हिमालयी क्षेत्र में भारी मानसूनी बारिश और प्राकृतिक आपदाओं ने भारी तबाही मचा रखी है। ताजा आंकड़ों के अनुसार नेपाल में बाढ़ और भूस्खलन के कारण जान गंवाने वालों की कुल संख्या अब 600 से काफी ज्यादा हो गई है। स्थानीय पुलिस और सरकारी तंत्र द्वारा राहत एवं बचाव अभियान युद्धस्तर पर चलाए जा रहे हैं, लेकिन भारी नुकसान और भौगोलिक कठिनाइयों के कारण राहत कार्यों में बाधा आ रही है।
तिब्बत में झील और भूस्खलन का मंडराता खतरा
चीनी सरकारी मीडिया के मुताबिक तिब्बत क्षेत्र में भूस्खलन के मलबे से एक प्राकृतिक झील का निर्माण हुआ है, जिसमें जलस्तर लगातार बढ़ता जा रहा है। हालात की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने एक बार फिर तबाही का अलर्ट जारी किया है। रिपोर्ट में यह भी अंदेशा जताया गया है कि आने वाले समय में दोबारा कीचड़ और जमीन खिसकने जैसी घटनाएं सामने आ सकती हैं, जिससे स्थिति और अधिक गंभीर हो सकती है।
ग्यारोंग पोर्ट पर ड्रोन और निगरानी चौकियां तैनात
नेपाल और तिब्बत के बीच स्थित मुख्य जमीनी सीमा यानी ग्यारोंग पोर्ट के आसपास का इलाका अत्यधिक संवेदनशील बना हुआ है। वहां बचाव कार्यों की कमान संभालने वाली विशेष टीमों ने पर्वतीय ढलानों की पल-पल की गतिविधि पर नजर रखने के लिए आधुनिक ड्रोन तैनात किए हैं। इसके अलावा कई नई निगरानी चौकियां भी स्थापित की गई हैं ताकि सीमा पर काम कर रहे बचाव कर्मियों को किसी भी संभावित खतरे से पहले ही आगाह किया जा सके।
मृतकों के आंकड़ों को लेकर अपडेट और लापता लोगों की तलाश
स्थानीय पुलिस द्वारा साझा किए गए ताजा विवरण के अनुसार नेपाल में मृतकों की संख्या बढ़कर 626 तक पहुंच गई है। यह आंकड़ा पिछली बार सामने आई 579 मौतों के आंकड़े से काफी अधिक है। हालांकि सुबह 10 बजे से पहले जारी किए गए एक अन्य पुलिस अपडेट में संख्या 616 बताई गई थी। इसके साथ ही, चीन के सरकारी मीडिया ने इससे पहले तिब्बत क्षेत्र में सात लोगों की मौत की पुष्टि की थी, जिससे कुल नुकसान का दायरा और बढ़ गया है। इन सबके बीच लगभग 2,000 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं, जिनकी तलाश में सुरक्षा बल जुटे हुए हैं।
तेज किए गए राहत और सड़क बहाली के प्रयास
आपदा प्रभावित क्षेत्रों में मौसम के लगातार बदलते मिजाज के बीच रेस्क्यू टीमें मलबे में फंसे लोगों को ढूंढने का काम कर रही हैं। इसके साथ ही बाधित हुई सड़कों को यातायात के लिए फिर से खोलने का अभियान भी तेजी से चल रहा है। नेपाल में आई इस भीषण आपदा के बाद उत्पन्न मानवीय संकट को देखते हुए कई अंतरराष्ट्रीय सहायता एजेंसियों और विदेशी सरकारों ने आपातकालीन राहत सामग्रियों और सहायता कार्यों को काफी तेज कर दिया है ताकि प्रभावितों तक जल्द से जल्द मदद पहुंचाई जा सके।



















