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थाईलैंड के देबसिरीन नोंथाबुरी स्कूल में 14 साल के छात्र की अंधाधुंध गोलीबारी, दादा-दादी समेत 8 की मौतदुनिया
7 अग॰ 2026, 6:52 pm (12 घंटे पहले)· 0

थाईलैंड के देबसिरीन नोंथाबुरी स्कूल में 14 साल के छात्र की अंधाधुंध गोलीबारी, दादा-दादी समेत 8 की मौत

थाईलैंड के नोंथाबुरी में 9वीं कक्षा के 14 वर्षीय छात्र ने अपने ही स्कूल में अंधाधुंध गोलियां चलाकर भारी तबाही मचाई। स्कूल में हमले से पहले छात्र ने घर पर अपने दादा-दादी की हत्या कर दी थी, जिससे इस भयावह घटना में कुल 8 लोगों की जान चली गई और 22 लोग घायल हो गए।

थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक के निकट स्थित नोंथाबुरी प्रांत के एक प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थान देबसिरीन नोंथाबुरी स्कूल में शुक्रवार, 7 अगस्त की सुबह एक अत्यंत दुखद और भीषण दुर्घटना घटी। 9वीं कक्षा में अध्ययनरत एक 14 साल के छात्र ने अचानक हथियार लेकर स्कूल परिसर में प्रवेश किया और अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी। इस अचानक हुए हमले से पूरे स्कूल परिसर में चीख-पुकार और भगदड़ मच गई। हमलावर छात्र ने कक्षाओं और गलियारों में ढूंढ-ढूंढकर शिक्षकों और अपने साथी छात्रों को निशाना बनाया। हमले के बाद छात्र ने स्वयं को भी गोली मार ली। इस पूरी त्रासदी में छात्र के घर और स्कूल परिसर को मिलाकर कुल 8 लोगों की दर्दनाक मौत हो चुकी है, जबकि 22 लोग गंभीर रूप से घायल होकर विभिन्न अस्पतालों में जिंदगी और मौत के बीच झूल रहे हैं। इस भयानक हत्याकांड ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया है और प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है।

कक्षाओं में दहशत का खौफनाक माहौल और चश्मदीदों की आपबीती

शुक्रवार की सुबह करीब 10 बजे का समय था और देबसिरीन नोंथाबुरी स्कूल में सभी छात्र और शिक्षक रोजमर्रा की भांति अपनी कक्षाओं में अध्ययन और अध्यापन में व्यस्त थे। तभी अचानक गोलियों की तड़ातड़ गूंज से पूरा स्कूल परिसर थर्रा उठा। पहली मंजिल और गलियारों में गोलियां चलने की आवाज सुनते ही शिक्षकों ने अद्भुत सूझबूझ, धैर्य और बहादुरी का परिचय दिया। शिक्षकों ने बच्चों की जान बचाने के लिए तुरंत कक्षाओं के दरवाजे अंदर से बंद किए, खिड़कियां ढकीं, कमरे की लाइटें बुझाईं और सभी छात्र-छात्राओं को फर्श पर बिल्कुल सीधे लेटने का निर्देश दिया ताकि गोलियां किसी को न लग सकें। जब तक सुरक्षा बल और आपातकालीन टीमें नहीं पहुंचीं, तब तक बच्चे और शिक्षक खौफ के साए में अंधेरे कमरों के भीतर फर्श पर लेटे रहे।

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स्कूल परिसर में मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों और बचकर निकले छात्रों ने उस भयावह मंजर की दिल दहला देने वाली बातें साझा कीं। एक पीड़ित छात्र ने बताया कि वह अपनी शिक्षिका के ठीक सामने खड़ा होकर उनसे किसी विषय पर बात कर रहा था। उसी क्षण 14 वर्षीय हमलावर छात्र हथियार लहराते हुए कमरे के सामने आया और उसने बिना कुछ कहे शिक्षिका पर सीधी गोली चला दी। गोली लगते ही चारों तरफ धूल, सीमेंट और धुएं का गुबार फैल गया और कुछ भी दिखाई देना बंद हो गया। वह छात्र किसी तरह अपनी जान बचाते हुए खिड़की के रास्ते बाहर निकला और स्कूल की ऊंची बाउंड्री वॉल कूदकर अपने सहपाठियों के साथ सुरक्षित स्थान की ओर भागा।

