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माउंट अनाक क्राकाताऊ में भयानक विस्फोट से इंडोनेशिया में थमा हवाई यातायात, जकार्ता की ओर बढ़ रहा जहरीला धुआंदुनिया
8 सित॰ 2026, 3:33 am (7 दिन पहले)· 4

माउंट अनाक क्राकाताऊ में भयानक विस्फोट से इंडोनेशिया में थमा हवाई यातायात, जकार्ता की ओर बढ़ रहा जहरीला धुआं

सुंडा जलडमरूमध्य में ज्वालामुखी फटने से 4 प्रमुख हवाई अड्डे बंद हो गए हैं, जिससे 1.7 लाख यात्री फंसे हैं और 1,500 से अधिक उड़ानें प्रभावित हुई हैं।

इंडोनेशिया में प्राकृतिक आपदा का एक विनाशकारी रूप सामने आया है, जहां जावा और सुमात्रा द्वीपों के मध्य स्थित अत्यंत खतरनाक माउंट अनाक क्राकाताऊ ज्वालामुखी में एक बार फिर भयानक विस्फोट हो गया है। इस शक्तिशाली विस्फोट के बाद वातावरण में कई किलोमीटर की ऊंचाई तक विषैली राख और घने काले धुएं का साम्राज्य कायम हो गया है। ज्वालामुखी से निकले इस विशाल गुबार के कारण देश के हवाई यातायात पर गंभीर असर पड़ा है और प्रशासन को आपातकालीन स्थिति में 4 प्रमुख हवाई अड्डों पर विमानों का संचालन पूरी तरह रोकने का कड़ा फैसला लेना पड़ा है। उधर सैटेलाइट तस्वीरों से पता चला है कि जहरीली राख का यह विशाल प्रवाह घनी आबादी वाली राजधानी जकार्ता की ओर तेजी से बढ़ रहा है, जिससे लाखों नागरिकों के स्वास्थ्य और सांसों पर सीधा संकट मंडराने लगा है। वीकेंड के समय यात्रा पर निकले लगभग 1,70,000 यात्री अलग-अलग टर्मिनल पर अटके हुए हैं और चारों तरफ अफरा-तफरी का माहौल बना हुआ है।

विस्फोट के बाद 4 प्रमुख हवाई अड्डों पर काम ठप

अनाक क्राकाताऊ ज्वालामुखी से लगातार निकल रही राख और गुबार ने आसमान को पूरी तरह से ढक लिया है, जिसके चलते दृश्यता शून्य के करीब पहुंच गई है। नागरिक उड्डयन सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अधिकारियों ने सोमवार शाम 6 बजे तक 4 बड़े हवाई अड्डों पर उड़ानों का संचालन पूरी तरह स्थगित करने की घोषणा कर दी है। जिन हवाई अड्डों पर कामकाज ठप पड़ा है, उनमें जकार्ता स्थित सुकर्णो-हट्टा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा और हलीम परदानाकुसुमा हवाई अड्डा शामिल हैं। इनके अलावा लाम्पुंग का राडिन इंटेन-II हवाई अड्डा तथा बांडुंग का हुसैन सास्त्रानेगारा हवाई अड्डा भी पूरी तरह से बंद कर दिए गए हैं। हवाई अड्डों का प्रबंधन संभालने वाली सरकारी संस्था अंगकासा पुरा ने स्पष्ट बयान जारी किया है कि जब तक वायुमंडल से राख का खतरा पूरी तरह समाप्त नहीं हो जाता और आसमान साफ नहीं होता, तब तक किसी भी व्यावसायिक अथवा निजी विमान को उड़ान भरने या उतरने की अनुमति बिल्कुल नहीं दी जाएगी।

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1,500 से अधिक उड़ानें प्रभावित और लाखों यात्री हलकान

ज्वालामुखी विस्फोट के बाद पैदा हुई इस अप्रत्याशित आपातकालीन स्थिति के कारण अब तक 1,500 से भी ज्यादा उड़ानें या तो पूरी तरह रद्द कर दी गई हैं या उनके समय में भारी बदलाव किया गया है। छुट्टियों के अवसर पर अपने परिजनों से मिलने या यात्रा पर निकले लगभग 1,70,000 यात्री विभिन्न टर्मिनलों के भीतर फंसे रहने को मजबूर हैं। हवाई अड्डों के प्रस्थान हॉल में यात्रियों की लंबी-लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं, जहां लोग अपनी उड़ानों के दोबारा शुरू होने का घंटों से इंतजार कर रहे हैं। हालांकि धुएं और विषैली राख का घनत्व इतना अधिक है कि एयर ट्रैफिक कंट्रोल नेटवर्क ने सभी प्रकार के उड़ानों को फिलहाल जोखिम से बाहर नहीं माना है, जिसके कारण यात्रियों की परेशानी लगातार बढ़ती ही जा रही है।

