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हिंद महासागर में सुरक्षा का प्रहरी बना मॉरीशस, भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश त्रिपाठी के दौरे से घबराया चीनदुनिया
16 अग॰ 2026, 12:38 am (30 दिन पहले)· 3

हिंद महासागर में सुरक्षा का प्रहरी बना मॉरीशस, भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश त्रिपाठी के दौरे से घबराया चीन

हिंद महासागर के 23 लाख वर्ग किलोमीटर समुद्री इलाके को नियंत्रित करने वाले मॉरीशस के साथ भारत ने अपने रक्षा और कूटनीतिक संबंधों को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है। भारतीय नौसेना प्रमुख के हालिया दौरे से चीन की विस्तारवादी मनसूबे नाकाम हो रहे हैं।

हिंद महासागर के नीले पानी के बीच स्थित मॉरीशस भौगोलिक क्षेत्रफल के दृष्टिकोण से भले ही भारत के किसी सामान्य जिले जितना प्रतीत होता हो, लेकिन रणनीतिक समुद्री सुरक्षा के पैमाने पर इसकी हैसियत अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह द्वीपीय राष्ट्र विशाल समुद्री क्षेत्र में भारत के लिए एक सशक्त प्रहरी और निगरानी केंद्र के रूप में कार्य करता है। दूसरी तरफ, बीजिंग ने इस रणनीतिक स्थिति का लाभ उठाने के लिए अरबों डॉलर का निवेश करके अपनी पैठ बनाने का भरसक प्रयास किया। हालांकि, भारत ने अपनी दशकों पुरानी ऐतिहासिक मित्रता, सांस्कृतिक जुड़ाव और ठोस सैन्य सहयोग के बल पर चीन के हर कूटनीतिक दांव को विफल कर दिया है।

मॉरीशस का विशाल समुद्री क्षेत्र और उसकी सामरिक हैसियत

मॉरीशस का कुल भूमि क्षेत्र मात्र 2,000 वर्ग किलोमीटर का है, परंतु इसका एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक जोन (EEZ) लगभग 23 लाख वर्ग किलोमीटर के दायरे में विस्तृत है। इस विशाल समुद्री क्षेत्र के नियंत्रण के साथ मॉरीशस दुनिया के 20वें सबसे बड़े समुद्री अधिकार क्षेत्र वाले देशों में गिना जाता है। इतने विशाल जलक्षेत्र पर प्रशासनिक व सुरक्षा नियंत्रण होने के कारण यह देश हिंद महासागर में व्यापारिक जहाजों की आवाजाही पर नजर रखने के लिए सबसे उपयुक्त स्थान माना जाता है।

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चीन की 'स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स' चाल और भारत का कड़ा जवाब

हिंद महासागर में भारत को घेरने की अपनी 'स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स' रणनीति के तहत चीन ने मॉरीशस पर विशेष ध्यान केंद्रित किया था। बीजिंग ने अफ्रीका महाद्वीप में अपना पहला फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) मॉरीशस के साथ ही हस्ताक्षरित किया था। इसके अतिरिक्त, चीनी कंपनियों ने मॉरीशस के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे, नेशनल स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और अनेक अस्पतालों का निर्माण किया, ताकि देश को वित्तीय कर्ज के जाल में फंसाया जा सके। चीन की योजना मॉरीशस को अपना एक प्रमुख समुद्री व सैन्य अड्डा बनाने की थी।

भारत ने चीन की इस रणनीतिक चाल को भांपते हुए तत्काल कदम उठाए। नई दिल्ली ने मॉरीशस को 680 मिलियन डॉलर का विशेष आर्थिक पैकेज प्रदान किया। इसके साथ ही अगालेगा द्वीप पर एक आधुनिक एयर स्ट्रिप और जेट्टी का निर्माण करके अपनी रणनीतिक उपस्थिति को बेहद मजबूत कर दिया। वर्तमान समय में मॉरीशस में तैनात बुनियादी ढांचे के माध्यम से भारतीय नौसेना पूरे हिंद महासागर में चीनी जहाजों और पनडुब्बियों की गतिविधियों पर चौबीसों घंटे निगरानी रखती है।

