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फांसी पर चढ़ते डाकू ने भीड़ में फेंका रहस्यमय नक्शा, 305 साल बाद भी सेशेल्स में दफन है 1170 करोड़ का खजानादुनिया
29 जून 2026, 10:33 am (41 दिन पहले)· 3

फांसी पर चढ़ते डाकू ने भीड़ में फेंका रहस्यमय नक्शा, 305 साल बाद भी सेशेल्स में दफन है 1170 करोड़ का खजाना

18वीं सदी के फ्रांसीसी समुद्री डाकू ओलिवियर लेवासेर ने सेशेल्स के माहे द्वीप पर 1170 करोड़ रुपये का खजाना छिपाया और 1730 में फांसी से पहले एक कोडेड नक्शा भीड़ में फेंका। 305 साल बाद भी न खजाना मिला, न वह 17 पंक्तियों वाला क्रिप्टोग्राम सुलझा।

हिंद महासागर में बसे सेशेल्स को दुनिया के सबसे खूबसूरत द्वीप देशों में गिना जाता है, लेकिन इस छोटे से देश की असली पहचान इसके नीले पानी और सफेद रेत से परे है। यहां की धरती के नीचे एक ऐसा खजाना दफन बताया जाता है जिसकी कीमत करीब 100 मिलियन पाउंड यानि लगभग 1170 करोड़ रुपये है। इसे दुनिया का सबसे बड़ा समुद्री डाकू खजाना माना जाता है और इसे होली ग्रेल ऑफ ट्रेजर का दर्जा दिया गया है। सैकड़ों साल गुजर चुके हैं, हजारों लोग इसे ढूंढ चुके हैं, पर यह आज भी जमीन के नीचे दबा है। यह कहानी सेशेल्स और रियूनियन आइलैंड दोनों जगहों पर सदियों से लोगों के दिलों में रोमांच जगाती आई है।

1721 की वह लूट जिसने किंवदंती को जन्म दिया

18वीं सदी के मशहूर फ्रांसीसी समुद्री डाकू ओलिवियर लेवासेर की कहानी 1716 में शुरू होती है। तेजी से हमला बोलने की अपनी खास शैली के लिए वह जाना जाता था। 1721 तक उसकी डकैतियां अपने चरम पर पहुंच चुकी थीं। उस साल उसने और उसके 750 साथियों ने पुर्तगाली जहाज नोसा सेन्होरा दो काबो पर धावा बोला। यह जहाज उस वक्त ब्रिटिश झंडे के नीचे रियूनियन आइलैंड के बंदरगाह में लंगर डाले खड़ा था। डाकुओं ने जहाज पर कब्जा जमाया और पूरे जहाजी दल को मौत के घाट उतार दिया।

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जब लेवासेर के आदमियों ने जहाज की तलाशी ली, तो उनकी आंखें चौंधिया गईं। वह जहाज दरअसल एक तैरता हुआ खजाना था। उसमें सोने-चांदी की छड़ें, अनकट डायमंड, कीमती पत्थर, सोने के गिन्नी, चर्च की सोने-चांदी की प्लेट्स, गॉबलेट्स और अनगिनत अनमोल चीजें भरी हुई थीं। यह लूट इतनी विशाल थी कि बांटने के लिए सबको मेडागास्कर ले जाया गया। हर साधारण डाकू को 42 डायमंड और 5000 सोने के गिन्नी मिले। अफसरों को इससे ज्यादा हिस्सा दिया गया। सबसे बड़ा और सबसे कीमती हिस्सा लेवासेर ने खुद अपने पास रख लिया।

माहे द्वीप की मिट्टी में दफन हुआ राज

लेवासेर ने अपना खजाना सेशेल्स के माहे द्वीप पर छिपाने का फैसला किया। उसने दल को 20-20 के समूहों में बांटा। पहले खजाने को एक गुफा में रखा गया। बाद में जब इसे असली जगह दफनाया गया, तब केवल चुनी हुई टीम वहां थी। काम पूरा होते ही उन सभी को मार दिया गया ताकि राज कभी किसी की जुबान पर न आ सके। इस तरह पूरी दुनिया में बस एक ही शख्स जानता था कि खजाना कहां है और वह खुद लेवासेर था।

फांसी के तख्ते पर छोड़ा रहस्यमय क्रिप्टोग्राम

1730 में जब लेवासेर को पकड़कर फांसी दी जा रही थी, तब उसने भीड़ में अपने पुराने साथियों के चेहरे पहचाने। मौत से कुछ पल पहले उसने एक पुराना चर्मपत्र हवा में उछाला और चिल्लाया, "मेरा खजाना उस व्यक्ति को जो इसे समझ सके।" वह चर्मपत्र एक क्रिप्टोग्राम था जिसमें 17 रहस्यमय पंक्तियां लिखी थीं। ब्रिटिश म्यूज़ियम ने पुष्टि की कि यह असली 18वीं सदी का दस्तावेज है। लेवासेर ग्रीक और लैटिन का जानकार था और मेसोनिक प्रतीकों की गहरी समझ रखता था। उसने जो कोड बनाया, वह इतना पेचीदा था कि 305 साल बाद भी कोई उसे पूरी तरह नहीं सुलझा पाया।