जकार्ता की तरफ बढ़ रहे हैं दो विशाल राख के गुबार

इंडोनेशिया की मौसम विज्ञान, जलवायु विज्ञान और भूभौतिकी एजेंसी ने घटनाक्रम पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए एक अत्यंत गंभीर चेतावनी जारी की है। अत्याधुनिक उपग्रहों द्वारा ली गई तस्वीरों के विस्तृत विश्लेषण से यह प्रमाणित हुआ है कि ज्वालामुखी की चोटी से उठे राख के दो बहुत बड़े गुबार सीधे देश की राजधानी जकार्ता की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। सोमवार सुबह 6 बजे तक इस जहरीली राख के जकार्ता के ऊपरी वायुमंडल में प्रवेश करने के स्पष्ट संकेत दर्ज किए गए हैं। जकार्ता इंडोनेशिया का सबसे सघन आबादी वाला महानगरीय क्षेत्र है, और यदि यह विषैला धुआं जमीनी सतह तक पहुंचता है तो आम लोगों के लिए सांस लेना बेहद दूभर हो जाएगा। स्वास्थ्य और विमानन विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यह महीन राख न केवल इंसानी फेफड़ों और श्वसन तंत्र को गंभीर नुकसान पहुंचाती है, बल्कि हवा में उड़ रहे जेट विमानों के इंजनों में घुसकर उन्हें पल भर में जाम भी कर सकती है।

अनाक क्राकाताऊ का खौफनाक इतिहास और 2018 की त्रासदी

जावा और सुमात्रा के बीच सुंडा जलडमरूमध्य क्षेत्र में स्थित माउंट अनाक क्राकाताऊ कोई सामान्य पर्वतीय संरचना नहीं है, बल्कि इसे भूगर्भीय दृष्टि से पृथ्वी के सबसे सक्रिय और विनाशकारी ज्वालामुखियों में गिना जाता है। इस ज्वालामुखी का अतीत अत्यंत खौफनाक घटनाओं और भीषण हादसों से भरा रहा है। पिछले कुछ वर्षों के दौरान इसमें कई बार तीव्र गति के विस्फोट दर्ज किए गए हैं। वर्ष 2018 में हुए एक भयानक विस्फोट के दौरान इस पर्वत का एक विशालकाय हिस्सा ढहकर सीधे समुद्र में जा गिरा था, जिससे सुंडा जलडमरूमध्य में ऊंची और विनाशकारी सुनामी की लहरें उठ खड़ी हुई थीं। उस दुखद हादसे में 400 से अधिक निर्दोष लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी और तटीय इलाकों के सैकड़ों मकान पूरी तरह जमींदोज हो गए थे। वर्तमान विस्फोट के बाद स्थानीय निवासियों के मन में एक बार फिर से उसी पुरानी तबाही की खौफनाक यादें ताजा हो गई हैं।

हालिया महीनों में माउंट सेमेरू और माउंट डुकोनो की तबाही

इंडोनेशिया के भूभाग में रहने वाले नागरिकों के लिए ज्वालामुखियों का सक्रिय होना और फटना कोई नई परिघटना नहीं है, बल्कि वे लगातार ऐसे संकटों का सामना करते रहे हैं। ठीक एक महीने पहले ही इंडोनेशिया के पूर्वी जावा प्रांत में स्थित माउंट सेमेरू ज्वालामुखी अचानक तेज धमाके के साथ फट पड़ा था। उस समय पर्वत शिखर से लगभग 2,000 मीटर ऊपर तक राख का विशाल गुबार फैल गया था, जबकि अत्यधिक गर्म राख, मलबे और पत्थरों का खतरनाक प्रवाह पास की नदी के किनारे 2 किलोमीटर दूर तक पहुंच गया था। उस समय भी बचाव टीमों को तुरंत मोर्चे पर तैनात होना पड़ा था और क्रेटर के आसपास के 5 किलोमीटर के पूरे इलाके को प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित करना पड़ा था।

