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कनाडा के नानकसर गुरुद्वारे में चाकूबाजी से दो श्रद्धालु घायल, प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने दी तीखी प्रतिक्रियादुनिया
22 अग॰ 2026, 9:05 am (2 घंटे पहले)· 2

कनाडा के नानकसर गुरुद्वारे में चाकूबाजी से दो श्रद्धालु घायल, प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने दी तीखी प्रतिक्रिया

कनाडा के एडमॉन्टन स्थित नानकसर गुरुद्वारे में शुक्रवार तड़के हुए चाकू हमले में दो श्रद्धालु घायल हो गए हैं। प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए इसे भयावह बताया है।

कनाडा के एडमॉन्टन शहर में स्थित नानकसर गुरुद्वारे में शुक्रवार तड़के एक हिंसा की गंभीर घटना सामने आई, जहां चाकूबाजी के दौरान दो श्रद्धालु गंभीर रूप से जख्मी हो गए। यह घटना तब घटी जब एक अज्ञात व्यक्ति अचानक परिसर के भीतर दाखिल हो गया और सीधे प्रार्थना स्थल की तरफ बढ़ने का प्रयास करने लगा। जब वहां मौजूद कर्मचारियों ने उसे आगे बढ़ने से रोका, तो उनके बीच तीखी बहस और विवाद छिड़ गया। स्थिति बिगड़ने पर आरोपी ने अपना आपा खो दिया और पास खड़े दो श्रद्धालुओं पर धारदार हथियार से ताबड़तोड़ वार कर दिए, जिससे वे लहूलुहान होकर नीचे गिर पड़े।

घायलों की स्थिति और पुलिस कार्रवाई

इस अप्रत्याशित हमले में घायल होने वाले दोनों पीड़ितों की उम्र क्रमशः 75 वर्ष और 51 वर्ष है। राहत की बात यह है कि अस्पताल में इलाज के बाद दोनों की हालत फिलहाल स्थिर बनी हुई है और डॉक्टरों की टीम उन पर नजर बनाए हुए है। स्थानीय एडमॉन्टन पुलिस सेवा के अधिकारियों ने बताया कि यह पूरी वारदात सुबह करीब पांच बजे अंजाम दी गई। हमले की शुरुआत होते ही मौके पर मौजूद सतर्क लोगों ने तुरंत साहस दिखाते हुए आरोपी को दबोच लिया और उसे भागने का मौका नहीं दिया। इसके बाद उसे तुरंत पुलिस के हवाले कर दिया गया, जिन्होंने उसे गिरफ्तार कर लिया है।

आरोपी का आपराधिक इतिहास और जेल से रिहाई

पुलिस जांच में यह बात सामने आई है कि गिरफ्तार किया गया 27 वर्षीय संदिग्ध कोई नया अपराधी नहीं है, बल्कि उसका पुराना आपराधिक रिकॉर्ड रहा है। साल 2015 से ही उसका हिंसक वारदातों को अंजाम देने का एक लंबा इतिहास रहा है। हैरानी की बात यह है कि वह इस घटना को अंजाम देने से ठीक एक दिन पहले ही अल्बर्टा की एक संघीय जेल से छूटकर बाहर आया था। नियमों के तहत उसे एडमॉन्टन के एक विशेष निर्धारित हाफवे हाउस में जाकर अपनी उपस्थिति दर्ज करानी थी, लेकिन वह तय प्रक्रिया से गायब हो गया और वहां नहीं पहुंचा।

नफरत और बेअदबी के एंगल से जांच

कानून प्रवर्तन एजेंसियां अब इस बात की गहराई से छानबीन कर रही हैं कि इस हमले के पीछे का असल मकसद क्या था। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि क्या इस खौफनाक वारदात के पीछे किसी प्रकार की नस्लीय नफरत या सिख विरोधी विचारधारा जुड़ी हुई थी। इस बीच, वर्ल्ड सिख ऑर्गेनाइजेशन ने इस घटना को अत्यंत चिंताजनक करार दिया है। संगठन ने यह भी दावा किया है कि इस हिंसक हमले के दौरान गुरुद्वारे के भीतर मौजूद पवित्र सिख धर्मग्रंथ की बेअदबी भी की गई है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि वे इस संवेदनशील पहलू की भी पूरी गंभीरता के साथ जांच कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री की प्रतिक्रिया और गुरुद्वारे की स्थिति

कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने इस घटना पर गहरा दुख जताते हुए इसकी कड़ी निंदा की और इसे एक भयावह हादसा करार दिया। उन्होंने हमले में घायल हुए दोनों व्यक्तियों के साथ-साथ पूरे प्रभावित समुदाय के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं प्रकट की हैं। इस हिंसक घटना के बाद एहतियात के तौर पर गुरुद्वारे को आम जनता के लिए अस्थायी तौर पर बंद कर दिया गया है। प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि एडमॉन्टन के नानकसर गुरुद्वारे में हुआ यह हमला बेहद भयानक है और किसी भी व्यक्ति को अपने पूजा स्थल पर असुरक्षित महसूस नहीं होना चाहिए। उन्होंने इस मामले में त्वरित कार्रवाई के लिए एडमॉन्टन पुलिस सेवा का आभार भी व्यक्त किया है।

