पश्चिमी प्रशांत महासागर में उभरा सुपर टाइफून डॉल्फिन इस समय पूरे पूर्वी एशिया के लिए एक बड़ा संकट बन चुका है। बेहद विनाशकारी हवाओं और भारी बारिश का यह तूफान जापान के दक्षिणी हिस्सों से टकराने के बाद अब चीन के तटीय इलाकों की तरफ तेजी से बढ़ रहा है। तूफान के रास्ते में पड़ने वाले इलाकों में प्रचंड हवाएं, भीषण वर्षा और समंदर में उठती ऊंची लहरें भारी तबाही मचा रही हैं। जापान, चीन और ताइवान जैसे देश इस प्राकृतिक आपदा के चलते रेड अलर्ट पर हैं। जनजीवन को सुरक्षित रखने के लिए तीन लाख से ज्यादा लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है, जबकि उड़ानों, नौका सेवाओं और शिक्षण संस्थानों को पूरी तरह बंद कर दिया गया है।
जापान के ओकिनावा में भारी नुकसान और बिजली ठप
तूफान डॉल्फिन ने सबसे पहले जापान के दक्षिणी ओकिनावा क्षेत्र पर अपना कहर बरपाया। इस द्वीप समूह में 162 किलोमीटर प्रति घंटा की निरंतर रफ्तार से हवाएं चलीं, जबकि हवा के झोंकों की गति 216 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच गई। इन तेज तूफानी हवाओं ने ओकिनावा के बिजली ढांचे को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया, जिससे करीब 14 हजार इमारतों में अंधेरा छा गया। आपदा प्रबंधन एजेंसियों के अनुसार, तेज हवाओं और उड़ते हुए मलबे की चपेट में आने से पांच बुजुर्ग नागरिक घायल हो गए। इनमें से तीन लोग तेज हवा के अचानक आए झोंके के कारण सड़क पर गिर पड़े थे। राहत की बात यह रही कि किसी भी नागरिक को गंभीर या जानलेवा चोट नहीं आई है, लेकिन द्वीप पर बिजली आपूर्ति बहाल करने के काम में भारी बाधाएं आ रही हैं।
चीन के झेजियांग और फुजियान प्रांतों में हाई अलर्ट
ओकिनावा को पार करने के बाद टाइफून डॉल्फिन अब चीन के पूर्वी तटीय इलाकों की तरफ बढ़ रहा है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार यह तूफान झेजियांग और फुजियान प्रांतों के मध्य तटीय क्षेत्र से टकरा सकता है। इस खतरे को देखते हुए चीनी प्रशासन ने तुरंत आपातकालीन स्थिति लागू कर दी है और राहत कार्यों को तेज कर दिया है। झेजियांग प्रांत में तूफान की चेतावनी को उच्चतम स्तर तक बढ़ा दिया गया है। तटीय क्षेत्रों और संभावित बाढ़ वाले इलाकों से लगभग तीन लाख निवासियों को सुरक्षित परिसरों और राहत शिविरों में स्थानांतरित कर दिया गया है। इसके साथ ही, चीन ने अपने प्रमुख समुद्री बंदरगाहों पर सभी प्रकार के वाणिज्यिक और मालवाहक जहाजों का संचालन पूरी तरह रोक दिया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार पर भी गहरा असर पड़ा है।
यातायात व्यवस्था ठप: उड़ानें रद्द और फेरी सेवाएं बंद
डॉल्फिन तूफान के प्रभाव से पूर्वी एशिया का वायु और समुद्री यातायात नेटवर्क पूरी तरह चरमरा गया है। चीन के व्यावसायिक केंद्र शंघाई में सुरक्षा कारणों से 1300 से 1600 उड़ानों को रद्द करना पड़ा है। वहीं निंगबो हवाई अड्डे पर भी सभी वाणिज्यिक उड़ानों का संचालन स्थगित कर दिया गया है। सीमा पार परिवहन पर भी इसका असर पड़ा है और ताइवान ने करीब 63 अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को रद्द कर दिया है। समुद्री यात्रा को सुरक्षित बनाने के लिए झेजियांग प्रांत में यात्रियों को ले जाने वाले 162 फेरी मार्गों को पूरी तरह बंद कर दिया गया है। निंगबो शहर में सभी प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों में कक्षाएं रोक दी गई हैं, और पानी से जुड़ी सभी खेल व मनोरंजक गतिविधियों पर सख्त प्रतिबंध लगा दिया गया है।
भीषण बारिश का पूर्वानुमान और ताइवान जलडमरूमध्य में तनाव
मौसम विभाग ने चेतावनी जारी की है कि पूर्वी झेजियांग के कई हिस्सों में अगले कुछ दिनों के भीतर 600 मिलीमीटर से अधिक असाधारण बारिश हो सकती है। इतनी अधिक मात्रा में बारिश होने से पर्वतीय क्षेत्रों में भूस्खलन और निचले इलाकों में जलभराव का अत्यधिक जोखिम उत्पन्न हो गया है। प्राकृतिक खतरे के साथ-साथ इस तूफान ने राजनीतिक तनाव भी पैदा कर दिया है। चीन के समुद्री प्रशासन ने ताइवान जलडमरूमध्य से गुजरने वाले सभी विदेशी और घरेलू जहाजों के लिए विशेष ट्रैफिक कंट्रोल निर्देश जारी किए हैं और उनका पालन अनिवार्य कर दिया है। ताइवान के अधिकारियों ने चीन के इस एकतरफा आदेश पर कड़ा ऐतराज जताते हुए आलोचना की है। इससे यह तूफान केवल एक प्राकृतिक आपदा न रहकर क्षेत्रीय कूटनीतिक विवाद का कारण भी बन गया है।
भारतीय मानसून पर टाइफून डॉल्फिन का अप्रत्यक्ष असर
यद्यपि सुपर टाइफून डॉल्फिन सीधे तौर पर भारतीय भूभाग से नहीं टकराएगा, लेकिन इसका अप्रत्यक्ष प्रभाव भारत के मानसूनी तंत्र पर स्पष्ट रूप से देखने को मिल सकता है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, जब पश्चिमी प्रशांत महासागर में इतना विशाल और शक्तिशाली तूफान विकसित होता है, तो वह आसपास के वायुमंडल से भारी मात्रा में गर्मी और नमी को अपनी ओर खींच लेता है। इस प्रक्रिया के कारण बंगाल की खाड़ी में बनने वाली उन मौसमी प्रणालियों को पर्याप्त नमी नहीं मिल पाती है जो भारत में मानसून की बारिश लाती हैं। नमी की इस कमी के कारण भारत के मध्य और उत्तरी राज्यों में मानसून की गतिविधियां कुछ समय के लिए सुस्त पड़ सकती हैं। इस वजह से इन इलाकों में कुछ दिनों का शुष्क दौर या ड्राई स्पेल आ सकता है, जहां बारिश सामान्य से काफी कम होगी। हालांकि, विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि इसका मतलब भारत में मानसून की समाप्ति नहीं है। जैसे ही टाइफून डॉल्फिन कमजोर होकर समाप्त होगा या आगे बढ़ जाएगा, भारतीय महाद्वीप में मानसूनी हवाएं और बारिश का चक्र पुनः अपनी सामान्य स्थिति में लौट आएगा।



















