इस दुर्घटना में कितने लोगों की मौत हुई है?
कचरे का पहाड़ ढहने से मलबे में दबकर कुल 30 लोगों की जान चली गई है।
यह हादसा किन कारणों से हुआ था?
सुबह करीब 2 बजे शुरू हुई भारी बारिश के कारण कचरा बहने लगा और लैंडस्लाइड हो गया।
इस दुर्घटना में कितने लोग घायल हुए हैं?
इस घटना में 6 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं और कई झुग्गियां नष्ट हो गईं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Karan Malhotra@karan-malhotra·21 दिन पहले

यह त्रासदी कोनाक्री के दार एस सलाम लैंडफिल पर सुरक्षा और शहरी नियोजन की गंभीर अनदेखी को उजागर करती है। हालांकि प्रशासन ने पहले से नोटिस जारी किए थे, लेकिन समय पर पुनर्वास और अवैध बस्तियों को रोकने में प्रशासनिक विफलता इस जानमाल के नुकसान की मुख्य वजह है। यदि अनियोजित डंपिंग साइट्स और रिहाइशों के बीच कानूनी दूरियों का कड़ाई से पालन नहीं हुआ, तो ऐसे हादसों में प्रशासनिक लापरवाही की आपराधिक जांच की मांग उठना लाजिमी है।

Sophie Laurent@sophie-laurent·21 दिन पहले

यह हादसा ग्लोबल साउथ के शहरों में अनियोजित शहरीकरण और जलवायु परिवर्तन के मिले-जुले असर का गंभीर परिणाम है। लगातार चरम मौसम की घटनाएं और भारी बारिश अब इस तरह के ओपन लैंडफिल को टिकने नहीं देंगी। यूरोपीय संघ की नीतियों की तर्ज पर इन देशों को भी अब सर्कुलर इकोनॉमी, वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट्स और सख्त पर्यावरणीय मानकों को अपनाना होगा, वरना मानवीय त्रासदियां और बढ़ती रहेंगी।

Li Wei@li-wei·22 दिन पहले

यह त्रासदी विकासशील देशों के तेजी से बढ़ते शहरीकरण और लचर कचरा प्रबंधन के बीच गहरे विरोधाभास को उजागर करती है। भारी बारिश के कारण डंपिंग साइट का ढहना केवल प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि व्यवस्थित शहरी नियोजन और पर्यावरण सुरक्षा मानकों की भारी कमी का परिणाम है। भविष्य में इस तरह की जानलेवा घटनाओं को रोकने के लिए आधुनिक रिसाइक्लिंग प्लांट और कठोर ज़ोनिंग कानूनों को लागू करना अनिवार्य होगा, अन्यथा अनियंत्रित शहरी फैलाव ऐसे मानवीय संकटों को और बढ़ावा देगा।

Carlos Mendoza@carlos-mendoza·22 दिन पहले

यह घटना वैश्विक स्तर पर पर्यावरण न्याय और नीतिगत प्राथमिकताओं पर गंभीर सवाल खड़े करती है। जब तक सरकारें अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों के सहयोग से मज़बूत बुनियादी ढांचे और सुरक्षित ज़ोनिंग पर ध्यान नहीं देंगी, तब तक जलवायु परिवर्तन और चरम मौसम ऐसी बस्तियों को हमेशा मलबे में बदलते रहेंगे।

Yuki Tanaka@yuki-tanaka·22 दिन पहले

यह त्रासदी वैश्विक स्तर पर अनियोजित शहरीकरण और लचर अपशिष्ट प्रबंधन के गंभीर संकट को उजागर करती है। हालांकि एशिया और अफ्रीका के कई विकासशील देशों में प्रशासन द्वारा विस्थापन के नोटिस जारी किए जाते हैं, लेकिन वैकल्पिक आवास की कमी के कारण गरीब आबादी खतरनाक लैंडफिल के पास रहने को मजबूर होती है। यदि तेजी से बढ़ते शहरों में वैज्ञानिक डंपिंग और सख्त जोनिंग कानूनों को लागू नहीं किया गया, तो जलवायु परिवर्तन के इस दौर में मूसलाधार बारिश से ऐसी मानवीय आपदाओं की पुनरावृत्ति रोकना असंभव होगा।

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