आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की तेजी से बदलती दुनिया में लोग अपनी तकनीकी समझ साबित करने के लिए किस हद तक जा सकते हैं, इसका खुलासा एक हालिया अध्ययन में हुआ है। हार्वर्ड के शोधकर्ताओं द्वारा 5,400 से अधिक अमेरिकी नागरिकों के बीच किए गए एक व्यापक सर्वेक्षण से पता चला है कि पुरुष एआई के मामलों में अपनी जानकारी को लेकर अत्यधिक आत्मविश्वास प्रदर्शित करते हैं। इस अध्ययन के दौरान 73 प्रतिशत पुरुष प्रतिभागियों ने दावा किया कि वे ऑल्टमैन के बारे में जानते हैं। इसके अलावा 53 प्रतिशत पुरुषों ने कहा कि वे मुराती, मिलनर और डाल्टन से भी भली-भांति परिचित हैं।
फर्जी नामों को पहचानने का हैरान करने वाला दावा
इस पूरे सर्वेक्षण में सबसे बड़ा पेंच यह था कि बताए गए नामों में से कुछ असल में थे ही नहीं। मुराती एक वास्तविक हस्ती हैं, जो ओपनएआई की पूर्व सीटीओ और वर्तमान में थिंकिंग मशीन लैब्स की सीईओ हैं। इसके उलट, मिलनर और डाल्टन पूरी तरह से काल्पनिक नाम थे जिनका वास्तविक दुनिया में कोई वजूद नहीं है। आंकड़ों की तुलना करें तो 40 प्रतिशत महिलाओं ने मिलनर और डाल्टन को पहचानने की बात कही, जबकि 38 प्रतिशत महिलाओं ने मुराती का नाम पहचाना। हार्वर्ड कैनेडी स्कूल के शोरेनस्टीन सेंटर की कार्यकारी निदेशक लौरा मैनली के अनुसार, जब एआई की बात आती है तो पुरुष महिलाओं की तुलना में हर मोर्चे पर अधिक आशावादी और आत्मविश्वासी नजर आते हैं। हालांकि कई बार यह आत्मविश्वास जरूरत से ज्यादा बढ़कर काल्पनिक अधिकारियों को भी सच मान लेने के दिखावे में बदल जाता है।
ज्ञान और संशय स्वीकार करने का अंतर
बुधवार को सामने आए इस अध्ययन में एआई से जुड़े जेंडर विभाजन और आत्मविश्वास के अंतर की गहराई से पड़ताल की गई है। शोधकर्ताओं ने पाया कि पुरुष एआई टूल्स का उपयोग अपेक्षाकृत अधिक बार करते हैं और औसतन वे इस तकनीक से जुड़े तथ्यात्मक सवालों के सही जवाब देने में भी बेहतर साबित हुए। इसके बावजूद, गलत जवाब देने के मामले में पुरुष और महिलाएं लगभग एक ही दर पर रहे। दोनों वर्गों के बीच असली अंतर इस बात से पैदा हुआ कि अनिश्चितता को कौन स्वीकार करता है। 12 सवालों के सेट में महिलाओं ने औसतन 3.3 सवालों पर स्पष्ट कहा कि उन्हें जवाब नहीं पता, जबकि पुरुषों के मामले में यह आंकड़ा केवल 2.3 सवालों का रहा।
मीडिया कवरेज और विशेषज्ञों की राय में असंतुलन
शोधकर्ताओं ने यह भी जांचा कि क्या निश्चितता जताने की यह प्रवृत्ति समाचारों में एआई कवरेज को भी प्रभावित करती है। एक साल की मीडिया कवरेज के विश्लेषण से सामने आया कि एआई से जुड़ी सुर्खियों में पुरुषों के नाम महिलाओं की तुलना में 14 गुना से भी अधिक बार आए। चूंकि शीर्ष तकनीकी पदों पर पहले से ही पुरुषों का वर्चस्व है, इसलिए शोधकर्ताओं ने उन लोगों का अलग से विश्लेषण किया जिन्हें विषय विशेषज्ञ के तौर पर उद्धृत किया गया था। इस समीक्षा में पाया गया कि तीन-चौथाई विशेषज्ञ पुरुष थे, जबकि एआई सेक्टर के वास्तविक वर्कफोर्स टैलेंट पूल में महिलाओं की हिस्सेदारी लगभग 29 प्रतिशत है। लौरा मैनली का मानना है कि महिलाओं को विशेषज्ञों के रूप में अधिक प्रमुखता मिलनी चाहिए और उन्हें यह कहने का खुला मंच मिलना चाहिए कि वे हर बात को लेकर निश्चित नहीं हैं।
चिंता और उत्साह के बीच भावनात्मक प्रतिक्रियाएं
दिखावटी ज्ञान से परे, सर्वेक्षण में शामिल अधिकांश अमेरिकी इस बात पर सहमत थे कि एआई तकनीक उन्हें असहज कर रही है। दोनों ही वर्गों ने चिंता को अपनी सबसे बड़ी भावनात्मक प्रतिक्रिया बताया। हालांकि महिला प्रतिभागियों में पुरुषों के मुकाबले चिंता, डर और परेशानी का स्तर अधिक पाया गया। दूसरी ओर पुरुषों ने हर सकारात्मक भावना जैसे कि जिज्ञासा, उत्साह और उमंग को महिलाओं की तुलना में अधिक रेटिंग दी। वर्तमान चर्चाओं को लेकर लौरा मैनली ने कहा कि या तो अत्यधिक तबाही का डर दिखाया जाता है या फिर अपार संभावनाओं का आत्मविश्वास रहता है, जिससे अनिश्चितता को स्वीकार करने वाली आवाजें दब जाती हैं। उनका कहना है कि तकनीक के भविष्य और सही उपयोग को लेकर हमें बार-बार यह कहने में सक्षम होना चाहिए कि हम पूरी तरह आश्वस्त नहीं हैं।



















