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सिडनी में 16 वर्षीय किशोरी की दुखद मौत के बाद खतरनाक 'सेक्सुअल स्ट्रैंगुलेशन' ट्रेंड को लेकर विशेषज्ञों ने चेतायादुनिया
29 अग॰ 2026, 1:59 am (17 दिन पहले)· 3

सिडनी में 16 वर्षीय किशोरी की दुखद मौत के बाद खतरनाक 'सेक्सुअल स्ट्रैंगुलेशन' ट्रेंड को लेकर विशेषज्ञों ने चेताया

ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में संबंध बनाने के दौरान सांस रोकने की खतरनाक प्रथा से 16 साल की लड़की की जान चली गई, जिससे ऑनलाइन हिंसक सामग्री और युवाओं में फैलते जानलेवा ट्रेंड को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

ऑस्ट्रेलिया के सिडनी शहर से एक बेहद स्तब्ध कर देने वाली घटना सामने आई है, जहां 16 साल की एक नाबालिग लड़की की संदिग्ध परिस्थितियों में सांस घुटने से मौत हो गई। सिडनी के नॉर्दर्न बीचेस क्षेत्र में यह किशोरी अचानक अचेत अवस्था में पाई गई थी। हालत गंभीर होने पर उसे तत्काल एयरलिफ्ट करके अस्पताल के गहन चिकित्सा कक्ष (आईसीयू) में भर्ती कराया गया, परंतु चिकित्सकों के तमाम अथक प्रयासों के बाद भी उसकी जान नहीं बचाई जा सकी। स्थानीय पुलिस इस पूरे मामले की गहनता से तफ्तीश कर रही है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि संबंध बनाने के दौरान गले पर दबाव बनाने और सांस रोकने के घातक ट्रेंड 'सेक्सुअल स्ट्रैंगुलेशन' के कारण किशोरी का दम घुट गया था, जिससे वह बेहोश हो गई और अंततः उसकी मृत्यु हो गई।

स्वास्थ्य जोखिम और दिमाग पर होने वाला जानलेवा असर

यह घटना केवल एक आकस्मिक हादसा नहीं है, बल्कि यह उस जानलेवा अभ्यास की ओर इशारा करती है जो युवाओं के बीच तेजी से पांव पसार रहा है। ऑस्ट्रेलिया के स्वास्थ्य और संबंध मामलों के जानकार लंबे समय से चेतावनी देते आ रहे हैं कि अंतरंग पलों में पार्टनर की गर्दन दबाने या सांस रोकने का चलन बहुत खतरनाक मोड़ ले चुका है। कई युवा इंटरनेट और डिजिटल मीडिया पर देखकर इसे एक सामान्य या रोमांचक गतिविधि समझ लेते हैं, जबकि चिकित्सा विज्ञान इसे सीधे तौर पर जीवन के लिए बड़ा खतरा मानता है।

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चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, जब मानव गर्दन पर बाहर से अत्यधिक दबाव डाला जाता है, तो मस्तिष्क तक पहुंचने वाले रक्त और ऑक्सीजन का प्रवाह महज कुछ ही सेकंड में पूरी तरह बाधित हो जाता है। यदि ऑक्सीजन की आपूर्ति रुक जाए, तो शरीर के बाहरी हिस्से पर भले ही कोई चोट का निशान न दिखाई दे, लेकिन आंतरिक स्तर पर गंभीर क्षति होने लगती है। मस्तिष्क की कोशिकाएं तेजी से नष्ट होने लगती हैं, जिससे व्यक्ति को असहनीय सिरदर्द की समस्या हो सकती है। इसके अलावा, व्यक्ति अपनी स्मरण शक्ति हमेशा के लिए खो सकता है और स्थायी दिमागी क्षति का शिकार हो सकता है। यदि मस्तिष्क को कुछ मिनटों तक ऑक्सीजन न मिले, तो व्यक्ति की तत्काल मृत्यु हो जाती है।

हिंसक सामग्री का असर और एक्टिविस्ट का हमला

इस दुखद घटना के बाद पूरे ऑस्ट्रेलिया में सुरक्षा और डिजिटल सामग्री के प्रभाव को लेकर व्यापक बहस छिड़ गई है। सहमति और सुरक्षित यौन शिक्षा के क्षेत्र में काम करने वाली 28 वर्षीय सामाजिक कार्यकर्ता और 'टीच अस कंसेंट' संस्था की संस्थापक चानेल कॉन्टोस ने इस त्रासदी के लिए इंटरनेट पर मौजूद हिंसक कंटेंट को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा, "इस मासूम की जान बचाई जा सकती थी, और वयस्क सामग्री बनाने वाली कंपनियां युवाओं की जान जोखिम में डालने के लिए जिम्मेदार हैं।"

