बलोचिस्तान में सक्रिय सशस्त्र संघर्ष के भीतर सांगठनिक संरचना में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। बलोचिस्तान लिबरेशन फ्रंट यानी बीएलएफ ने पहली बार पूरी तरह महिला लड़ाकों पर आधारित एक अलग सैन्य इकाई तैयार करने की घोषणा की है। इस विशेष विंग को करीमा आर्म्ड असॉल्ट डिवीजन (केएएडी) नाम दिया गया है। संगठन ने औपचारिक एलान के साथ यह भी दावा किया है कि इस नई डिवीजन ने अपनी पहली जमीनी सैन्य कार्रवाई को सफलतापूर्वक अंजाम दे दिया है।
तुरबत के जोस्क में पहले ऑपरेशन का दावा
बीएलएफ के प्रवक्ता मेजर ग्वाहराम बलोच के अनुसार, केएएडी ने अपना पहला सुनियोजित सैन्य अभियान 22 सितंबर 2026 को बलोचिस्तान के तुरबत स्थित जोस्क इलाके में पूरा किया। इस कार्रवाई के तहत चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (सीपीईसी) हाईवे के निकट से गुजर रहे पाकिस्तानी सेना के एक्शन टास्क फोर्स के काफिले को निशाना बनाया गया। संगठन के बयान में कहा गया है कि यह कोई अचानक की गई गोलीबारी नहीं थी, बल्कि पहले से तैयार और बहुस्तरीय रणनीति के तहत घात लगाकर किया गया हमला था।
संगठन ने इस हमले के परिणाम साझा करते हुए दावा किया है कि कार्रवाई में पाकिस्तानी सेना के कई जवान हताहत और घायल हुए हैं, जबकि उनके कई सैन्य वाहनों को भारी नुकसान पहुंचा है। प्रवक्ता मेजर ग्वाहराम बलोच ने स्पष्ट किया कि जोस्क की यह कार्रवाई डिवीजन की पहली सक्रिय शुरुआत है। उन्होंने बताया कि इस पूरे ऑपरेशन का विस्तृत ब्योरा जल्द जारी किया जाएगा, जिसमें विरोधी सुरक्षा बलों को हुए जान-माल के नुकसान, हथियारों की स्थिति और केएएडी के आगामी सैन्य लक्ष्यों की रूपरेखा स्पष्ट की जाएगी।
करीमा बलोच के नाम पर समर्पित नई लड़ाकू इकाई
केएएडी यानी करीमा आर्म्ड असॉल्ट डिवीजन को बीएलएफ के भीतर एक नियमित महिला सशस्त्र विंग के तौर पर स्थापित किया गया है। संगठन के मुताबिक, इस इकाई के गठन का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को सीधे युद्धक और सामरिक भूमिकाओं में शामिल करना है। इस पूरी डिवीजन का नाम बलोच अलगाववादी आंदोलन का प्रमुख चेहरा रहीं करीमा बलोच की स्मृति में रखा गया है।
इस औपचारिक घोषणा के साथ संगठन ने इस नई डिवीजन की एक तस्वीर भी सार्वजनिक की है। इस तस्वीर में पूरी वर्दी और हथियारों के साथ महिला लड़ाकों को दिखाया गया है, जिसके साथ युद्ध को लेकर कड़े और आक्रामक संदेश भी प्रसारित किए गए हैं। यह घटनाक्रम ऐसे दौर में सामने आया है जब क्षेत्र में सक्रिय विद्रोही गुटों के भीतर महिला सदस्यों की भागीदारी केवल सहायता या प्रचार तक सीमित न रहकर सीधे मोर्चे पर पहुंच चुकी है।
राजनीतिक प्रचार से सीधे सशस्त्र मोर्चे तक का सफर
बलोच विद्रोही आंदोलनों में महिलाओं की मौजूदगी ऐतिहासिक रूप से रही है, लेकिन हाल के वर्षों में उनकी कार्यप्रणाली में स्पष्ट बुनियादी बदलाव आया है। पूर्व में जहां महिला कार्यकर्ता मुख्य रूप से राजनीतिक लामबंदी, विरोध प्रदर्शनों, रैलियों और सांगठनिक समर्थन तक सीमित थीं, वहीं अब वे आत्मघाती दस्तों और हथियारबंद हमलों की कमान संभाल रही हैं।