पिता की अधूरी तलाश को बेटे ने थामे रखा

इस खजाने की खोज में दो लोगों ने अपनी पूरी जिंदगी लगा दी। रेजिनाल्ड हर्बर्ट क्रूज़-विल्किंस को स्थानीय लोग 'ट्रेजर मैन' कहते थे। उन्होंने लगातार 27 साल तक इस खजाने की खोज में बिताए। 1977 में उनकी मृत्यु के बाद उनके बेटे जॉन क्रूज़-विल्किंस ने यह जिम्मेदारी संभाली। जॉन बताते हैं कि उनके पिता ने ग्रीक, हिब्रू, ज्योतिष, खगोल विज्ञान, पौराणिक कथाओं और गुप्त विद्या का उपयोग करके उस क्रिप्टोग्राम का कोड तोड़ा। उनके निष्कर्ष के अनुसार खजाना हेपकेलिस की पहेली के आधार पर दफन किया गया है। खोज की संभावित जगह माहे द्वीप का बेल ओम्ब्रे इलाका है, जहां नीला समुद्र, घनी हरी वनस्पति और विशाल ग्रेनाइट चट्टानें एक अलग ही नजारा पेश करती हैं।

जब जॉन उस जगह की ओर इशारा करते हैं, तो उनकी आंखों में एक अजीब-सी रोशनी आ जाती है। वह किसी रोमांचक कहानी के नायक की तरह नक्शा और थैला लिए पहेली सुलझाने में डूबे रहते हैं। माहे एक छोटा द्वीप है जहां बच्चे-बच्चे को इस किंवदंती की जानकारी है। टैक्सी चालक हो या गेस्ट हाउस के मालिक, सब इसी खजाने की चर्चा करते हैं। कई स्थानीय लोग जॉन को पागल समझते हैं, पर वह रुकने को तैयार नहीं हैं। उनके लिए यह तलाश सिर्फ दौलत की नहीं है, यह उनके पिता का अधूरा सपना है, एक गहरा जुनून है और एक ऐसी उम्मीद है जो अब भी जिंदा है।

आज भी कोई नहीं जानता कि लेवासेर का वह खजाना सच में माहे की मिट्टी के नीचे दफन है या नहीं। पर उसका रहस्यमय क्रिप्टोग्राम, फांसी पर कहे आखिरी शब्द और क्रूज़-विल्किंस पिता-पुत्र की अथक लगन हजारों लोगों को आज भी इस रहस्य की ओर खींचती है। हो सकता है एक दिन कोई इस पहेली का अंतिम हल खोज ले। सेशेल्स के शांत द्वीपों पर यह सवाल सदियों से गूंज रहा है कि क्या वाकई वहां 1170 करोड़ रुपये का खजाना बस किसी के मिलने का इंतजार कर रहा है।

सवाल-जवाब

ओलिवियर लेवासेर कौन था?
वह 18वीं सदी का मशहूर फ्रांसीसी समुद्री डाकू था जिसकी डकैती 1716 में शुरू हुई और जो तेजी से हमला बोलने की अपनी शैली के लिए जाना जाता था।
सेशेल्स में दफन इस खजाने की कीमत कितनी बताई जाती है?
इस खजाने की कीमत करीब 100 मिलियन पाउंड यानि लगभग 1170 करोड़ रुपये आंकी जाती है और इसे दुनिया का सबसे बड़ा समुद्री डाकू खजाना माना जाता है।
लेवासेर ने 1721 में किस जहाज को लूटा था?
उसने और उसके 750 साथियों ने पुर्तगाली जहाज नोसा सेन्होरा दो काबो को लूटा जो ब्रिटिश झंडे के नीचे रियूनियन आइलैंड के बंदरगाह में खड़ा था।
उस लूट का माल कैसे बांटा गया?
लूट मेडागास्कर ले जाकर बांटी गई। हर साधारण डाकू को 42 डायमंड और 5000 सोने के गिन्नी मिले, अफसरों को ज्यादा हिस्सा मिला और सबसे बड़ा हिस्सा लेवासेर ने खुद रख लिया।
क्रिप्टोग्राम क्या है और इसमें कितनी पंक्तियां हैं?
यह 17 पंक्तियों वाला एक कोडेड चर्मपत्र है जिसे लेवासेर ने 1730 में फांसी पर चढ़ते वक्त भीड़ में फेंका था। ब्रिटिश म्यूज़ियम ने पुष्टि की है कि यह असली 18वीं सदी का दस्तावेज है।
खजाना कहां दफन बताया जाता है?
रेजिनाल्ड हर्बर्ट क्रूज़-विल्किंस के शोध के अनुसार यह माहे द्वीप के बेल ओम्ब्रे इलाके में दफन है जहां नीला समुद्र, वनस्पति और विशाल ग्रेनाइट चट्टानें हैं।
रेजिनाल्ड और जॉन क्रूज़-विल्किंस कौन हैं?
रेजिनाल्ड हर्बर्ट क्रूज़-विल्किंस ने 27 साल तक खजाने की खोज की और 1977 में उनके निधन के बाद बेटे जॉन ने यह तलाश जारी रखी।
क्या 305 साल में यह खजाना कभी किसी को मिला?
नहीं, 305 से ज्यादा साल बीत जाने के बाद भी यह खजाना किसी को नहीं मिला है और यह रहस्य आज भी पूरी तरह अनसुलझा है।
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