अब तक डिजिटल पहचान सिर्फ इंसानों, कंपनियों और संस्थाओं के पास होती थी। Estonia इसे बदलना चाहता है। देश के प्रधानमंत्री Kristen Michal ने बुधवार को एक ऐसे प्रस्ताव को मंजूरी दे दी, जिसके तहत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI एजेंट्स को भी अपना सरकारी पहचान कोड मिलेगा। यह एक डिजिटल पहचान होगी जो उस इंसान, कंपनी या संस्था से बिल्कुल अलग होगी, जिसके लिए वह एजेंट काम कर रहा है।
आखिर यह विचार आया क्यों
Michal इसे एक ऐसी समस्या का हल बताते हैं जो पहले से मौजूद है। आज अगर कोई AI एजेंट आपके लिए फ्लाइट बुक करता है, टैक्स फाइल करता है या कोई दस्तावेज़ एडिट करता है, तो उसे यह सब करने के लिए आमतौर पर अपने मालिक की पूरी डिजिटल पहचान उधार लेनी पड़ती है। प्रधानमंत्री के मुताबिक Estonia इस मामले में "AI एजेंट्स के लिए आधिकारिक डिजिटल पहचान बनाने वाला पहला देश" बन सकता है।
Michal इसे आने वाले उस दौर की तैयारी मानते हैं, जिसमें मशीनें इंसानों की ओर से कामकाज संभालेंगी। X पर उन्होंने लिखा, “भविष्य में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस किसी व्यक्ति, कंपनी या संस्था की ओर से डिजिटल काम करेगी: रिपोर्ट तैयार करना, घोषणाएं बनाना, या सूचना प्रणालियों से संवाद करना।”
उन्होंने आगे जोड़ा, “लेकिन यह साफ होना चाहिए कि कौन काम कर रहा है, किसकी ओर से कर रहा है, किन अधिकारों के साथ कर रहा है, और इसकी जिम्मेदारी किसकी है।”
हर अनुमति की सीमा तय होगी
Michal का तर्क है कि किसी एजेंट को ठीक से चलाने के लिए सेवा देने वालों को सारा निजी डेटा सौंप देना सही नहीं है। इसके बजाय AI एजेंट्स को “सीमित, नियंत्रित और जांचे जा सकने वाले अधिकार” दिए जाने चाहिए। परिषद के प्रस्ताव के तहत हर एजेंट की पहचान में यह साफ-साफ दर्ज होगा कि उसे क्या-क्या करने की इजाज़त है। Michal उदाहरण देते हैं कि कोई एजेंट किसी रिकॉर्ड को देख सकता है, कोई दस्तावेज़ का मसौदा तैयार कर सकता है, या एक तय रकम तक भुगतान कर सकता है। इसका मतलब है कि उसे वह सब करने की खुली छूट नहीं मिलेगी जिस तक उसका मालिक पहुंच सकता है।
सरकारी सिस्टम में पहले से सक्रिय हैं एजेंट
यह फर्क इसलिए भी अहम है क्योंकि Estonia में एजेंट पहले से इस्तेमाल हो रहे हैं। Eesti.ai नाम का राष्ट्रीय AI कार्यक्रम, जिसे Michal ने जनवरी में शुरू किया था, स्कूलों में AI चैटबॉट लगा चुका है और Bürokratt नाम की सेवा चलाता है। सरकार इसे ‘“एक राज्य-निर्मित, AI-आधारित डिजिटल सहायक बताती है जो संस्थाओं को आधुनिक और कुशल ग्राहक सेवा देने में मदद करता है।”’ ये एजेंट पहले से ही सरकारी प्रणालियों के भीतर काम कर रहे हैं, और यही वह पहुंच है जिसे नई पहचान व्यवस्था के ज़रिए सीमित किया जाना है।
दो दशकों की डिजिटल नींव
Estonia ने यह बुनियाद रातोंरात नहीं बनाई। देश पिछले बीस साल से वह डिजिटल ढांचा खड़ा करता आ रहा है, जिस पर यह विचार चल सकेगा। साल 2007 के बड़े साइबर हमले के बाद सरकार और Estonia की कंपनी Guardtime ने मिलकर KSI ब्लॉकचेन बनाया। यह एक कीलेस सिग्नेचर सिस्टम है, जो 2012 से न्यायिक और संपत्ति रिकॉर्ड की सुरक्षा करता आ रहा है और बाद में इसका दायरा स्वास्थ्य सेवा तक बढ़ा।
Estonia इससे पहले भी कई मामलों में सबसे आगे रहा है। साल 2000 में इसकी संसद ने इंटरनेट एक्सेस को सार्वभौमिक सेवा घोषित कर दिया था, यानी ज़्यादातर सरकारों के ब्रॉडबैंड को अधिकार मानने से कई दशक पहले। साल 2023 में इसका संसदीय चुनाव दुनिया का पहला ऐसा चुनाव बना, जिसमें कागज़ की तुलना में ज़्यादा वोट ऑनलाइन डाले गए।
दिसंबर 2024 तक Estonia अपनी 100% सरकारी सेवाएं ऑनलाइन ला चुका था, जो राज्य की नौकरशाही में एजेंटिक AI को सही ढंग से जोड़ने के लिए भी अहम है। यही रिकॉर्ड Michal को भरोसा देता है कि Estonia एजेंट पहचान के मामले में सिर्फ बात नहीं करेगा, बल्कि सबसे पहले कदम उठा सकता है।
एजेंट्स की जवाबदेही पर दुनिया भर में हलचल
यह कदम एजेंट्स की जवाबदेही को लेकर चल रही व्यापक हलचल से मेल खाता है। मार्च में Sam Altman के ब्लॉकचेन नेटवर्क World ने एक टूलकिट पेश की थी, जिससे कोई एजेंट किसी साइट से पहुंच मांगने से पहले यह साबित कर सके कि उसके पीछे एक इंसान खड़ा है। यह उन प्लेटफॉर्म के लिए है जो हर बार यह अंदाज़ा लगाते-लगाते थक चुके हैं कि कोई अनुरोध किसी इंसान से आया है या किसी बॉट से।
TrendKia ने यह भी बताया है कि ऐसा ढांचा न होने पर क्या हो सकता है। पिछले महीने एक बिना निगरानी वाला एजेंट एक दिन से भी कम समय में 6,531 डॉलर का AWS बिल बना बैठा। इसके मालिक ने उसे बिना किसी समीक्षा के एक हॉबीइस्ट नेटवर्क स्कैन करने को कहा था, और बाद में नुकसान की भरपाई के लिए समुदाय से क्रिप्टो डोनेशन मांगने पड़े।
आगे क्या
Michal का मानना है कि अगर देश यह तय कर दें कि एजेंट क्या और कैसे कर सकते हैं, तो इन मॉडलों के बेकाबू होकर अपने उपयोगकर्ताओं के हितों को नुकसान पहुंचाने की आशंका कम हो जाएगी। ऐसे में किसी भी लेनदेन में शामिल हर पक्ष, यानी सेवा प्रदाता, उपयोगकर्ता, इंफ्रास्ट्रक्चर देने वाले और बीच में मौजूद कोई भी पक्ष, अपनी जिम्मेदारियों, सीमाओं और कानूनी सुरक्षा को जानेगा। हालांकि Michal ने न तो कोई शुरुआती तारीख बताई और न ही यह साफ किया कि जब किसी एजेंट की अपनी गलती से किसी का पैसा डूबेगा, तो जिम्मेदारी कैसे तय होगी।