इसी तरह इसी वर्ष मई महीने के दौरान इंडोनेशिया के उत्तरी मालुकु प्रांत में स्थित माउंट डुकोनो ज्वालामुखी ने भीषण तबाही मचाई थी। 8 मई की सुबह लगभग 7:40 बजे इस पहाड़ के भीतर एक बहुत ही जोरदार भूगर्भीय धमाका हुआ, जिसके बाद करीब 10 किलोमीटर की विशाल ऊंचाई तक काला जहरीला धुआं और राख वायुमंडल में फैल गए। उस दर्दनाक घटना में 3 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई थी। इसके बाद 17 मई को माउंट डुकोनो में एक बार फिर से जोरदार विस्फोट हुआ, जिससे चोटी से 5,000 मीटर ऊपर तक राख का विशाल गुबार उठा। भारी बारिश के समय ज्वालामुखी के गर्म कीचड़ के नीचे की ओर बहने के खतरे को देखते हुए राहत और बचाव टीमों ने क्रेटर के 4 किलोमीटर के दायरे को पूरी तरह से खाली करा लिया था।

रिंग ऑफ फायर में बसा होने के कारण लगातार खतरा

वैज्ञानिक दृष्टि से यह प्रश्न बार-बार उठता है कि आखिर इंडोनेशिया के द्वीपों पर ही लगातार इतने भयानक भूगर्भीय धमाके क्यों होते रहते हैं। इसका मूल कारण इस देश की भौगोलिक स्थिति है, जो प्रशांत महासागर के उस अत्यंत संवेदनशील हिस्से में पड़ता है जिसे दुनिया भर में 'रिंग ऑफ फायर' के नाम से जाना जाता है। इस विशिष्ट क्षेत्र में पृथ्वी की आंतरिक टेक्टोनिक प्लेट्स आपस में टकराती और खिसकती रहती हैं, जिसके परिणामस्वरूप तीव्र भूकंपीय झटके आते हैं और ज्वालामुखियों का फटना एक सामान्य बात बन जाती है। अकेले इंडोनेशियाई द्वीप समूह में 120 से अधिक सक्रिय ज्वालामुखी मौजूद हैं, जिसके कारण इस पूरे देश को दुनिया का सबसे अत्यधिक ज्वालामुखी-प्रभावित क्षेत्र माना जाता है और यहां के करोड़ों निवासी सदैव एक अनिश्चित प्राकृतिक खतरे के साए में जीवन व्यतीत करते हैं।

प्रशासन का अलर्ट और नागरिकों के लिए सुरक्षा निर्देश

अनाक क्राकाताऊ में हुए हालिया विस्फोट और उससे उत्पन्न विषैले धुएं ने वर्तमान में पूरे इंडोनेशिया की व्यवस्था को हिलाकर रख दिया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सभी राष्ट्रीय और प्रांतीय राहत व बचाव एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। आपदा प्रबंधन अधिकारियों ने आम जनता और पर्यटकों के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं कि वे किसी भी परिस्थिति में क्रेटर के नजदीकी इलाकों की तरफ न जाएं। इसके अलावा, घरों से बाहर निकलते समय उच्च गुणवत्ता वाले फेस मास्क का अनिवार्य उपयोग करने की हिदायत दी गई है। मौसम विज्ञानियों का आकलन है कि यदि हवा का बहाव इसी प्रकार जकार्ता की तरफ बना रहा, तो आने वाले दिनों में यह प्राकृतिक आपदा एक बड़े मानवीय और स्वास्थ्य संकट का रूप धारण कर सकती है।

सवाल-जवाब

माउंट अनाक क्राकाताऊ में विस्फोट कब हुआ और इसका क्या प्रभाव पड़ा है?
इंडोनेशिया के माउंट अनाक क्राकाताऊ ज्वालामुखी में अचानक भयंकर विस्फोट हुआ, जिसके बाद आसमान में जहरीला धुआं और राख फैल गई। इसके कारण 4 प्रमुख हवाई अड्डे बंद कर दिए गए हैं और 1.5 हजार से अधिक उड़ानें रद्द हो गई हैं।
इस आपदा से कितने यात्री प्रभावित हुए हैं?
हवाई अड्डों पर काम ठप होने के कारण लगभग 1.7 लाख यात्री अलग-अलग टर्मिनलों पर फंसे हुए हैं।
कौन-कौन से हवाई अड्डे बंद किए गए हैं?
जकार्ता के सुकर्णो-हट्टा और हलीम परदानाकुसुमा, लाम्पुंग का राडिन इंटेन-II तथा बांडुंग का हुसैन सास्त्रानेगारा हवाई अड्डा सोमवार शाम 6 बजे तक बंद कर दिए गए हैं।
जकार्ता शहर को क्या खतरा है?
सैटेलाइट तस्वीरों के अनुसार ज्वालामुखी की जहरीली राख का विशाल गुबार सीधे जकार्ता की ओर बढ़ रहा है, जिससे सांस लेने में तकलीफ और स्वास्थ्य संकट का खतरा पैदा हो गया है।
अनाक क्राकाताऊ का पिछला इतिहास क्या रहा है?
साल 2018 में अनाक क्राकाताऊ में हुए भारी विस्फोट के कारण ज्वालामुखी का हिस्सा ढह गया था, जिससे आई सुनामी में 400 से ज्यादा लोगों की जान गई थी।
इंडोनेशिया में बार-बार ज्वालामुखी क्यों फटते हैं?
इंडोनेशिया प्रशांत महासागर के 'रिंग ऑफ फायर' क्षेत्र में स्थित है, जहां टेक्टोनिक प्लेटों के टकराने से भूकंप और ज्वालामुखी विस्फोट लगातार होते रहते हैं। यहां 120 से ज्यादा सक्रिय ज्वालामुखी हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Sophie Laurent@sophie-laurent·6 दिन पहले

