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चीन में टूटा लियुलान बांध, भारत के किन विशाल जल प्रोजेक्ट्स पर मंडराता है खतरादुनिया
28 जुल॰ 2026, 3:59 pm (14 दिन पहले)· 0

चीन में टूटा लियुलान बांध, भारत के किन विशाल जल प्रोजेक्ट्स पर मंडराता है खतरा

चीन के लियुलान बांध में आई बड़ी दरार के बाद दुनिया भर में बड़े जलसंरक्षकों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। इस घटना के बीच भारत के प्रमुख बांधों की स्थिति और उनकी सुरक्षा व्यवस्था पर भी नए सिरे से चर्चा शुरू हो गई है।

हाल ही में टाइफून मेसाक के कारण चीन में हुई भारी बारिश से जलसंरचनाओं पर गंभीर संकट खड़ा हो गया है। बीते 6 जुलाई, 2026 को चीन के नानिंग स्थित हेंगझोउ क्षेत्र में बने लियुलान बांध में 50 मीटर चौड़ी एक विशाल दरार सामने आई। इस गंभीर घटना के बाद निचले इलाकों में बाढ़ का पानी तेजी से फैल गया, जिसके चलते प्रशासन को आपातकाल घोषित करना पड़ा। सुरक्षा के मद्देनजर प्रभावित क्षेत्रों से 48000 से 62000 नागरिकों को सुरक्षित स्थानों की ओर स्थानांतरित किया गया। इस प्राकृतिक और ढांचागत आपदा की वजह से लाखों लोग प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित हुए हैं। कई गांवों और कस्बों में पानी भर जाने से सड़क मार्ग पूरी तरह बाधित हो गए और बिजली आपूर्ति ठप पड़ गई। इस हादसे में कई लोगों के हताहत होने की भी आशंका जताई जा रही है।

लियुलान बांध का इतिहास और ढांचागत विशेषता

चीन का यह बहुचर्चित लियुलान बांध अपनी विशाल संरचना के लिए जाना जाता है। इस परियोजना का निर्माण कार्य अगस्त 1958 में शुरू हुआ था और यह वर्ष 1960 में बनकर पूरी तरह तैयार हुआ था। इस बांध की कुल ऊंचाई लगभग 111.20 मीटर है, जो कि करीब 50 मंजिला इमारत के बराबर बैठती है। अपनी भारी-भरकम बनावट वाले इस जलसंग्रह की कुल जल भंडारण क्षमता लगभग 91 से 95 मिलियन घन मीटर आंकी गई है। इस परियोजना का मूल उद्देश्य कृषि भूमि के लिए सिंचाई की सुविधा प्रदान करना, बाढ़ के पानी को नियंत्रित करना, मछली पालन को बढ़ावा देना और स्थानीय स्तर पर जलविद्युत का उत्पादन करना था। हालांकि, मौजूदा हादसे ने इसके निर्माण और रखरखाव पर कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

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जलवायु परिवर्तन और बांधों की बढ़ती चिंताएं

विशेषज्ञों का मानना है कि दुनिया भर में मौसम के मिजाज तेजी से बदल रहे हैं। जलवायु परिवर्तन के कारण अत्यधिक और अचानक होने वाली बारिश की घटनाओं में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। ऐसे हालातों में बड़े बांधों की नियमित निगरानी करना और समय-समय पर अतिरिक्त पानी को नियंत्रित तरीके से बाहर निकालना पहले की तुलना में कहीं अधिक चुनौतीपूर्ण और महत्वपूर्ण हो गया है। लियुलान बांध में आई इस खतरनाक दरार ने एक बार फिर वैश्विक स्तर पर बड़े बांधों की सुरक्षा व्यवस्था और आपदा प्रबंधन की तैयारियों को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है।

भारत में विशाल बांधों का जाल

दुनिया भर में जब भी बड़े और विशाल बांधों का जिक्र होता है, तो चीन का नाम सबसे पहले आता है, लेकिन भारत भी इस मामले में किसी से पीछे नहीं है। भारत में आजादी के बाद से ही कृषि विकास, बिजली उत्पादन और बाढ़ नियंत्रण के लिए बड़े पैमाने पर जल परियोजनाओं की शुरुआत की गई थी। देश में कई ऐसे भव्य बांध मौजूद हैं, जो अपनी ऊंचाई, लंबाई, जल भंडारण क्षमता और बिजली पैदा करने की क्षमता के मामले में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक अलग पहचान रखते हैं। इन परियोजनाओं ने देश की अर्थव्यवस्था और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई है।

