जापान में पिछले कई दशकों से बच्चों की घटती संख्या और बुजुर्ग होती आबादी सबसे बड़ी राष्ट्रीय चिंता बनी हुई है। हालांकि, मौजूदा समय में करीब 11 साल के लंबे अंतराल के बाद एक छोटी सी सकारात्मक खबर सामने आई है। जनवरी से जून 2026 के इस छह महीने के दौरान देश भर में कुल 3 लाख 42 हजार 68 बच्चों का जन्म हुआ है। यह आंकड़ा पिछले साल की इसी समान अवधि के मुकाबले 0.8 फीसदी अधिक दर्ज किया गया है। स्वास्थ्य, श्रम एवं कल्याण मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, इस साल की पहली छमाही में पिछले वर्ष की तुलना में 2,788 बच्चे अधिक पैदा हुए हैं। इस गणना में केवल जापानी नागरिक ही नहीं, बल्कि वहां निवास करने वाले विदेशी नागरिकों के यहां जन्मे बच्चे भी शामिल किए गए हैं।
शादियों की संख्या में इजाफा बना मुख्य वजह
जन्म लेने वाले बच्चों की संख्या में आए इस मामूली सुधार के पीछे मुख्य तौर पर विवाह पंजीकरण में हुई बढ़ोतरी को अहम कारण माना जा रहा है। जापान के भीतर साल 2024 और 2025 के दौरान शादियों के आंकड़ों में कुछ सुधार देखने को मिला था। अगर बात साल 2025 की करें तो विदेशी नागरिकों के साथ हुई शादियों को मिलाकर कुल लगभग 5.05 लाख विवाह संपन्न हुए थे। यह आंकड़ा 2024 के मुकाबले 1.1 फीसदी अधिक था। इसके बाद जनवरी से जून 2026 के बीच भी लगभग 2.39 लाख शादियां हुईं, जो पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में 0.2 फीसदी ज्यादा हैं। अधिकारियों और विशेषज्ञों का मानना है कि शादियों की संख्या में आई इस स्थिरता का सीधा सकारात्मक असर जन्म के आंकड़ों पर पड़ा है।
देश के आधे से ज्यादा प्रांतों में सकारात्मक बदलाव
जापान के कुल 47 प्रांतों में से 26 प्रांतों में इस वर्ष बच्चों के जन्म में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसमें सबसे बड़ा सुधार राजधानी टोक्यो में देखने को मिला, जहां पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 2,278 अधिक बच्चे पैदा हुए। टोक्यो के बाद आइची प्रांत में 517 और फुकुओका प्रांत में 438 बच्चों की अतिरिक्त बढ़ोतरी दर्ज की गई। हालांकि, स्थिति सभी जगह एक जैसी नहीं है और देश के 21 प्रांतों में जन्म लेने वाले बच्चों की संख्या में अभी भी कमी दर्ज की गई है। इनमें इशिकावा प्रांत ऐसा रहा जहां सबसे अधिक 360 बच्चों की कमी का सामना करना पड़ा, जो स्थानीय स्तर पर चिंता का विषय बना हुआ है।
गंभीर जनसांख्यिकी संकट अभी भी बरकरार
जन्म दर में यह हल्का सा सुधार देश के नीति निर्माताओं के लिए एक राहत भरी सुगबुगाहट जरूर है, लेकिन इससे जापान की जनसांख्यिकी से जुड़ी बड़ी समस्या का समाधान नहीं हुआ है। देश में बच्चे पैदा करने की उम्र वाली आबादी का दायरा लगातार सिमटता जा रहा है। इसके अलावा, सामाजिक बदलावों के चलते युवा या तो बहुत देर से विवाह कर रहे हैं या फिर शादी करने से बच रहे हैं। इसका दूरगामी असर आने वाले वर्षों में जन्म लेने वाले बच्चों की कुल संख्या पर पड़ना तय माना जा रहा है। पिछले साल यानी 2025 में पूरे देश में लगभग 7.05 लाख बच्चों का जन्म हुआ था। यह लगातार 10वां ऐसा साल था जब जन्म लेने वाले बच्चों की संख्या ने अपने पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ते हुए सबसे निचले स्तर को छुआ था।
मौतों के आंकड़े जन्म से अब भी काफी ज्यादा
केवल जन्म बढ़ने से ही देश की कुल आबादी की तस्वीर नहीं बदल सकती, क्योंकि मृत्यु दर का ग्राफ अब भी बहुत ऊंचा है। जनवरी से जून 2026 के बीच के इन छह महीनों में जापान के भीतर कुल 7,78,982 लोगों की मृत्यु हुई। हालांकि यह आंकड़ा पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 6.9 फीसदी कम है, फिर भी जन्म और मौत के बीच का अंतर बहुत बड़ा है। सिर्फ छह महीने की इस अवधि में जापान की प्राकृतिक आबादी में 4,36,914 लोगों की भारी कमी दर्ज की गई है। इसका मतलब साफ है कि बच्चों के जन्म में मामूली बढ़त दर्ज होने के बावजूद जापान की कुल आबादी अभी भी बहुत तेजी से घट रही है और संकट टला नहीं है।
अर्थव्यवस्था और सामाजिक सुरक्षा पर मंडराता खतरा
जापान की घटती आबादी का यह संकट केवल जनसंख्या के कागजी आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। लगातार कम होते कामकाजी उम्र के लोगों के कारण भविष्य में विभिन्न व्यावसायिक क्षेत्रों में कर्मचारियों और कामगारों की भारी कमी पैदा हो सकती है। इसके अलावा, आबादी घटने से स्थानीय बाजारों, व्यापारिक गतिविधियों और बुनियादी सेवाओं पर भी गहरा असर पड़ रहा है। देश में बुजुर्ग नागरिकों की तादाद लगातार बढ़ रही है जबकि उनके मुकाबले कामकाजी युवा आबादी कम हो रही है। इस असंतुलन के कारण सरकार की पेंशन व्यवस्था, स्वास्थ्य सेवाओं और अन्य तमाम सामाजिक सुरक्षा योजनाओं पर भारी वित्तीय और प्रशासनिक दबाव बढ़ने की आशंका बनी हुई है।



