इसके अलावा 12वीं कक्षा में पढ़ने वाली छात्रा पावारिसा मेलिसा ने उस दर्दनाक अनुभव को साझा करते हुए बताया कि गोलियों की आवाज इतनी तेज और डरावनी थी कि ऐसा लग रहा था मानो हमलावर उनकी कक्षा के ठीक ऊपर वाली मंजिल पर खड़ा होकर लगातार फायरिंग कर रहा हो। फर्श पर गोलियों के टकराने की गूंज और चीख-पुकार स्पष्ट रूप से सुनाई दे रही थी, जिससे हर कोई यही सोच रहा था कि शायद आज वह जीवित नहीं बच पाएगा। वहीं 18 साल के एक अन्य छात्र ने बताया कि शुरुआत में गोलियों की आवाज देखकर उसे लगा कि कोई पटाखा फोड़ रहा है या कोई भारी सामान नीचे गिरा है। उसने बताया कि पहले ठां-ठां की तेज आवाजें आईं, फिर अचानक कुछ देर के लिए सन्नाटा छा गया। लेकिन कुछ ही पलों बाद फिर से अंधाधुंध गोलियां चलने लगीं, जिससे सभी को अहसास हुआ कि स्कूल पर बड़ा हमला हुआ है।

राहत-बचाव कार्य, घटनास्थल का दिल दहला देने वाला मंजर और हमलावर की मौत

जैसे ही स्कूल परिसर से अंधाधुंध फायरिंग की सूचना बाहर आई, तुरंत पो टेक तुंग फाउंडेशन के स्वयंसेवकों और पुलिस आपातकालीन प्रतिक्रिया बल को सतर्क किया गया। राहत दल सुबह 10 बजे के तुरंत बाद भारी संख्या में मौके पर पहुंचा। सबसे पहले घटनास्थल पर पहुंचे आपातकालीन राहतकर्मी किआतिखुन वेरापोंगप्रदिथ ने अपनी टीम के साथ मिलकर घायल बच्चों और शिक्षकों को तत्काल प्राथमिक उपचार देना आरंभ किया। कई बच्चों की छाती, पीठ और हाथों में गोलियों के गंभीर घाव थे, जिन्हें तुरंत मैदान में ही बैंडिज देकर एम्बुलेंस के माध्यम से नजदीकी अस्पतालों के लिए रवाना किया गया।

जब राहतकर्मी और पुलिस अधिकारी स्कूल भवन की ऊपरी मंजिलों पर बने कमरों की तलाशी लेने पहुंचे, तो वहां का दृश्य अत्यंत भयावह और विचलित करने वाला था। एक कमरे में एक पुरुष शिक्षक खून से लथपथ मृत अवस्था में पड़े मिले। वहीं दूसरे कमरे में एक महिला शिक्षिका का शव बरामद हुआ, जिनकी छाती और हाथ में कई गोलियां मारी गई थीं और अत्यधिक खून बह जाने के कारण उनकी मौके पर ही मौत हो चुकी थी।

तलाशी अभियान के दौरान राहत दल को एक कमरे के भीतर हमलावर 14 वर्षीय छात्र भी पड़ा हुआ मिला। उसने अपने सिर के दाहिने हिस्से में खुद बंदूक सटाकर गोली मार ली थी। रेस्क्यू वर्कर किआतिखुन वेरापोंगप्रदिथ ने बताया कि जब उनकी टीम ने कमरे में पहुंचकर छात्र की नब्ज जांची, तो उसकी सांसें बहुत धीमी चल रही थीं और नब्ज महसूस हो रही थी। आपातकालीन टीम ने बिना एक पल गंवाए उसे तुरंत सीपीआर देना शुरू किया और त्वरित गति से अस्पताल ले गए। हालांकि सिर में गोली से अत्यधिक गंभीर क्षति होने के कारण डॉक्टरों के भरसक प्रयासों के बावजूद उसे बचाया नहीं जा सका और अस्पताल में उसने दम तोड़ दिया।

हताहतों की कुल संख्या और प्रशासनिक आंकड़ों का अंतर

इस दुखद वारदात में मौतों के आंकड़ों को लेकर प्रशासनिक स्तर पर दो अलग-अलग विवरण सामने आए। थाईलैंड के उप गृह मंत्री पोलपी सुवांचावी ने शुरुआती बयान में कहा कि हमलावर छात्र की गोलीबारी में कुल 5 शिक्षकों की मौत हुई है। हालांकि इसके विपरीत पुलिस की आधिकारिक जांच रिपोर्ट में दर्ज किया गया कि स्कूल परिसर के भीतर 3 शिक्षकों और 3 विद्यार्थियों की जान गई है।

इस विरोधाभास के बावजूद यदि पूरी घटना का कुल विवरण देखा जाए तो इसमें कुल 8 लोगों की मृत्यु हुई है। इनमें स्कूल परिसर में मारे गए 6 लोग (शिक्षक व छात्र), खुद को गोली मारने वाला 14 वर्षीय हमलावर छात्र और उसके घर पर मारे गए 2 बुजुर्ग दादा-दादी शामिल हैं। इसके अलावा गोलीबारी में घायल हुए 22 लोगों का इलाज विभिन्न चिकित्सा केंद्रों में चल रहा है, जिनमें से कई की हालत नाजुक बताई जा रही है और वे आईसीयू में भर्ती हैं।