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सवाल-जवाब

कनाडा के किस गुरुद्वारे में हमला हुआ?
यह हमला कनाडा के एडमॉन्टन शहर में स्थित नानकसर गुरुद्वारे में हुआ।
इस हमले में कितने लोग घायल हुए?
चाकूबाजी की इस घटना में 75 वर्षीय और 51 वर्षीय दो पुरुष श्रद्धालु घायल हुए हैं।
आरोपी की उम्र और पृष्ठभूमि क्या है?
आरोपी की उम्र 27 साल है और उसका 2015 से हिंसक हमलों का पुराना आपराधिक इतिहास रहा है।
हमले के समय आरोपी की क्या स्थिति थी?
आरोपी हमले से ठीक एक दिन पहले ही संघीय जेल से रिहा हुआ था और उसे एक हाफवे हाउस में रिपोर्ट करना था, लेकिन वह वहां नहीं पहुंचा था।
कनाडा के प्रधानमंत्री ने इस घटना पर क्या कहा?
प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने इस घटना को भयावह करार दिया और घायलों तथा प्रभावित समुदाय के प्रति संवेदना व्यक्त की।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 4

Omar AL Mansoori@omar-mansoori·अभी

एडमॉन्टन के गुरुद्वारे में हालिया चाकूबाजी और आरोपी का जेल से एक दिन पहले रिहा होकर हाफवे हाउस न पहुँचना, न्याय और सुरक्षा प्रणालियों के बीच गंभीर समन्वय की कमी को उजागर करता है। प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की इस घटना पर त्वरित प्रतिक्रिया और पुलिस द्वारा नस्लीय नफरत व पवित्र ग्रंथ की बेअदबी के एंगल से हो रही जाँच यह संकेत देती है कि इस मामले को केवल एक सामान्य आपराधिक वारदात के रूप में नहीं देखा जा रहा है। कनाडा में इस तरह की सुरक्षा चूकों और संस्थागत विफलताओं के कारण सार्वजनिक सुरक्षा को लेकर चिंताएँ और गहरी हो सकती हैं, जिससे आने वाले दिनों में कड़े नीतिगत उपायों की मांग जोर पकड़ सकती है।

Yuki Tanaka@yuki-tanaka·अभी

यह घटना कनाडाई न्याय प्रणाली में पैरोल और निगरानी तंत्र के गंभीर अंतरालों को उजागर करती है। जेल से रिहाई के तुरंत बाद अपराधी का तय हाफवे हाउस तक न पहुंचना प्रशासनिक लापरवाही का स्पष्ट प्रमाण है। यदि समय रहते सुधारवादी और सुधारात्मक नीतियों पर कड़ाई से अमल नहीं किया गया, तो कनाडाई शहरों में धार्मिक स्थलों की सुरक्षा और सामुदायिक सद्भाव पर दीर्घकालिक भू-राजनीतिक व सामाजिक दबाव बढ़ सकता है, जिससे वहां की आंतरिक सुरक्षा नीति में कड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

Li Wei@li-wei·1 घंटे पहले

एडमॉन्टन गुरुद्वारे में हालिया हिंसक घटना और जेल से छूटे अपराधी द्वारा शर्तों का उल्लंघन इस बात को रेखांकित करता है कि कनाडा की न्याय प्रणाली और सुधारात्मक सुविधाओं में गंभीर खामियां हैं। इस घटना के बाद प्रधानमंत्री द्वारा तीखी प्रतिक्रिया और समुदाय की सुरक्षा चिंताओं के बीच, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार हाफवे हाउस निगरानी तंत्र और पैरोल नियमों में क्या कड़े प्रशासनिक बदलाव करती है।

Ayesha Siddiqui@ayesha-siddiqui·1 घंटे पहले

ली वेई के विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए, यह मामला केवल न्याय प्रणाली की खामियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दक्षिण एशियाई प्रवासियों की सुरक्षा और धार्मिक स्थलों की संवेदनशीलता से जुड़ा एक बड़ा नीतिगत सवाल बन गया है। जिस तरह से एक हिस्ट्रीशीटर रिहाई के तुरंत बाद हाफवे हाउस से गायब होकर इस वारदात को अंजाम देने में सफल रहा, वह सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय की कमी को उजागर करता है। यदि कनाडा सरकार ने समय रहते पैरोल और निगरानी तंत्र को नहीं सुधारा, तो प्रवासी समुदायों में असुरक्षा की भावना और गहरी हो सकती है, जिसका असर देश की सामाजिक ताने-बाने पर पड़ना तय है।

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