फिल्म जगत में इस समय एक छोटी बजट की फिल्म ने सभी को हैरान कर दिया है। 'टॉक्सिक' की रफ्तार बॉक्स ऑफिस पर जहां धीमी होती दिख रही है, वहीं नीम करोली बाबा के जीवन से प्रेरणा लेने वाली 'हनुमान अंश' ने अपनी कमाई से एक नया इतिहास रच दिया है। रिलीज के चौथे हफ्ते में इस फिल्म ने ऐसा जबरदस्त कमबैक किया है कि इसकी तुलना अब बड़ी व्यावसायिक फिल्मों से की जा रही है। महज 8 लाख रुपये से अपनी शुरुआत करने वाली इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर 18 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर लिया है और चौथे शुक्रवार को भी इसके प्रदर्शन में कोई कमी नहीं आई है।
चौथे हफ्ते में बॉक्स ऑफिस पर आई सुनामी
भारतीय सिनेमाघरों में आमतौर पर कोई भी फिल्म अपने चौथे हफ्ते तक पहुंचते-पहुंचते दम तोड़ने लगती है और स्क्रीन से उतरने की कगार पर आ जाती है। लेकिन 'हनुमान अंश' ने अपने रिलीज के 22वें दिन यानी चौथे शुक्रवार को बॉक्स ऑफिस पर ऐसा तहलका मचाया जिसकी किसी ने उम्मीद नहीं की थी। चौथे शुक्रवार को इस फिल्म ने शानदार 6.25 करोड़ रुपये की नेट कमाई दर्ज की है। इस चौंकाने वाले आंकड़े ने यह साबित कर दिया है कि अगर दर्शकों को सामग्री पसंद आए, तो समय के साथ फिल्म और भी मजबूत हो सकती है.
शुरुआती दिन और जबरदस्त उछाल
इस पूरी सफलता की कहानी में सबसे दिलचस्प पहलू इसकी शुरुआत है। फिल्म ने 31 जुलाई को सिनेमाघरों में दस्तक दी थी और अपने ओपनिंग डे पर मात्र 8 से 10 लाख रुपये का बेहद सामान्य बिजनेस किया था। लेकिन समय के साथ दर्शकों के बेहतरीन रिव्यूज और मजबूत 'वर्ड ऑफ माउथ' ने इसके भाग्य को पूरी तरह बदल दिया। पहले दिन के मुकाबले 22वें दिन इसकी कमाई में 7,275% तक की अभूतपूर्व बढ़ोतरी दर्ज की गई है। भारतीय सिनेमा के इतिहास में इस तरह की छलांग बेहद दुर्लभ मानी जाती है, जिससे इसका कुल कारोबार अब तक लगभग 18.10 करोड़ रुपये पर पहुंच गया है।
सिनेमाघरों में बढ़े शोज और दर्शकों का क्रेज
बढ़ती हुई लोकप्रियता का असर सीधे तौर पर फिल्म को मिलने वाले शोज पर भी पड़ा है। रिलीज के पहले हफ्ते के शुक्रवार को देशभर के सिनेमाघरों में इसके पास केवल 276 शोज थे। दर्शकों के लगातार बढ़ते रुझान और हाउसफुल होते थिएटर्स को देखते हुए प्रदर्शकों ने चौथे शुक्रवार तक इसके शोज की संख्या बढ़ाकर लगभग 850 कर दी। यह इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि फिल्म बिना किसी बड़े स्टारडम के भी सिर्फ जनता के समर्थन के दम पर अपनी जगह बनाने में कामयाब रही है।
धीमी शुरुआत के बाद कैसे पकड़ी रफ्तार
दर्शकों के मन में यह सवाल जरूर आता है कि आखिर इतनी सुस्त शुरुआत के बाद इस फिल्म को अचानक इतनी बड़ी रफ्तार कैसे मिल गई। इसके पीछे मुख्य वजह मजबूत 'वर्ड ऑफ माउथ' और नीम करोली बाबा के प्रति लोगों की गहरी धार्मिक आस्था को माना जा रहा है। जैसे-जैसे फिल्म की चर्चा माउथ पब्लिसिटी के जरिए फैली, बाबा के अनुयायी और सामान्य दर्शक बड़ी संख्या में सिनेमाघरों की तरफ खिंचे चले आए। हालांकि क्षेत्रीय आधार पर इसकी पकड़ अलग-अलग है; उत्तर भारत के सर्किट में इसका प्रदर्शन बेहद मजबूत है, जबकि दक्षिण और पूर्वी भारत के इलाकों में इसका कारोबार अभी थोड़ा धीमा बना हुआ है।



