एडमिरल दिनेश त्रिपाठी का दौरा और 70 साल पुराना अटूट भरोसा

नई दिल्ली में सरकार का नेतृत्व चाहे किसी भी राजनीतिक दल के पास रहा हो, भारतीय नौसेना ने पिछले सात दशकों के दौरान मॉरीशस के साथ रणनीतिक विश्वास का एक अटूट ढांचा तैयार किया है। इसी द्विपक्षीय साझेदारी को और सुदृढ़ करने के उद्देश्य से भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश त्रिपाठी 10 से 13 अगस्त तक मॉरीशस की आधिकारिक यात्रा पर पहुंचे हैं। नौसेना प्रमुख के इस उच्चस्तरीय दौरे ने चीन के कूटनीतिक खेमे में हलचल तेज कर दी है।

महात्मा गांधी से दांडी मार्च तक: सांस्कृतिक और ऐतिहासिक जुड़ाव

भारत और मॉरीशस के बीच औपचारिक कूटनीतिक संबंधों की स्थापना वर्ष 1948 में हुई थी। यह वह समय था जब भारत को स्वतंत्रता प्राप्त किए केवल एक वर्ष बीता था और मॉरीशस को अपनी आजादी हासिल करने में दो दशक का समय शेष था। वर्तमान में मॉरीशस की कुल 13 लाख की आबादी में से लगभग 70 प्रतिशत, यानी 8.94 लाख से अधिक नागरिक भारतीय मूल के हैं।

दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक संबंधों की नींव बेहद गहरी है। वर्ष 1901 में महात्मा गांधी दक्षिण अफ्रीका से भारत लौटते समय मॉरीशस में रुके थे। उस ऐतिहासिक प्रवास के दौरान उन्होंने स्थानीय निवासियों को तीन मूल मंत्र दिए थे: शिक्षा प्राप्त करना, राजनीतिक रूप से सशक्त होना और अपनी मातृभूमि भारत से सदैव जुड़े रहना। मॉरीशस आज भी महात्मा गांधी के उस दौरे को अत्यंत सम्मान के साथ याद रखता है। यही कारण है कि मॉरीशस अपना राष्ट्रीय दिवस प्रत्येक वर्ष 12 मार्च को मनाता है, जो भारत के ऐतिहासिक दांडी मार्च की वर्षगांठ का दिन है।

'सागर' से 'महासागर' तक: पीएम मोदी का विजन और आर्थिक मदद

पोर्ट लुइस वह स्थान है जहां से मार्च 2015 में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने ऐतिहासिक विजन 'सागर' (Security and Growth for All in the Region) की घोषणा की थी। इसका मुख्य उद्देश्य क्षेत्र के सभी देशों की सुरक्षा और आर्थिक प्रगति को बढ़ावा देना था।

इसके ठीक 10 वर्ष पश्चात, मार्च 2025 में मॉरीशस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस विजन का विस्तार करते हुए 'महासागर' दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। इस संकल्पना का उद्देश्य संपूर्ण हिंद महासागर क्षेत्र में सामूहिक सुरक्षा, सतत विकास और आपसी सहयोग को नया आयाम देना है। इसके बाद, सितंबर 2025 में मॉरीशस के प्रधानमंत्री डॉ. नवीनचंद्र रामगुलाम ने भारत का दौरा किया, जिसके दौरान भारत ने मॉरीशस के बुनियादी ढांचे और समुद्री सुरक्षा प्रणालियों को आधुनिक बनाने के लिए व्यापक वित्तीय व तकनीकी सहायता देने की घोषणा की।

भारतीय युद्धपोतों और विमानों से सुसज्जित मॉरीशस का बेड़ा

भारत और मॉरीशस का रक्षा तंत्र केवल कागजी समझौतों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रत्यक्ष रूप से समुद्री गश्त में दिखाई देता है। मार्च 2015 में कोलकाता स्थित गार्डन रीच शिपबिल्डर्स द्वारा निर्मित युद्धपोत MCGS बैराकुडा मॉरीशस को सौंपा गया था। यह किसी भी भारतीय शिपयार्ड द्वारा किसी विदेशी राष्ट्र के लिए तैयार किया गया पहला युद्धपोत था।

