आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंपनी एंथ्रोपिक ने भारतीय बाजार के लिए एक बड़ा तकनीकी अपडेट पेश करते हुए अपने लोकप्रिय एआई मॉडल क्लॉड के लिए इन-कंट्री इंफरेंस सर्विस की शुरुआत कर दी है। इस नए इंफ्रास्ट्रक्चर के लागू होने के बाद, देश में काम करने वाले विभिन्न संगठनों से आने वाले क्लॉड संबंधी सभी रिक्वेस्ट अब सीधे भारत में मौजूद लोकल एंडपॉइंट्स पर ही प्रोसेस किए जाएंगे। यह व्यवस्था उन भारतीय कंपनियों, वित्तीय संस्थानों और बड़े उद्यमों के लिए काफी राहत लेकर आई है, जिन्हें सख्त डेटा रेजिडेंसी और डेटा संप्रभुता संबंधी नियमों का अनिवार्य रूप से पालन करना पड़ता है।
लोकल सर्वर पर उपलब्ध हुए क्लॉड के प्रमुख मॉडल
कंपनी की ओर से 5 अक्टूबर को साझा की गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, क्लॉड ओपस 5, सॉनेट 5 और हाइकू 4.5 जैसे उसके मुख्य मॉडल्स अब भारत में लोकल इंफरेंस सपोर्ट के साथ काम करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। इस सर्विस को लेकर प्राथमिक घोषणा अगस्त के महीने में की गई थी। तकनीकी रूप से इस नई सुविधा का लाभ अमेज़न वेब सर्विसेज यानी एडब्ल्यूएस के अमेज़न बेडरॉक प्लेटफॉर्म के माध्यम से उठाया जा सकेगा, जिससे भारतीय उद्यम सीधे अपने मौजूदा क्लाउड वातावरण में इन मॉडल्स को जोड़ सकेंगे।
रेगुलेटेड और संवेदनशील सेक्टरों के लिए खास सहूलियत
भारत के भीतर काम कर रहे कई बैंकिंग संस्थान, सरकारी महकमे और बड़े कॉरपोरेट घराने अब तक डेटा सुरक्षा और डेटा के विदेश जाने की पाबंदियों के कारण अत्याधुनिक एआई टूल्स का खुलकर उपयोग नहीं कर पा रहे थे। लोकल इंफरेंस की बदौलत अब ये संगठन अपने सबसे संवेदनशील डिजिटल वर्कलोड को देश से बाहर भेजे बिना क्लॉड की मदद से सुरक्षित तरीके से प्रोसेस कर सकेंगे।
एंथ्रोपिक इंडिया की मैनेजिंग डायरेक्टर इरिना घोष ने इस विस्तार पर स्पष्ट किया कि कड़े नियमों के दायरे में आने वाले क्षेत्रों के क्लाइंट्स अपने बेहद अहम कार्यों में क्लॉड की क्षमताओं का उपयोग करना चाहते थे। उन्होंने रेखांकित किया कि अब ऐसे सभी संस्थानों के डेटा रिक्वेस्ट देश की सीमाओं के भीतर ही प्रोसेस होंगे। इसके अतिरिक्त, अमेज़न बेडरॉक के जरिए क्लॉड डिप्लॉय करने पर सुरक्षा ऑडिट ट्रेल और सख्त एक्सेस कंट्रोल जैसे एडवांस्ड फीचर्स भी मिलते हैं, जो एंटरप्राइज स्तर की रिस्क और कंप्लायंस टीमों के मानकों पर खरे उतरते हैं।
प्राइवेट प्रीव्यू के नतीजे और भारतीय कॉरपोरेट्स का अनुभव
इस सुविधा को औपचारिक रूप से जारी करने से पहले एक प्राइवेट प्रीव्यू चरण आयोजित किया गया था, जिसमें क्रेड जैसे शुरुआती भागीदारों ने भारत में मौजूद लोकल क्लॉड इंफरेंस का गहन परीक्षण किया। इस परीक्षण में शामिल कंपनियों ने पाया कि घरेलू स्तर पर प्रोसेसिंग होने से लेटेंसी में उल्लेखनीय कमी आई है, सिस्टम का रिस्पॉन्स तेज हुआ है और नेटवर्क का लचीलापन भी बेहतर दर्ज किया गया है। वहीं कुछ अन्य क्लाइंट्स ने इसे कानूनी और रेगुलेटरी अनुपालन की दृष्टि से एक निर्णायक कदम बताया। इसके साथ ही टीसीएस और महिंद्रा ग्रुप ने भी डेटा गवर्नेंस और रेजिडेंसी की जरूरतों को पूरा करने के लिहाज से इस स्थानीय इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहद उपयोगी और सामयिक बताया है।
भारतीय तकनीकी बाजार में क्लॉड की तेजी से बढ़ती मौजूदगी
वैश्विक स्तर पर एंथ्रोपिक के लिए भारत सबसे तेजी से उभरते हुए प्रमुख बाजारों की सूची में शामिल हो चुका है। कंपनी ने फरवरी 2026 में बेंगलुरु के भीतर अपना पहला भारतीय कार्यालय स्थापित किया था, जिसके बाद से उसने स्थानीय बाजार में अपनी तकनीकी और कारोबारी टीम का लगातार विस्तार किया है।
वर्तमान में कोटक बैंक, एक्सिस बैंक, इंडसइंड बैंक और एनपीसीआई जैसी प्रमुख वित्तीय संस्थाएं क्लॉड का इस्तेमाल मुख्य रूप से अपने सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट्स और कर्मचारियों की दैनिक उत्पादकता बढ़ाने के लिए कर रही हैं। दूसरी ओर, भारत की अग्रणी आईटी सेवा प्रदाता कंपनियां जैसे टीसीएस, इंफोसिस, कॉग्निजेंट, एलटीआईमाइंडट्री और एलटीएसएस अपने वैश्विक क्लाइंट्स को दी जाने वाली डिलीवरी सेवाओं में क्लॉड के समाधानों को शामिल कर रही हैं।
इन पारंपरिक दिग्गजों के अलावा डिजिटल फर्स्ट स्टार्टअप्स और टेक प्लेटफॉर्म्स जैसे क्रेड, रेज़रपे, स्विगी, ज़ोमैटो, इनवीडियो और फ्रेशवर्क्स ने भी क्लॉड को अपने मुख्य प्रोडक्ट डेवलपमेंट और इंजीनियरिंग वर्कफ्लो का हिस्सा बनाया हुआ है। कंपनी का मानना है कि भारतीय बाजार में बढ़ती इसी मांग को पूरा करने के लिए लोकल इंफरेंस उसकी दीर्घकालिक एंटरप्राइज रणनीति की सबसे मजबूत कड़ी है।



