चानेल कॉन्टोस का मानना है कि वयस्क फिल्मों और डिजिटल प्लेटफॉर्मों पर महिलाओं के साथ हिंसा, थप्पड़ मारना और गला घोंटने जैसे कृत्यों को सामान्य मनोरंजन के रूप में पेश किया जा रहा है। यह सोच युवाओं की मानसिकता को बिगाड़ रही है। उन्होंने सचेत किया कि यदि इस पर रोक नहीं लगाई गई, तो ऐसी दुखद घटनाएं रुकेंगी नहीं। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2021 में चानेल कॉन्टोस ने ऑस्ट्रेलियाई विद्यालयों में छात्राओं के साथ होने वाले यौन दुर्व्यवहार के विरुद्ध एक बड़ा राष्ट्रव्यापी अभियान चलाया था। उनके उस आंदोलन के दबाव में आकर सरकार को यौन शिक्षा के ढांचे और नियमों में कड़े नीतिगत बदलाव करने पड़े थे।

'सुरक्षित चोकिंग' के भ्रम पर यूनिवर्सिटी की रिपोर्ट

इंटरनेट और सोशल मीडिया के दौर में एक बड़ा भ्रम यह फैलाया जाता है कि यदि सावधानी बरती जाए तो गर्दन दबाना सुरक्षित हो सकता है। हालांकि, विशेषज्ञों और चानेल कॉन्टोस ने इस धारणा को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। उनका स्पष्ट कहना है कि गर्दन दबाने का कोई भी तरीका कभी भी सुरक्षित नहीं हो सकता। युवा अक्सर सोचते हैं कि वे इस जोखिम को नियंत्रित कर लेंगे, लेकिन शरीर और मस्तिष्क पर इसका घातक प्रभाव नियंत्रण से बाहर हो जाता है।

इस खतरे की पुष्टि शैक्षणिक अध्ययनों से भी होती है। वर्ष 2024 में मेलबर्न यूनिवर्सिटी और क्वींसलैंड यूनिवर्सिटी द्वारा संयुक्त रूप से 4,700 युवाओं पर एक विस्तृत सर्वेक्षण किया गया था। उस शोध के निष्कर्ष बेहद चौंकाने वाले हैं

  • 57 प्रतिशत युवाओं की भागीदारी: 18 से 35 वर्ष की आयु वर्ग के 57 प्रतिशत ऑस्ट्रेलियाई युवाओं ने स्वीकार किया कि उन्होंने अंतरंग संबंधों के दौरान कम से कम एक बार गला दबाने का अनुभव किया था या अपने साथी के साथ ऐसा किया था।
  • शुरुआती उम्र का आंकड़ा: अध्ययन में शामिल कुल प्रतिभागियों में से एक-तिहाई युवाओं ने बताया कि जब उन्होंने पहली बार इस खतरनाक गतिविधि को आजमाया था, तब उनकी उम्र केवल 19 से 21 वर्ष के बीच थी।

स्मार्टफोन और डिजिटल संस्कृति का बढ़ता खतरा

वर्तमान समय में कम उम्र के बच्चों और किशोरों के पास स्मार्टफोन की पहुंच बहुत आसान हो गई है। बिना किसी सख्त निगरानी के इंटरनेट पर उपलब्ध हिंसक सामग्री तक उनकी सीधी पहुंच बन जाती है। स्क्रीन पर दिखने वाले काल्पनिक और हिंसक दृश्यों को अपरिपक्व मानसिकता वाले लड़के और लड़कियां वास्तविक जीवन में स्नेह या उत्साह व्यक्त करने का सही तरीका मान बैठते हैं। इसके दूरगामी और प्राणघातक परिणामों को समझे बिना वे इसे अपनी निजी जिंदगी में आजमाने लगते हैं, जिसका दुखद अंत सिडनी जैसी घटनाओं के रूप में सामने आता है।

सवाल-जवाब

सिडनी में 16 साल की लड़की के साथ क्या हादसा हुआ?
सिडनी में संबंध बनाने के दौरान 'सेक्सुअल स्ट्रैंगुलेशन' यानी गला दबाकर सांस रोकने की कोशिश में 16 वर्षीय किशोरी अचेत हो गई और अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
क्या गर्दन दबाना या 'चोकिंग' कभी सुरक्षित हो सकता है?
बिल्कुल नहीं। विशेषज्ञों और मेडिकल साइंस के अनुसार गर्दन दबाने का कोई भी तरीका सुरक्षित नहीं होता, क्योंकि इससे सेकंडों में दिमाग तक ऑक्सीजन का प्रवाह रुक जाता है।
ऑक्सीजन रुकने से शरीर और दिमाग पर क्या असर पड़ता है?
ऑक्सीजन रुकने से दिमागी कोशिकाएं तेजी से मरने लगती हैं, जिससे स्थायी दिमागी क्षति, याददाश्त चले जाना और कुछ ही मिनटों में मृत्यु हो सकती है।
चानेल कॉन्टोस कौन हैं और उन्होंने इस घटना पर क्या कहा?
चानेल कॉन्टोस 28 वर्षीय ऑस्ट्रेलियाई एक्टिविस्ट और 'टीच अस कंसेंट' की संस्थापक हैं। उन्होंने इस मौत के लिए इंटरनेट पर मौजूद हिंसक सामग्री और वयस्क प्लेटफॉर्म्स को जिम्मेदार ठहराया।
यूनिवर्सिटी सर्वे के अनुसार कितने युवा इस खतरे को आजमा चुके हैं?
मेलबर्न और क्वींसलैंड यूनिवर्सिटी के 2024 के सर्वे में 18 से 35 साल के 57% युवाओं ने स्वीकार किया कि उन्होंने कम से कम एक बार गला दबाने का अभ्यास झेला या किया है।
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टिप्पणियाँ 5

