पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में पिछले काफी समय से जन-विरोध की आग सुलग रही है। वहां की जनता ने अब अपनी मांगों को लेकर आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है, जिससे पाकिस्तानी हुकूमत और वहां के सुरक्षा बलों की मुश्किलें लगातार बढ़ रही हैं। सड़कों पर उतरने वाले प्रदर्शनकारियों की संख्या हर गुजरते दिन के साथ बढ़ती जा रही है, जिसे नियंत्रित करना प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो रहा है।
लीक दस्तावेज ने खोले राज
इस बीच सोशल मीडिया पर एक सरकारी दस्तावेज तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने स्थिति की गंभीरता को जगजाहिर कर दिया है। इस पत्र से साफ पता चलता है कि पीओके के गृह विभाग ने इस्लामाबाद के सामने घुटने टेक दिए हैं और वहां शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारी संख्या में अतिरिक्त सैन्य बल की मांग की है। आधिकारिक दस्तावेज के अनुसार, केंद्र सरकार से तुरंत 4 हजार अतिरिक्त फेडरल कॉन्स्टेबुलरी जवान और पाकिस्तान रेंजर्स की 7 पूरी विंग भेजने का आग्रह किया गया है।
हथियारों के साथ तैयारी
प्रशासन की इस मांग में सुरक्षा बलों के लिए विशेष निर्देश दिए गए हैं। भेजे जाने वाले जवानों में से 50 फीसदी को घातक हथियारों और भारी गोला-बारूद के साथ आने को कहा गया है, जबकि शेष आधे जवानों को एंटी-रायट उपकरणों से लैस रहने का निर्देश दिया गया है। ऐसा प्रतीत होता है कि पाकिस्तानी प्रशासन इस जन-आंदोलन को बलपूर्वक दबाने की पूरी कोशिश में जुटा है।
सुरक्षा बलों को भारी नुकसान
आठ जुलाई 2026 की तारीख वाला यह दस्तावेज स्वीकार करता है कि अवामी एक्शन कमेटी के नेतृत्व में चल रहे इस विरोध ने प्रशासन की नींव हिला दी है। इलाके में कानून-व्यवस्था की स्थिति पूरी तरह से बिगड़ चुकी है। दस्तावेज में हैरान करने वाला दावा किया गया है कि इस झड़प में अब तक सुरक्षा बलों के 4 जवान मारे जा चुके हैं और 174 जवान गंभीर रूप से घायल बताए गए हैं।
स्थानीय पुलिस और पाकिस्तान रेंजर्स में टकराव
पीओके की स्थानीय पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसी पाकिस्तान रेंजर्स के बीच भी दूरियां बहुत ज्यादा बढ़ गई हैं। ताजा जानकारी के अनुसार, स्थानीय पुलिस अब आंदोलनकारियों पर कार्रवाई करने के लिए पाकिस्तान रेंजर्स के आदेशों को मानने से इनकार कर रही है। बल के भीतर पनपे इस भारी विरोध और भरोसे की कमी ने सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक जटिल बना दिया है। इस आंतरिक खींचतान का बुरा असर साझा सुरक्षा अभियानों पर पड़ रहा है, और दोनों सुरक्षा बलों का आपस में भिड़ना पाकिस्तानी हुकूमत के लिए एक नई मुसीबत बन गया है।