स्कूल हमले से पहले घर पर दोहरी हत्या और हथियार का जरिया

घटना की जांच कर रही पुलिस और फॉरेंसिक टीमों ने मामले में एक और बेहद खौफनाक और हैरान कर देने वाला मोड़ उजागर किया। पुलिस जांच में यह स्पष्ट हुआ कि शुक्रवार सुबह स्कूल में 26 राउंड अंधाधुंध गोलीबारी करने से पहले इस 14 साल के नाबालिग लड़के ने अपने ही घर पर अपने दादा-दादी की निर्मम हत्या कर दी थी। थाईलैंड के सार्वजनिक स्वास्थ्य मंत्री ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि की कि दोनों बुजुर्गों के गोलियों से छलनी शव उनके पारिवारिक निवास स्थान से बरामद किए गए हैं।

पुलिस की जांच के अनुसार, छात्र ने इस पूरे नरसंहार को अंजाम देने के लिए जिस 9mm पिस्टल का उपयोग किया था, वह बंदूक उसके दादा की ही थी। उसके दादा स्वयं पेशे से एक सेवानिवृत्त शिक्षक रह चुके थे और उन्होंने अपनी लाइसेंसी पिस्टल घर में रखी हुई थी। लड़का सुबह घर में दादा-दादी को गोली मारने के बाद उसी 9mm पिस्टल और कारतूसों को लेकर सीधे देबसिरीन नोंथाबुरी स्कूल पहुंच गया और वहां अंधाधुंध फायरिंग की।

'होनहार छात्र से कातिल तक': आरोपी की प्रोफाइल और गन कंट्रोल पर बहस

नाबालिग कानूनों और कानूनी गोपनीयता के नियमों का पालन करते हुए पुलिस प्रशासन ने आरोपी छात्र के नाम और व्यक्तिगत पहचान का खुलासा नहीं किया है। लेकिन जांच में उसके बारे में जो तथ्य सामने आए हैं, वे हर किसी को गहरे सोच में डाल रहे हैं। स्कूल के शिक्षकों ने बताया कि वह छात्र पढ़ाई-लिखाई में बहुत अच्छा था, हमेशा अच्छे अंक लाता था और उसका पिछला रिकॉर्ड उत्कृष्ट रहा था। वह स्वभाव से शांत था और कभी भी स्कूल में उसका कोई हिंसक या आक्रामक आचरण देखने को नहीं मिला था।

वहीं उप गृह मंत्री पोलपी सुवांचावी ने जानकारी दी कि जांच में यह बात भी सामने आई है कि लड़का ऑनलाइन वीडियो गेम्स खेलने का अत्यधिक शौकीन था। पुलिस और मनोवैज्ञानिक अब यह समझने का प्रयास कर रहे हैं कि आखिर एक शांत, मेधावी और सीधे-साधे दिखने वाले बच्चे के सिर पर अचानक इस कदर खून कैसे सवार हो गया कि उसने अपने ही दादा-दादी और शिक्षकों पर गोलियां बरसा दीं।

इस भयानक घटना पर थाईलैंड के प्रधानमंत्री अनुतिन चार्नविराकुल ने गहरा दुख और शोक व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि हमारे देश में इस तरह का भयानक और दर्दनाक हादसा होना बेहद दुखद है और सरकार की पूरी संवेदनाएं उन सभी परिवारों के साथ हैं जिन्होंने अपनों को खोया है। इस त्रासदी ने एक बार फिर थाईलैंड में गन कंट्रोल के सख्त कानूनों, हथियारों की सुलभता और किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य की नियमित जांच पर गंभीर और कड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

सवाल-जवाब

थाईलैंड में स्कूल गोलीबारी की घटना कहां और कब हुई?
यह घटना शुक्रवार, 7 अगस्त की सुबह थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक के पास नोंथाबुरी प्रांत स्थित देबसिरीन नोंथाबुरी स्कूल में हुई।
इस गोलीबारी की घटना में कुल कितने लोगों की मौत हुई?
हमलावर छात्र, उसके दादा-दादी और स्कूल के पीड़ितों को मिलाकर इस त्रासदी में कुल 8 लोगों की मौत हुई है और 22 लोग घायल हैं।
हमलावर छात्र ने बंदूक कहां से हासिल की थी?
14 वर्षीय छात्र ने अपने ही घर से अपने सेवानिवृत्त शिक्षक दादा की 9mm पिस्टल ली थी, जिससे उसने 21 से 26 चक्र गोलियां चलाईं।
क्या छात्र ने स्कूल पहुंचने से पहले भी कोई अपराध किया था?
हां, पुलिस जांच के अनुसार स्कूल में गोलीबारी करने से पहले छात्र ने अपने घर पर अपने दादा-दादी की हत्या कर दी थी।
घटना के बाद थाईलैंड सरकार की क्या प्रतिक्रिया रही?
प्रधानमंत्री अनुतिन चार्नविराकुल ने गहरा शोक जताते हुए इसे देश के लिए अत्यंत दर्दनाक बताया और पीड़ितों के प्रति संवेदना व्यक्त की।
संपादकीय नीति सुधार नीति

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