देश के प्रमुख और ऊंचे बांध

उत्तराखंड राज्य में स्थित टिहरी बांध को देश का सबसे ऊंचा बांध माना जाता है, जिसकी ऊंचाई लगभग 260.5 मीटर है। भागीरथी नदी पर बना यह प्रोजेक्ट उत्तर भारत के तमाम राज्यों को पीने का पानी, सिंचाई की सुविधा और बिजली मुहैया कराता है। इसी तरह, हिमाचल प्रदेश और पंजाब की सीमा पर सतलुज नदी के तट पर बना भाखड़ा नांगल बांध देश की सबसे महत्वपूर्ण बहुउद्देशीय परियोजनाओं में शुमार है। इसकी ऊंचाई 226 मीटर है और इसने पंजाब, हरियाणा तथा राजस्थान की कृषि व्यवस्था को पूरी तरह बदल दिया है। गुजरात में नर्मदा नदी पर बना सरदार सरोवर बांध भी अपनी 163 मीटर ऊंचाई के साथ देश के सबसे चर्चित प्रोजेक्ट्स में शामिल है, जिससे गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान के कई इलाकों में पानी पहुंचता है। इसके अलावा ओडिशा का हीराकुंड बांध, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश की सीमा पर स्थित नागार्जुन सागर बांध तथा मध्य प्रदेश का इंदिरा सागर बांध भी भारत की प्रमुख जल संरचनाओं में गिने जाते हैं।

क्या भारतीय बांध वैश्विक स्तर पर करते हैं मुकाबला?

यदि केवल बांधों की कुल संख्या को देखा जाए, तो चीन इस मामले में दुनिया में सबसे आगे खड़ा है और सबसे बड़े जलविद्युत बांधों पर भी उसका दबदबा है। इसके बावजूद, भारत के कई बांध अपनी बेहतरीन इंजीनियरिंग, ऊंचाई और बहुउद्देशीय उपयोग के मामले में दुनिया के किसी भी बड़े प्रोजेक्ट से कम नहीं हैं। टिहरी बांध दुनिया के सबसे ऊंचे बांधों में अपनी गिनती कराता है, जबकि भाखड़ा नांगल और सरदार सरोवर जैसी परियोजनाएं दशकों से करोड़ों नागरिकों की प्यास बुझाने के साथ-साथ उन्हें रोशन कर रही हैं। भारत के ये बांध केवल बिजली बनाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ये देश की कृषि, पेयजल प्रबंधन, बाढ़ नियंत्रण और औद्योगिक प्रगति की रीढ़ हैं।

भारत में बांधों की सुरक्षा और निगरानी के उपाय

विशेषज्ञों का साफ तौर पर मानना है कि बड़े बांध किसी भी राष्ट्र की बेहद महत्वपूर्ण आधारभूत संरचना होते हैं। यदि तकनीकी खामियों, बहुत ज्यादा बारिश या किसी प्राकृतिक आपदा के चलते इनमें कोई बड़ी दुर्घटना होती है, तो इससे लाखों बेकसूर लोगों का जीवन खतरे में पड़ सकता है। यही मुख्य वजह है कि भारत में केंद्रीय जल आयोग और राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण लगातार समय-समय पर देश के तमाम बांधों का कड़ाई से निरीक्षण करते रहते हैं। देश में बांध सुरक्षा अधिनियम, 2021 लागू होने के बाद से बड़े बांधों की निगरानी और उनकी सुरक्षा के पुख्ता इंतजामों को और अधिक मजबूत किया गया है ताकि किसी भी अनहोनी से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके।

सवाल-जवाब

चीन के किस बांध में दरार आई है?
चीन के लियुलान बांध में 6 जुलाई, 2026 को 50 मीटर की बड़ी दरार आई है।
लियुलान बांध की ऊंचाई कितनी है?
लियुलान बांध की ऊंचाई लगभग 111.20 मीटर यानी करीब 50 मंजिला इमारत जितनी है।
चीन में बांध टूटने के बाद कितने लोगों को सुरक्षित निकाला गया?
प्रशासन ने सुरक्षा के लिए 48000 से 62000 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है।
भारत का सबसे ऊंचा बांध कौन सा है?
उत्तराखंड में भागीरथी नदी पर बना टिहरी बांध भारत का सबसे ऊंचा बांध है, जिसकी ऊंचाई 260.5 मीटर है।
भारत में बांधों की सुरक्षा के लिए कौन सा कानून है?
भारत में बांधों की निगरानी और सुरक्षा के लिए बांध सुरक्षा अधिनियम, 2021 लागू किया गया है।
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