इस बदलाव का सबसे चर्चित मामला अप्रैल 2022 में सामने आया था, जब शारी बलोच ने कराची यूनिवर्सिटी के कन्फ्यूशियस इंस्टीट्यूट के गेट पर आत्मघाती हमला किया था। उस विस्फोट में तीन चीनी शिक्षकों और उनके पाकिस्तानी चालक की मौत हो गई थी, जिसकी जिम्मेदारी बलोच लिबरेशन आर्मी यानी बीएलए के मजीद ब्रिगेड ने ली थी। इसके बाद से विभिन्न अलगाववादी संगठनों में महिला हमलावरों के सीधे अभियानों की संख्या में लगातार इजाफा दर्ज किया गया है।
पिछले अभियानों में महिला लड़ाकों की भूमिका
कराची की घटना के बाद कई अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में भी महिलाओं द्वारा किए गए हमलों के विवरण दर्ज हुए हैं। जून 2023 में तुरबत के भीतर एक सैन्य काफिले को निशाना बनाने वाले आत्मघाती विस्फोट में एक महिला हमलावर की संलिप्तता सामने आई थी। इसके बाद अगस्त 2024 में बेला क्षेत्र में स्थित फ्रंटियर कोर की एक महत्वपूर्ण सुविधा को विस्फोटक लदे वाहन के जरिए निशाना बनाया गया था।
सशस्त्र अभियानों का यह सिलसिला आगे भी जारी रहा। मार्च 2025 में कलात इलाके में एक अर्धसैनिक काफिले पर हुए आत्मघाती हमले में भी महिला हमलावर की भूमिका दर्ज की गई थी। इसके कुछ ही महीनों बाद, नवंबर 2025 में बीएलएफ से जुड़ी बताई गई जरीना रफीक ने नोखुंडी में फ्रंटियर कोर की एक व्यवस्था को विस्फोटक से भरे वाहन से निशाना बनाया था। इसके अतिरिक्त, बीएलए ने जनवरी और फरवरी 2026 के दौरान संचालित अपने व्यापक सैन्य अभियान 'ऑपरेशन हेरोफ 2.0' में भी महिला लड़ाकों की सीधी भागीदारी को सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया था।
संगठनात्मक ढांचा और सामरिक प्रभाव
सशस्त्र अभियानों में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को देखते हुए विद्रोही संगठनों ने इसे औपचारिक सैन्य इकाइयों का रूप देना शुरू कर दिया है। मई 2026 में बीएलए ने अपनी अलग महिला विंग बनाने का एलान किया था और शैनाज बलोच को इस विंग की कमांडर नियुक्त किया था। अब बीएलएफ द्वारा करीमा आर्म्ड असॉल्ट डिवीजन की स्थापना इसी कड़ी का अगला विस्तार है, जिसके जरिए महिलाओं की युद्धक भागीदारी को एक संगठित और स्थायी सैन्य ढांचे में तब्दील किया जा रहा है।
केएएडी की पहली कार्रवाई के लिए चुना गया भौगोलिक स्थान भी विशेष सामरिक महत्व रखता है। तुरबत का जोस्क इलाका सीधे सीपीईसी राजमार्ग से जुड़ा हुआ है। बलोचिस्तान प्रांत चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे की रीढ़ माना जाता है, क्योंकि ग्वादर बंदरगाह और इससे जुड़ी कई बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाएं इसी क्षेत्र में स्थित हैं। बीएलएफ और बीएलए जैसे प्रमुख संगठन लंबे समय से पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के साथ-साथ चीनी परियोजनाओं, उनके कर्मचारियों और आर्थिक हितों को निशाना बनाते आ रहे हैं। नई महिला डिवीजन की यह शुरुआत इस टकराव को एक नए और जटिल दौर में ले जाती दिख रही है।



















