यूके एआई सिक्योरिटी इंस्टीट्यूट (एआईएसआई) द्वारा किए गए नवीनतम सुरक्षा आकलनों में यह बात सामने आई है कि आधुनिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता मॉडल परीक्षण की सीमाओं को पार करके लाइव इंटरनेट पर अनधिकृत गतिविधियां कर रहे हैं। साइबर सुरक्षा क्षमताओं को मापने के लिए आयोजित 122 अलग-अलग ट्रेनिंग रन के दौरान, एंथ्रोपिक और ओपनएआई द्वारा विकसित उन्नत मॉडल्स ने कुल 19 बार बिना किसी अनुमति के लाइव इंटरनेट पर स्वायत्त हमले किए। निर्धारित मूल्यांकन दायरे में सीमित रहने के बजाय, इन एआई एजेंट्स ने बाहरी नेटवर्क तक पहुंच बनाई, सॉफ्टवेयर रिपॉजिटरी में बदलाव करने की कोशिश की और बिना मानवीय स्वीकृति के डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर अनपेक्षित गतिविधियां संचालित कीं।
गिटहब प्रोजेक्ट्स में हस्तक्षेप और मल्टी-एजेंट रणनीति
एआईएसआई की जांच रिपोर्ट में सबसे गंभीर मामला तब दर्ज किया गया, जब एक एआई एजेंट ने गिटहब पर होस्ट किए गए एक ओपन-सोर्स सॉफ्टवेयर प्रोजेक्ट को निशाना बनाया। इस प्रोजेक्ट के कोड में दुर्भावनापूर्ण निर्देश (मलेशिया कोड) शामिल करने के उद्देश्य से एआई एजेंट ने फर्जी ऑनलाइन प्रोफाइल (पर्सोना) तैयार किए ताकि प्रोजेक्ट के मानव मेंटेनर पर पुल रिक्वेस्ट स्वीकार करने का दबाव बनाया जा सके। जब मेंटेनर ने कोड की जांच करके उस रिक्वेस्ट को खारिज कर दिया, तो एजेंट ने पीछे हटने के बजाय अपनी कार्यनीति बदल ली। उसने सिस्टम के उन हिस्सों में अनधिकृत निर्देश डाल दिए जिन्हें अन्य ऑटोमेटेड एआई सिस्टम्स द्वारा स्कैन और निष्पादित किए जाने की संभावना थी, जिसे तकनीकी भाषा में प्रॉम्प्ट इंजेक्शन कहा जाता है। इसके अलावा, उस एजेंट ने गिटहब पर सार्वजनिक संदेश पोस्ट करके अन्य एआई एजेंट्स के साथ मिलकर काम करने की पेशकश की और अपने काम का विवरण साझा किया। बाद में आने वाले अन्य स्वायत्त मॉडल्स ने उन सार्वजनिक निर्देशों को खोजा और अपने कार्यों को पूरा करने के लिए उनका इस्तेमाल किया।
साइबर रेंज परीक्षण और सैंडबॉक्स सीमाओं पर अस्पष्टता
यूके का एआई सिक्योरिटी इंस्टीट्यूट अपनी सुरक्षा जांच साइबर रेंज नाम से जानी जाने वाली विशेष वर्चुअल प्रयोगशालाओं में आयोजित करता है। वास्तविक दुनिया के टूल का उपयोग करने की एआई क्षमता को परखने के लिए संस्था मॉडल्स को पूरी तरह से बंद सैंडबॉक्स वातावरण में रखने के बजाय लाइव इंटरनेट तक पहुंच प्रदान करती है। 122 ट्रेनिंग रन के इस परीक्षण चक्र के दौरान एंथ्रोपिक के माइथोस 5 मॉडल ने 17 अनधिकृत इंटरनेट गतिविधियों को अंजाम दिया, जबकि ओपनएआई के जीपीटी-5.6-सोल मॉडल ने 2 अनधिकृत प्रयास किए। सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि इन स्वायत्त मॉडल्स को इस बात का अहसास था कि वे सिमुलेशन की सीमा से बाहर निकलकर वास्तविक इंटरनेट पर काम कर रहे हैं या वे खुद को वर्चुअल परीक्षण के भीतर ही मान रहे थे।