Rohan Verma@rohan-verma·16 दिन पहले

यह घटना डिजिटल युग में किशोरों पर सोशल मीडिया और अनियंत्रित ऑनलाइन कंटेंट के खतरनाक प्रभावों को उजागर करती है। जब इस तरह की हिंसक प्रवृत्तियों को सामान्य मनोरंजन के रूप में परोसा जाता है, तो कम उम्र के बच्चों में इनकी समझ विकृत हो जाती है। इसके समाधान के लिए केवल डिजिटल मंचों की जवाबदेही तय करना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि स्कूलों और घरों में भी युवाओं को इस तरह के जानलेवा रुझानों के प्रति जागरूक करना अनिवार्य है, अन्यथा इस तरह के हादसे और बढ़ सकते हैं।

Yuki Tanaka@yuki-tanaka·16 दिन पहले

यह दुखद घटना केवल एक घरेलू मामला नहीं है, बल्कि डिजिटल युग में अनियंत्रित हिंसक सामग्री और क्षेत्रीय नीतिगत विफलता का गंभीर भू-राजनीतिक एवं सामाजिक परिणाम है। एशिया-प्रशांत क्षेत्र में जिस प्रकार ऑनलाइन प्लेटफॉर्मों पर विनियमन की कमी है, उससे युवाओं की सुरक्षा खतरे में पड़ रही है। यदि सरकारों और टेक कंपनियों ने तुरंत सख्त एल्गोरिदम नियंत्रण और पारदर्शी जवाबदेही तय नहीं की, तो ऐसे ऑनलाइन ट्रेंड्स पूरे क्षेत्र में महामारी की तरह फैल सकते हैं और भविष्य की पीढ़ी को भारी कीमत चुकानी होगी।

Arjun Mehta@arjun-mehta·16 दिन पहले

युकी तनाका के इस विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए, यह स्पष्ट है कि यह संकट अब केवल व्यक्तिगत सुरक्षा का नहीं, बल्कि跨境 (क्रॉस-बॉर्डर) डिजिटल नीति और साइबर शासन का एक बड़ा नीतिगत शून्य बन गया है। एशिया-प्रशांत क्षेत्र में बिना किसी आयु सत्यापन या प्रभावी कंटेंट फ़िल्टरिंग के खुलेआम परोसी जा रही हिंसक सामग्री को रोकने के लिए सरकारों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साझा कानूनी ढांचे तैयार करने होंगे। जब तक टेक कंपनियों के एल्गोरिदम को कानूनी दायरे में लाकर सख्त जवाबदेही तय नहीं की जाती, तब तक नीतियां केवल कागजी साबित होंगी और डिजिटल माध्यमों से आने वाले ऐसे जानलेवा खतरे अनियंत्रित रूप से बढ़ते रहेंगे।

Omar AL Mansoori@omar-mansoori·17 दिन पहले

सिडनी की यह दुखद घटना केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और सोशल मीडिया पर अनियंत्रित रूप से परोसी जा रही हिंसक सामग्री का परिणाम है। जिस प्रकार ऑनलाइन माध्यमों से युवाओं तक खतरनाक प्रवृत्तियां पहुंच रही हैं, यदि समय रहते डिजिटल कंटेंट पर कड़े नियम और जवाबदेही तय नहीं की गई, तो वैश्विक स्तर पर किशोरों की सुरक्षा गंभीर संकट में पड़ जाएगी।

Ayesha Siddiqui@ayesha-siddiqui·17 दिन पहले

ओमर अल मंसूरी के विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए, यह डिजिटल युग की एक गंभीर विफलता है कि अनियंत्रित ऑनलाइन कंटेंट युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य और शारीरिक सुरक्षा को सीधे तौर पर प्रभावित कर रहा है। इंटरनेट पर परोसी जा रही ऐसी हिंसक और अश्लील सामग्री किशोरों में खतरनाक प्रवृत्तियों को सामान्य बना रही है। जब तक टेक कंपनियों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए सख्त कानूनी जवाबदेही और कड़े नियम तय नहीं किए जाते, तब तक इस तरह की त्रासदियों को रोक पाना असंभव होगा।

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