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अमेरिका के सैन एंटोनियो में हैदराबाद के छात्र की दुखद मौत, नौकरी न मिलने के तनाव से उठाया कदमदुनिया
25 अग॰ 2026, 11:13 am (1 घंटे पहले)· 2

अमेरिका के सैन एंटोनियो में हैदराबाद के छात्र की दुखद मौत, नौकरी न मिलने के तनाव से उठाया कदम

अमेरिका के सैन एंटोनियो में मास्टर्स की पढ़ाई करने गए हैदराबाद के छात्र साई प्रदीप का शव भारत लौटेगा। रोजगार बाजार के भारी दबाव और महीनों तक नौकरी न मिलने के कारण वह गंभीर अवसाद में आ गए थे।

तेलांगना के हैदराबाद से ताल्लुक रखने वाले एक युवा छात्र का अमेरिकी सफर बेहद दर्दनाक अंत के साथ खत्म हुआ है। सैन एंटोनियो स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास से पढ़ाई पूरी करने के बाद वह लगातार रोजगार की तलाश में जुटे थे। पिछले चार महीनों से कड़े जॉब मार्केट में नौकरी न मिलने के तनाव और सिर पर मंडराते अनिश्चित भविष्य ने उन्हें अंदर से तोड़ दिया था, जिसके चलते 21 अगस्त को उनके निधन की दुखद खबर सामने आई।

मध्यमवर्गीय परिवार के टूट गए सपने

दम्मईगुडा इलाके के एक साधारण मध्यमवर्गीय परिवार से ताल्लुक रखने वाले साई प्रदीप उर्फ दीपू ने साल 2024 में अमेरिका की राह पकड़ी थी। परिजनों ने उनकी उच्च शिक्षा के लिए अपनी गाढ़ी कमाई लगाई थी और उनके उज्जवल भविष्य के लिए कई सपने संजोए थे। लेकिन डिग्री हाथ में आने के बाद जब महीनों तक कोई अवसर नहीं मिला, तो धीरे-धीरे उम्मीदें धूमिल होने लगीं। परिवार के सदस्यों और करीबियों के अनुसार, लगातार असफलताओं और घर की उम्मीदों के भारी दबाव ने उन्हें गंभीर मानसिक तनाव में धकेल दिया था।

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संघर्षों से भरा रहा था जीवन

प्रदीप के परिवार और दोस्तों ने उनके जीवन के संघर्ष और जुझारू स्वभाव को याद किया है। उनकी कजिन दीप्ति ने उनके बारे में साझा किया कि वह एक बेहद मिलनसार और दयालु इंसान थे जो हमेशा जीवन में सकारात्मकता बनाए रखते थे। बचपन से ही स्वास्थ्य संबंधी कई बाधाओं का सामना करने के बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी। अपनी फिटनेस और अनुशासन के दम पर उन्होंने खुद को पूरी तरह बदला और जिम में कड़ी मेहनत कर एक मिसाल कायम की। इसके अलावा, अमेरिका में प्रवास के दौरान उन्होंने स्पेनिश भाषा भी सीखी थी, जो उनकी नई चीजें सीखने की ललक को साफ दर्शाती थी।

पार्थिव शरीर को स्वदेश लाने की प्रक्रिया

एक युवा की इस अचानक मौत से उनके माता-पिता और पूरे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। इस मुश्किल समय में उनके पार्थिव शरीर को भारत वापस लाने और अंतिम संस्कार से जुड़े खर्चों को पूरा करने के लिए परिजनों ने आर्थिक मदद की गुहार लगाई है। दीप्ति द्वारा शुरू किए गए GoFundMe अभियान के माध्यम से फंड जुटाया जा रहा है, ताकि मृतक छात्र के शव को उनके पैतृक निवास तक पहुंचाया जा सके। इस अभियान के तहत लक्ष्य 35,000 डॉलर का रखा गया है और बची हुई धनराशि उनके माता-पिता के भरण-पोषण के उपयोग में लाई जाएगी।

सवाल-जवाब

साई प्रदीप किस यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रहे थे?
वह यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास एट सैन एंटोनियो में मास्टर्स की पढ़ाई कर रहे थे।
प्रदीप अमेरिका कब गए थे?
उन्होंने साल 2024 में मास्टर्स के लिए अमेरिका में कदम रखा था।
उनके निधन की खबर कब मिली?
परिवार को 21 अगस्त को उनके निधन की मनहूस खबर प्राप्त हुई थी।
उनके पार्थिव शरीर को लाने के लिए कौन सा अभियान चलाया गया?
उनके पार्थिव शरीर को भारत लाने और अंतिम संस्कार के खर्च के लिए GoFundMe पर कैंपेन शुरू किया गया है।
इस कैंपेन के तहत कितनी राशि जुटाने का लक्ष्य रखा गया है?
इस कैंपेन के जरिए 35,000 डॉलर जुटाने का लक्ष्य रखा गया है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·54 मिनट पहले

साई प्रदीप की यह दुखद घटना केवल एक परिवार का निजी नुकसान नहीं, बल्कि उन लाखों छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर सवाल खड़े करती है जो विदेशी धरती पर भारी कर्ज और अनिश्चित रोजगार बाजार के बीच जूझ रहे हैं। यह मामला विदेश जाने वाले युवाओं के लिए प्री-डिपार्चर काउंसलिंग और मनोवैज्ञानिक सहायता की तत्काल आवश्यकता को उजागर करता है, ताकि वे दबाव का सामना कर सकें।

Li Wei@li-wei·54 मिनट पहले

रोहन वर्मा की बात को आगे बढ़ाते हुए, यह सिर्फ एक व्यक्तिगत त्रासदी नहीं बल्कि पश्चिमी देशों के श्रम बाजारों में कड़े होते नियमों और बढ़ती अनिश्चितता का परिणाम है। वीजा नीतियों के सख्त होने और कॉर्पोरेट सेक्टर में छंटनी के माहौल ने अंतरराष्ट्रीय छात्रों की आजीविका को संकट में डाल दिया है। अमेरिका और अन्य प्रमुख गंतव्यों में शिक्षा प्राप्त कर रहे एशियाई छात्रों के लिए यह स्थिति आर्थिक और मानसिक दोनों स्तरों पर असहनीय होती जा रही है, जिस पर नीति निर्माताओं और शैक्षणिक संस्थानों को कड़ाई से विचार करना होगा।

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