इसके बाद वर्ष 2016 में 'विक्ट्री' और वर्ष 2017 में 'वैलियंट' नामक तटीय गश्ती पोतों का निर्माण गोवा शिपयार्ड में करके मॉरीशस को सौंपा गया। वायु निगरानी और खोज व बचाव अभियानों के लिए भारत ने मॉरीशस को 4 डोर्नियर समुद्री गश्ती विमान, 4 चेतक हेलीकॉप्टर और 3 एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर (ALH) प्रदान किए हैं, जो मॉरीशस के 23 लाख वर्ग किलोमीटर के जलक्षेत्र की निगरानी करते हैं।

सैन्य प्रशिक्षण और हाइड्रोग्राफी में रिकॉर्ड साझेदारी

मॉरीशस नेशनल कोस्ट गार्ड के 1,000 से अधिक जवानों और अधिकारियों को भारतीय नौसेना द्वारा पेशेवर प्रशिक्षण दिया जा चुका है। अक्टूबर 2025 में कैडेट जुगमा प्रिसिता ने केरल के एझिमाला स्थित भारतीय नौसेना अकादमी से अपना प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा किया और वह मॉरीशस कोस्ट गार्ड की पहली महिला अधिकारी बनीं।

समुद्री सर्वेक्षण के क्षेत्र में भी दोनों देशों की साझेदारी अभूतपूर्व रही है। भारत के हाइड्रोग्राफिक सर्वे जहाजों ने मॉरीशस के प्रादेशिक जल में 18 बार तैनात होकर 47 प्रमुख सर्वे संपन्न किए हैं। इस सहयोग से 13 पेपर चार्ट और 15 इलेक्ट्रॉनिक नेविगेशनल चार्ट (ENC) तैयार किए गए हैं। अप्रैल 2026 में आयोजित 9वें इंडियन ओशियन कॉन्फ्रेंस के दौरान भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने इन नेविगेशनल चार्ट्स की व्यावसायिक बिक्री से अर्जित 45,000 डॉलर का रॉयल्टी चेक मॉरीशस सरकार को सौंपा।

सवाल-जवाब

मॉरीशस हिंद महासागर में भारत के लिए रणनीतिक रूप से क्यों महत्वपूर्ण है?
मॉरीशस का भूमि क्षेत्र केवल 2,000 वर्ग किलोमीटर है, लेकिन इसका एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक जोन 23 लाख वर्ग किलोमीटर में फैला है, जिससे यह हिंद महासागर की निगरानी के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
चीन ने मॉरीशस में अपनी उपस्थिति बढ़ाने के लिए क्या कदम उठाए थे?
चीन ने मॉरीशस के साथ अफ्रीका में पहला फ्री ट्रेड एग्रीमेंट साइन किया और वहां अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे, स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स व अस्पतालों का निर्माण करके प्रभाव बढ़ाने का प्रयास किया।
भारत ने अगालेगा द्वीप पर क्या निर्माण किया है?
भारत ने मॉरीशस के अगालेगा द्वीप पर एयर स्ट्रिप और जेट्टी का निर्माण किया है, जिससे भारतीय नौसेना पूरे हिंद महासागर में 24 घंटे निगरानी रख सकती है।
भारतीय नौसेना प्रमुख की हालिया मॉरीशस यात्रा की तिथियां क्या हैं?
भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश त्रिपाठी 10 से 13 अगस्त तक मॉरीशस की आधिकारिक यात्रा पर हैं।
मॉरीशस का राष्ट्रीय दिवस 12 मार्च को क्यों मनाया जाता है?
मॉरीशस का राष्ट्रीय दिवस भारत के ऐतिहासिक दांडी मार्च की वर्षगांठ के दिन 12 मार्च को महात्मा गांधी के 1901 के मॉरीशस दौरे के सम्मान में मनाया जाता है।
भारत ने मॉरीशस को कौन-कौन से युद्धपोत और विमान दिए हैं?
भारत ने MCGS बैराकुडा, गश्ती पोत विक्ट्री और वैलियंट के अलावा 4 डोर्नियर गश्ती विमान, 4 चेतक हेलीकॉप्टर और 3 एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर (ALH) प्रदान किए हैं।
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टिप्पणियाँ 5