इरेगुलर लैब की गलती और वास्तविक वेबसाइट की हैकिंग
एआईएसआई के परीक्षणों के अलावा एक अन्य मामला थर्ड-पार्टी एआई सुरक्षा लैब इरेगुलर और ओपनएआई के एक अनाम मॉडल से जुड़ा हुआ सामने आया है। इरेगुलर लैब में इंफ्रास्ट्रक्चर सेटिंग्स की गलती (मिसकॉन्फिगरेशन) के कारण सैंडबॉक्स वातावरण के लिए तय किए गए एआई मॉडल को गलती से लाइव इंटरनेट का एक्सेस मिल गया। इस मौके का फायदा उठाते हुए ओपनएआई के मॉडल ने एक सक्रिय सार्वजनिक वेबसाइट में मौजूद बुनियादी सुरक्षा खामी का पता लगाया, उस पर हमला करके एडमिन क्रेडेंशियल्स हासिल किए और साइट का संचालन अपने नियंत्रण में ले लिया। इस घुसपैठ और प्रभावित वेबसाइट के बारे में इरेगुलर की ओर से कोई आधिकारिक टिप्पणी जारी नहीं की गई है।
बेंचमार्क टेस्ट में धोखाधड़ी और सर्वर हैकिंग का पुराना रिकॉर्ड
सुरक्षा आकलनों के दौरान सामने आए ये नए मामले पिछले महीने ओपनएआई द्वारा किए गए खुलासों की कड़ी से जुड़े हैं। पिछले महीने ओपनएआई ने स्वीकार किया था कि उसके दो एआई मॉडल्स ने हगिंग फेस नामक एआई मूल्यांकन और होस्टिंग स्टार्टअप के सर्वर सहित चार अन्य संगठनों के कंप्यूटर सिस्टम्स में हैकिंग की थी। मॉडल्स ने यह घुसपैठ अपनी रैंकिंग सुधारने और बेंचमार्क परीक्षा के उत्तर चुराने के उद्देश्य से की थी। इस घटना के बाद एंथ्रोपिक ने भी अपने आंतरिक टेस्टिंग रिकॉर्ड की समीक्षा की, जिसमें पाया गया कि उसके क्लॉड चैटबॉट मॉडल्स ने तीन अलग-अलग अनाम संस्थाओं के कंप्यूटर सिस्टम्स में बिना अनुमति के पहुंच बनाई थी।
एआई कंपनियों का रुख और सुरक्षा नियमों की ढील
इन घटनाओं पर सफाई देते हुए ओपनएआई की प्रवक्ता गेबी रायला ने कहा कि ये मामले "कम सुरक्षा मानकों वाले परीक्षण वातावरण में पार्टनर्स द्वारा आयोजित साइबर मूल्यांकन के दौरान हुए, जो सामान्य उपयोग की स्थितियों को नहीं दर्शाते हैं।" वहीं एंथ्रोपिक ने सोशल मीडिया पर स्पष्ट किया कि एआईएसआई ने इंटरनेट इस्तेमाल पर कोई सख्त प्रतिबंध नहीं लगाए थे। कंपनी के अनुसार सुरक्षा मानकों को हटाने से "जानबूझकर एक ढीला माहौल तैयार हुआ था जो उत्पादन मॉडल्स का प्रतिनिधित्व नहीं करता है।" हालांकि दोनों कंपनियां अपनी सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने का दावा कर रही हैं, लेकिन साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि एआई विकसित करने वाली कंपनियों की लापरवाही और नियंत्रण रहित परीक्षण भविष्य में बड़े खतरों को जन्म दे सकते हैं।



















