अमेरिकी कांग्रेस सदस्य रो खन्ना ने दावा किया है कि वेस्ट बैंक में एक दौरे के दौरान उन्हें हथियारबंद इजरायली लोगों ने बंधक बना लिया था। 49 वर्षीय रो खन्ना के अनुसार, यह घटना बुधवार को उस समय घटी जब वे अपनी टीम के साथ एक वैन में यात्रा कर रहे थे। उन्होंने बताया कि उन लोगों ने उनके वाहन को घेर लिया और उनके पास M4 राइफलें मौजूद थीं।
घटना का विवरण
रो खन्ना ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी दी कि जब वहां इजरायल डिफेंस फोर्सेज (IDF) पहुंची, तो स्थिति को सुलझाने के बजाय सेना ने उन हथियारबंद लोगों का पक्ष लिया और उनकी हिरासत जारी रही। इस दौरान उन्होंने अपनी आपबीती सुनाते हुए कहा कि वे एक ऐसे गांव का दौरा कर रहे थे जिसे इजरायली लोगों ने तबाह कर दिया था, जहां उन्होंने स्कूल और पूरे गांव को नष्ट कर दिया था। वे बस उसी नुकसान का निरीक्षण कर रहे थे।
रो खन्ना ने उन लोगों को 'हुडलम' या उपद्रवी बताते हुए कहा, 'वे अमेरिकी निर्मित M4 मशीन गन के साथ आए और हमें हिरासत में ले लिया। उन्होंने रास्ता रोक दिया और फिर जब IDF को बुलाया गया, तो सेना अमेरिकियों के बजाय उनके साथ खड़ी थी।'
इजरायली सेना का पक्ष
इस मामले पर इजरायली सैन्य बल ने कहा कि उन्हें एक रिपोर्ट मिली थी कि कुछ इजरायली लोगों ने इलाके में वाहनों का रास्ता रोका हुआ है, जिसके बाद सैनिक और पुलिस अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे। सेना का दावा है कि वहां पहुंचने के बाद सैनिकों ने उन इजरायली नागरिकों को वहां से हटाया और वाहनों को आगे बढ़ने की अनुमति दी।
अमेरिकी हस्तक्षेप और रिहाई
रो खन्ना के साथ मौजूद एक सहायक ने बताया कि बंधक बनाए जाने के दौरान उन्होंने यरुशलम स्थित अमेरिकी दूतावास से मदद की गुहार लगाई थी। करीब 90 मिनट की मशक्कत के बाद, पुलिस अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद ही उन्हें वहां से निकलने दिया गया। दो बच्चों के पिता रो खन्ना, जो 2028 के राष्ट्रपति चुनाव में दावेदारी पर विचार कर रहे हैं, इस घटना के बाद से चर्चा में हैं।
वेस्ट बैंक की स्थिति
गौरतलब है कि 1967 के मध्य-पूर्व युद्ध के दौरान इजरायल द्वारा वेस्ट बैंक और पूर्वी यरुशलम पर कब्जा करने के बाद से वहां लगभग 160 बस्तियां बनाई गई हैं, जिनमें करीब 7,00,000 यहूदी रहते हैं। फिलिस्तीनी अपनी भविष्य की संप्रभु भूमि के रूप में इसी क्षेत्र को गाजा के साथ जोड़कर देखना चाहते हैं। वर्तमान में वहां लगभग 33 लाख फिलिस्तीनी रहते हैं। अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार, ये बस्तियां अवैध मानी जाती हैं।