Ayesha Siddiqui@ayesha-siddiqui·29 दिन पहले

हिंद महासागर में बीजिंग और नई दिल्ली के बीच चल रही रणनीतिक रस्साकशी अब केवल कूटनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आर्थिक पैठ और द्वीप राष्ट्रों की संप्रभुता के संतुलन पर टिकी है। मॉरीशस के अगालेगा द्वीप पर भारत की बढ़ती सैन्य अवसंरचना और चीन की ऋण कूटनीति के बीच का यह संघर्ष इस बात का प्रमाण है कि दक्षिण एशिया और अफ्रीकी तटों के बीच का समुद्री क्षेत्र वैश्विक महाशक्तियों का नया अखाड़ा बन चुका है। नौसेना प्रमुख के इस दौरे से क्षेत्र में शक्ति संतुलन और अधिक स्पष्ट होगा।

Karan Malhotra@karan-malhotra·29 दिन पहले

हिंद महासागर में सुरक्षा और सामरिक मामलों की कवरेज के दौरान यह स्पष्ट होता है कि चीन की 'स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स' जैसी रणनीतियाँ केवल आर्थिक निवेश तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह क्षेत्रीय सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौतियां पैदा करती हैं। अगालेगा द्वीप पर भारतीय बुनियादी ढांचे का विकास और नौसेना प्रमुख का यह दौरा इस बात का पुख्ता प्रमाण है कि भारत समुद्री सीमाओं की निगरानी और राष्ट्रीय सुरक्षा के मामले में किसी भी प्रकार की सामरिक चूक बर्दाश्त नहीं करेगा। आने वाले समय में इस क्षेत्र में खुफिया सूचनाओं का आदान-प्रदान और मजबूत होगा।

Yuki Tanaka@yuki-tanaka·29 दिन पहले

अगालेगा द्वीप पर विकसित सुविधाएं और नौसेना प्रमुख का यह दौरा केवल द्विपक्षीय रक्षा सहयोग नहीं है, बल्कि यह स्पष्ट करता है कि हिंद महासागर के रणनीतिक गलियारों में बीजिंग के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए भारत ने अपनी सुरक्षा ग्रिड को पूरी तरह सक्रिय कर दिया है। मॉरीशस के 23 लाख वर्ग किलोमीटर के विशाल आर्थिक क्षेत्र में इस तरह की लगातार सामरिक सहभागिता से चीन की विस्तारवादी रणनीतियों को बड़ा झटका लगा है, और आने वाले समय में यह समुद्री निगरानी तथा खुफिया तालमेल को और अधिक धारदार बनाएगा।

Omar AL Mansoori@omar-mansoori·29 दिन पहले

मॉरीशस के २३ लाख वर्ग किलोमीटर के विशाल ईईजेड और अगालेगा द्वीप पर विकसित सैन्य बुनियादी ढांचे के जरिए भारत हिंद महासागर में अपनी समुद्री सुरक्षा को बेहद मजबूत कर रहा है। एडमिरल दिनेश त्रिपाठी का यह दौरा केवल कूटनीतिक औपचारिकता नहीं है, बल्कि यह बीजिंग के कर्ज जाल और स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स रणनीति का एक ठोस भू-राजनीतिक जवाब है। भविष्य में यह साझेदारी इस क्षेत्र में ऊर्जा मार्गों और व्यापारिक जहाजों की निर्बाध आवाजाही को सुनिश्चित करने में निर्णायक भूमिका निभाएगी।

Rohan Verma@rohan-verma·29 दिन पहले

अगालेगा द्वीप पर भारत द्वारा विकसित आधुनिक ढांचा और नौसेना प्रमुख का यह उच्चस्तरीय दौरा रणनीतिक मोर्चे पर एक बड़ा कदम है। यह साफ है कि नई दिल्ली हिंद महासागर में चीन की घेराबंदी और उसकी विस्तारवादी चालों से निपटने के लिए अपनी ऑपरेशनल क्षमताओं को लगातार पुख्ता कर रही है। आने वाले समय में यह सहयोगात्मक तंत्र समुद्री रास्तों की सुरक्षा और क्षेत्रीय प्रभुत्व को बनाए रखने में मील का पत्थर साबित होगा।

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