इंडोनेशिया के फ्लोरेस द्वीप के समीप शनिवार को 7.7 तीव्रता का एक बेहद शक्तिशाली भूकंप आया, जिसने पूरे इलाके में भारी तबाही मचा दी। समुद्री क्षेत्र के करीब उठे इस भीषण झटके के कारण कई रिहायशी और कमर्शियल इमारतें पल भर में ढह गईं। दहशत के मारे लोग अपने घरों और इमारतों से बाहर निकलकर खुली सड़कों की तरफ भागे। भूकंप की वजह से कई पहाड़ियों से मलबा खिसककर मुख्य मार्गों पर आ गिरा, जिससे यातायात पूरी तरह बाधित हो गया।
मृतकों का आंकड़ा 38 तक पहुंचा, राहत कार्य जारी
इस प्राकृतिक आपदा में अब तक न्यूनतम 38 लोगों की जान जाने की आधिकारिक पुष्टि हो चुकी है। मलबे की सफाई और दूरदराज के हिस्सों तक पहुंच बनने के साथ ही यह संख्या और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। इंडोनेशिया की आपदा प्रबंधन एजेंसी बीएनपीबी के प्रमुख सुहार्यांतो ने स्थिति की जानकारी देते हुए बताया कि राहत और बचाव दल लगातार आपदा से प्रभावित हुए क्षेत्रों में पहुंच रहे हैं ताकि फंसे हुए लोगों को समय पर बाहर निकाला जा सके।
सिक्का और मंगराई क्षेत्रों में भूस्खलन से तबाही
भूकंप के तेज झटकों के तुरंत बाद फ्लोरेस के विभिन्न हिस्सों में जमीन खिसकने की घटनाएं सामने आईं। सबसे अधिक प्रभाव सिक्का, वेस्ट मंगराई और ईस्ट मंगराई इलाकों में देखा गया, जहां से अब तक 20 शव बरामद किए जा चुके हैं। इनमें रेओके गांव की एक दर्दनाक घटना भी शामिल है, जहां भूस्खलन की चपेट में आने से 8 ग्रामीणों की मौत हो गई। इस हादसे में 6 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं जिन्हें इलाज के लिए नजदीकी अस्पताल में दाखिल कराया गया है, जबकि मलबे के नीचे 2 अन्य ग्रामीणों के दबे होने के कारण उनके लापता होने की रिपोर्ट दर्ज की गई है।
इमारतों को पहुंचा भारी नुकसान और सुनामी का डर
इस आपदा से फ्लोरेस में निजी मकानों के साथ-साथ कई सरकारी भवनों को भी भारी क्षति पहुंची है। सामने आए विजुअल्स में कई बहुमंजिला संरचनाएं पूरी तरह जमींदोज दिखाई दे रही हैं। भूकंप के फौरन बाद प्रशासन ने एहतियात के तौर पर सुनामी की चेतावनी जारी कर दी थी, जिससे तटीय इलाकों में रहने वाली आबादी के बीच गहरा डर फैल गया। हालांकि, समुद्र के जलस्तर की निगरानी के दौरान जब कोई असामान्य बदलाव नहीं देखा गया, तो बाद में अधिकारियों ने सुनामी अलर्ट को वापस ले लिया। फिलहाल बचाव कर्मी मलबे में दबे संभावित जीवित लोगों की तलाश में जुटे हुए हैं।



















