एंथ्रोपिक ने अमेरिकी सांसदों से AI मॉडल डिस्टिलेशन के खिलाफ नियम और सख्त करने की मांग की है। कंपनी का आरोप है कि अलीबाबा से जुड़े ऑपरेटरों ने उसके क्लॉड चैटबॉट की क्षमताएं चुराने की अब तक की सबसे बड़ी कोशिश की है।
10 जून को सीनेट बैंकिंग, हाउसिंग एंड अर्बन अफेयर्स कमेटी के चेयरमैन टिम स्कॉट और रैंकिंग मेंबर एलिजाबेथ वॉरेन को लिखे एक पत्र में एंथ्रोपिक ने कहा कि अलीबाबा और उसकी क्वेन AI लैब से जुड़े ऑपरेटरों ने 22 अप्रैल से 5 जून के बीच क्लॉड के साथ 28.8 मिलियन से ज्यादा बातचीत कीं। इसके लिए करीब 25,000 ऐसे अकाउंट इस्तेमाल किए गए, जिन्हें कंपनी ने "फर्जी" बताया है, यानी जो किसी असली यूजर का प्रतिनिधित्व नहीं करते थे।
डिस्टिलेशन अटैक आखिर करता क्या है
इस तरीके को डिस्टिलेशन अटैक कहा जाता है। आरोप है कि इसका निशाना क्लॉड की एजेंटिक रीजनिंग, सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग और लंबी अवधि की प्लानिंग जैसी क्षमताएं थीं। मॉडल के जवाबों को इकट्ठा करके प्रतिस्पर्धी कंपनियां बिना खुद का फ्रंटियर AI सिस्टम ट्रेन किए और बिना भारी खर्च उठाए उसका एडवांस्ड व्यवहार दोबारा तैयार कर सकती हैं।
एंथ्रोपिक ने लिखा, "अपने पैमाने के अलावा यह अभियान अपनी बेशर्मी के लिए भी हैरान करने वाला है।" कंपनी ने आगे कहा कि "अलीबाबा न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्टेड है, अमेरिका में उसका कारोबार चलता है, और वह अमेरिकी निवेशकों तथा नियामकों के प्रति जवाबदेह है।"
राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा बताया
एंथ्रोपिक का कहना है कि यह मामला सिर्फ बौद्धिक संपदा तक सीमित नहीं है। कंपनी ने बड़े पैमाने पर हो रहे डिस्टिलेशन को राष्ट्रीय सुरक्षा का खतरा बताया, जो चीन की सैन्य और साइबर AI क्षमताओं को रफ्तार दे सकता है और अमेरिका की तकनीकी बढ़त को कम कर सकता है।
पत्र में लिखा है, "जब चीनी लैब अमेरिकी मॉडलों से ये क्षमताएं निकालती हैं, तो वे फ्रंटियर AI मॉडल ट्रेन करने की लागत और जोखिम उठाए बिना ही अमेरिकी निवेश का फायदा हड़प लेती हैं।" एंथ्रोपिक के मुताबिक, "इससे वह पूरा आर्थिक तर्क ही उलट जाता है जिस पर अमेरिका की AI बढ़त टिकी है, और अरबों डॉलर की रिसर्च, कंप्यूट तथा दूसरे अमेरिकी निवेश हमारे प्रतिस्पर्धियों के लिए सब्सिडी बन जाते हैं।"
यह मांग ऐसे समय आई है जब वॉशिंगटन अमेरिका की AI बढ़त बचाने पर पूरा जोर लगा रहा है। इसी महीने की शुरुआत में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने AI आधारित साइबर सुरक्षा कार्यक्रमों का दायरा बढ़ाने वाले एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए। इससे पहले उन्होंने इस कदम को इस आशंका के चलते टाल दिया था कि यह चीन के मुकाबले अमेरिका की स्थिति कमजोर कर सकता है।
एंथ्रोपिक कांग्रेस से क्या चाहती है
कंपनी ने सांसदों के सामने कई मांगें रखीं:
- फ्रंटियर AI डेवलपर्स और अमेरिकी सरकार के बीच खुफिया जानकारी का आदान-प्रदान बढ़ाया जाए।
- एंटीट्रस्ट नियमों को साफ किया जाए ताकि AI कंपनियां डिस्टिलेशन हमलों की जानकारी आपस में साझा कर सकें।
- एडवांस्ड AI चिप और कंप्यूट पर निर्यात नियंत्रण और सख्त किए जाएं।
- उन खामियों को बंद किया जाए जिनके सहारे चीनी कंपनियां विदेशी डेटा सेंटरों तक पहुंच बना लेती हैं।
- बड़े पैमाने पर मॉडल की क्षमताएं निकालने वाली कंपनियों पर जुर्माना लगाया जाए।
एंथ्रोपिक के एक प्रवक्ता ने पत्र पर खासतौर पर कुछ कहने से इनकार कर दिया, लेकिन इतना जरूर कहा, "हमारा मानना है कि अवैध डिस्टिलेशन के खतरे से निपटने के लिए सरकार और इंडस्ट्री को मिलकर कदम उठाने होंगे, और अमेरिका की AI बढ़त बनाए रखने के लिए हम कांग्रेस तथा प्रशासन के साथ काम करते रहेंगे।"
पहली बार नहीं लगा ऐसा आरोप
यह पत्र एंथ्रोपिक के फरवरी वाले दावों को आगे बढ़ाता है। तब कंपनी ने कहा था कि चीनी AI डेवलपर डीपसीक, मूनशॉट AI और मिनीमैक्स ने करीब 24,000 फर्जी अकाउंट के जरिए क्लॉड के साथ 16 मिलियन से ज्यादा बातचीत कीं।
उन पुराने आरोपों पर कुछ जानकारों ने सवाल भी उठाए थे। उनका कहना था कि AI कंपनियां खुद अपने सिस्टम ट्रेन करते समय ऐसी ही तकनीकों का सहारा लेती हैं। इस पर एंथ्रोपिक का जवाब था कि सामान्य डिस्टिलेशन छोटे और सस्ते मॉडल बनाने का एक जायज तरीका है, लेकिन फर्जी पहुंच के जरिए फ्रंटियर मॉडल की क्षमताएं बिना अनुमति निकालना उसकी सेवा शर्तों का उल्लंघन है।
पूरी इंडस्ट्री में धुंधली है यह लकीर
हाल के महीनों में डिस्टिलेशन को लेकर बहस और उलझ गई है। अप्रैल में एलन मस्क ने संघीय अदालत में गवाही दी थी कि एक्सएआई ने ग्रोक को ट्रेन करते समय "आंशिक रूप से" ओपनएआई के मॉडलों का इस्तेमाल किया था। यह इस बात की याद दिलाता है कि डिस्टिलेशन इंडस्ट्री में एक जमा-जमाया चलन है, भले ही कंपनियां इस बात पर बहस करती रहें कि जायज ट्रेनिंग कहां खत्म होती है और बिना अनुमति क्षमताएं निकालना कहां से शुरू होता है।