माउंट अनाक क्राकाताऊ का यह तीव्र विस्फोट केवल एक स्थानीय प्राकृतिक आपदा नहीं है, बल्कि यह दक्षिण-पूर्व एशिया में आपूर्ति श्रृंखला, क्षेत्रीय पर्यटन और आर्थिक स्थिरता के लिए एक गंभीर भू-राजनीतिक चुनौती पेश करता है। जकार्ता की ओर बढ़ते जहरीले धुएं से स्वास्थ्य संकट गहराने और प्रमुख हवाई अड्डों के अनिश्चितकाल के लिए बंद होने से प्रशासनिक तंत्र पर भारी दबाव बढ़ गया है। यदि यह स्थिति लंबी खिंचती है, तो इसका असर वैश्विक विमानन और क्षेत्रीय व्यापारिक समझौतों पर भी पड़ना तय है, जिसके लिए आपातकालीन नीतियों में तुरंत बदलाव की आवश्यकता होगी।

Rohan Verma@rohan-verma·6 दिन पहले

माउंट अनाक क्राकाताऊ में हुआ यह विनाशकारी विस्फोट एक गंभीर वैश्विक चिंता का विषय है। सुंडा जलडमरूमध्य की इस घटना ने स्पष्ट कर दिया है कि किस प्रकार प्राकृतिक आपदाएं चंद घंटों में परिवहन नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त कर सकती हैं। चार प्रमुख हवाई अड्डों का बंद होना और डेढ़ लाख से अधिक यात्रियों का फंसना प्रशासनिक और आर्थिक दोनों स्तर पर एक बड़ा संकट है। विशेष रूप से, जकार्ता की ओर बढ़ रही जहरीली राख का यह विशाल गुबार घनी आबादी वाले इस क्षेत्र में जनस्वास्थ्य के लिए एक बड़ा खतरा पैदा कर रहा है। आने वाले घंटों में वायु गुणवत्ता और दृश्यता की स्थिति ही तय करेगी कि विमानन सेवाओं की बहाली कब संभव हो पाएगी।

Ayesha Siddiqui@ayesha-siddiqui·6 दिन पहले

रोहन ने जिस प्रकार परिवहन तंत्र और जकार्ता पर मंडराते स्वास्थ्य संकट को रेखांकित किया है, वह सामयिक है। प्रशांत महासागर की 'रिंग ऑफ फायर' पर स्थित इंडोनेशिया जैसे द्वीप राष्ट्रों के लिए ऐसी भौगोलिक आपदाएं केवल तात्कालिक परिवहन ठप होने तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि इनकी आपूर्ति श्रृंखला और क्षेत्रीय आर्थिक स्थिरता पर भी दीर्घकालिक मार पड़ती है। राख के बाद अब जकार्ता के आसमान में एयरस्पॉट सुरक्षा और वायु गुणवत्ता की निगरानी आने वाले दिनों में प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी।

Yuki Tanaka@yuki-tanaka·6 दिन पहले

माउंट अनाक क्राकाताऊ का यह विस्फोट न केवल इंडोनेशिया के घरेलू परिवहन और नागरिक उड्डयन को बाधित कर रहा है, बल्कि जकार्ता की ओर बढ़ते जहरीले धुएं के कारण क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था और जनस्वास्थ्य पर भी गंभीर भू-राजनीतिक व मानवीय संकट खड़ा कर रहा है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·6 दिन पहले

यह आपदा केवल परिवहन व्यवस्था ठप करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे सार्वजनिक सुरक्षा और आपातकालीन प्रबंधन पर बड़ा सवाल खड़ा होता है। जकार्ता की ओर बढ़ती विषैली राख से नागरिकों के स्वास्थ्य पर मंडराते खतरे को देखते हुए आपदा प्रतिक्रिया बलों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है। कानून-व्यवस्था और प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि फंसे हुए यात्रियों की सुरक्षा के साथ-साथ राजधानी में स्वास्थ्य आपातकाल से निपटने के लिए कड़े कदम उठाए जाएं।

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