पाकिस्तान में रावलपिंडी की अदियाला जेल में बंद 73 साल के इमरान खान को लेकर सरकार की ओर से आधी रात के वक्त एक गोपनीय सुरक्षा ऑपरेशन अंजाम दिया गया। इस गुप्त अभियान के तहत पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री को जेल से निकालकर इस्लामाबाद के एक मेडिकल संस्थान ले जाया गया, लेकिन महज कुछ घंटों के भीतर ही जांच पूरी बताकर उन्हें 21 अगस्त की तड़के वापस जेल की सलाखों के पीछे पहुंचा दिया गया। यह पूरी कार्रवाई पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी उस निर्देश के सीधे उल्लंघन में की गई है, जिसमें अदालत ने इमरान खान की आंखों की गंभीर बीमारी और अन्य स्वास्थ्य दिक्कतों को देखते हुए उन्हें सितंबर के मध्य तक अस्पताल में रखकर इलाज कराने का स्पष्ट आदेश दिया था। इसके बावजूद सरकार ने अदालती आदेशों को दरकिनार करते हुए उन्हें तुरंत वापस हिरासत में भेज दिया।
कड़े पहरे और भारी सुरक्षा के बीच अंजाम दिया गया ऑपरेशन
अधिकारियों ने इस गुप्त स्थानांतरण को पूरा करने के लिए मिलिट्री स्टाइल में अत्यधिक सख्त और अभूतपूर्व सुरक्षा प्रबंध किए थे। रावलपिंडी स्थित अदियाला जेल से लेकर इस्लामाबाद के अस्पताल तक के पूरे मार्ग को सुरक्षित करने के लिए 800 सुरक्षाकर्मियों का एक विशाल दस्ता तैनात किया गया था। इस दस्ते में एंटी-टेररिस्ट स्क्वाड के कमांडो और प्रांतीय पुलिस बल के जवान शामिल थे, जिन्होंने पूरे रास्ते को अपनी निगरानी में ले लिया था।
रास्ते में आम जनता या इमरान खान के समर्थकों के बीच किसी भी तरह के रियल-टाइम समन्वय को रोकने तथा इस संवेदनशील जानकारी के लीक होने की संभावना को समाप्त करने के लिए आवाजाही के मार्ग पर उच्च क्षमता वाले सिग्नल और मोबाइल फोन जैमर सक्रिय कर दिए गए थे। इसके अलावा इमरान खान के आगमन की सूचना सार्वजनिक होने से बचाने और मीडिया के कैमरों की पहुंच को रोकने के लिए अस्पताल परिसर तथा आसपास के विशिष्ट इलाकों में जानबूझकर स्ट्रीटलाइट्स और अस्पताल की बत्तियों को बुझा दिया गया था या उनकी रोशनी को बेहद कम कर दिया गया था।
अस्पताल में प्रवेश के दौरान भी गोपनीयता का पूरा ध्यान रखा गया। 73 साल के नेता को मुख्य रिसेप्शन क्षेत्र या सामान्य प्रवेश द्वार से अंदर ले जाने के बजाय अस्पताल की इमारत के पिछले हिस्से में बने एक गुप्त रास्ते से डॉक्टरों के कक्ष तक पहुंचाया गया, ताकि कोई भी उन्हें न देख सके।
अदालत के सख्त आदेश की अनदेखी और अस्पताल में जल्दबाज़ी
इमरान खान को किस स्थान पर ले जाया गया और उनकी चिकित्सीय जांच कहां संपन्न हुई, इसको लेकर शुरुआत में काफी भ्रम की स्थिति बनी रही। सर्वोच्च अदालत ने अपने लिखित निर्देशों में पुलिस अधिकारियों को साफ तौर पर कहा था कि इमरान खान को निजी क्षेत्र के शिफा इंटरनेशनल हॉस्पिटल में स्थानांतरित किया जाए। हालांकि बाद में पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि सुरक्षा हालात से जुड़ी चिंताओं के कारण इमरान खान को निजी अस्पताल के बजाय सरकारी नियंत्रण वाले पाकिस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (PIMS) ले जाया गया।
अस्पताल में एक नेत्र रोग विशेषज्ञ, एक हृदय रोग विशेषज्ञ और एक जनरल फिजिशियन की मौजूदगी वाले विशेष चिकित्सा पैनल ने बेहद तेजी से उनकी शारीरिक जांच की। डॉक्टरों के इस दल ने इमरान खान को एक इंजेक्शन लगाया और महज तीन घंटे की इस संक्षिप्त प्रक्रिया के बाद उन्हें वापस अदियाला जेल स्थानांतरित करने की मंजूरी दे दी।
पीटीआई का तीखा राजनीतिक विरोध और अदियाला जेल पर धरना
सरकार की इस अचानक हुई कार्रवाई ने इमरान खान के समर्थकों और उनकी राजनीतिक पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के कार्यकर्ताओं के बीच गहरा आक्रोश पैदा कर दिया है। पार्टी के नेतृत्व ने आधिकारिक घोषणा की है कि वे सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना करने के मामले में सरकार के खिलाफ अदालत की अवमानना की याचिका दायर करेंगे। पीटीआई प्रवक्ताओं का कहना है कि तीन घंटे की यह जल्दबाजी भरी जांच महज एक छलावा और दिखावा थी, जो कि किसी विशेष मेडिकल बोर्ड की देखरेख में लंबे समय तक अस्पताल में रखकर इलाज कराने के अदालती आदेश का सीधा उल्लंघन है।
इमरान खान के स्वास्थ्य का हाल जानने और उनसे सीधे मिलने की अनुमति न दिए जाने पर उनकी बहनों ने प्रांतीय सरकार के मंत्रियों के साथ मिलकर अदियाला जेल के मुख्य द्वार के बाहर एक अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है। परिवार का कहना है कि वे अपने भाई की सेहत को लेकर बेहद चिंतित हैं।
दृष्टि हानि की आशंका और तीन साल का जेल कार्यकाल
इमरान खान के परिजनों और पीटीआई नेतृत्व को लगातार यह डर सता रहा है कि जेल में बिताए गए पिछले तीन वर्षों के दौरान चिकित्सा में बरती गई लापरवाही के कारण उनकी दाईं आंख की रोशनी हमेशा के लिए समाप्त हो सकती है। पार्टी के प्रतिनिधियों का दावा है कि समुचित इलाज न मिलने की वजह से इमरान खान की दाईं आंख की रोशनी घटकर अब केवल 15 प्रतिशत ही रह गई है। इसी मेडिकल ग्राउंड के आधार पर उनकी बहनें और कार्यकर्ता उन्हें तुरंत बाहर निकालने और बेहतर इलाज की मांग को लेकर लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि 73 वर्षीय इमरान खान अगस्त 2023 से लगातार जेल में बंद हैं। उनके खिलाफ भ्रष्टाचार, तोशाखाना मामले, और पाकिस्तान सरकार की गोपनीय जानकारी को लीक करने से संबंधित कई संगीन आरोप दर्ज किए गए हैं। हालांकि इमरान खान, उनकी बहनें और पीटीआई का यही रुख है कि सरकार उनके खिलाफ राजनीतिक बदले की भावना से काम कर रही है। उनका आरोप है कि वर्तमान सरकार जानबूझकर इमरान खान को राजनीतिक रूप से कमजोर करने की कोशिश कर रही है और उनके स्वास्थ्य तथा इलाज में जानबूझकर लापरवाही बरत रही है।



















