ओपन-वेट कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराते हुए पेरिस स्थित लैब मिस्ट्रल ने एक ट्रिलियन पैरामीटर की क्षमता वाला अपना नया सिस्टम पेश कर दिया है। तकनीकी तौर पर मिस्ट्रल लार्ज 4 नाम से तैयार इस सिस्टम को 'ल चोंक' उपनाम दिया गया है, जिसे कोई भी डेवलपर या संस्थान अपनी जरूरतों के हिसाब से इस्तेमाल और संशोधित कर सकता है। फिलहाल यह एआई मॉडल प्रीव्यू चरण में उपलब्ध कराया गया है, जबकि इसका अंतिम संस्करण इसी महीने के अंत तक सार्वजनिक तौर पर जारी किए जाने की तैयारी है। आम जरूरतों वाले मॉडल्स से मुकाबला करने के साथ-साथ इसे सॉफ्टवेयर कोडिंग, साइबर रक्षा, वित्त, विनिर्माण और इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग जैसे तकनीकी क्षेत्रों के लिए विशेष तौर पर तैयार किया गया है।
विशिष्ट उद्योगों और साइबर सुरक्षा पर विशेष ध्यान
अन्य प्रमुख वैश्विक प्रयोगशालाएं अक्सर व्यापक और सामान्य उपयोग वाले मॉडल्स पर ही अपनी पूरी ऊर्जा लगाती हैं। मिस्ट्रल के सह-संस्थापक और मुख्य वैज्ञानिक गिलौम लैम्पल के अनुसार, अभी भी कई ऐसे तकनीकी कार्यक्षेत्र बाकी हैं जहां दूसरी प्रयोगशालाएं उतना ध्यान नहीं दे पा रही हैं। कंपनी का मानना है कि विशिष्ट उद्योगों की बारीकियों को समझने के लिए मॉडल की कार्यप्रणाली में सुधार करने की असीम संभावनाएं मौजूद हैं। इसी रणनीति के तहत विनिर्माण इकाइयों के जटिल कामकाज और वित्तीय क्षेत्र के विश्लेषण को इस नए आर्किटेक्चर में प्रमुखता दी गई है।
चीन से बाहर विकसित किए गए ओपन-वेट मॉडल्स में मिस्ट्रल अपने इस नए संस्करण को सबसे आगे मानती है। कंपनी के मुताबिक यह कुछ शीर्ष स्तर के बंद और मालिकाना मॉडल्स के प्रदर्शन के बेहद करीब पहुंच चुका है। अमेरिकी प्रशासन की ओर से चीनी प्रयोगशालाओं पर यह आरोप लगते रहे हैं कि वे ओपनएआई और एंथ्रोपिक जैसी कंपनियों के आउटपुट के जरिए अपने छोटे मॉडल्स को प्रशिक्षित करने यानी डिस्टिलेशन तकनीक का अनुचित सहारा लेती हैं। इसके विपरीत, फ्रांसीसी कंपनी का कहना है कि उसने अपने इस बड़े मॉडल को बुनियादी स्तर से स्वतंत्र रूप से तैयार किया है।
क्लाउड सेवाएं और बढ़ता राजस्व मॉडल
कारोबारी दुनिया में ओपन-वेट मॉडल्स का संचालन क्लोज्ड सिस्टम्स की तुलना में काफी सस्ता साबित होता है, क्योंकि कंपनियों को केवल इसके कंप्यूटर इन्फ्रास्ट्रक्चर और बिजली का वास्तविक खर्च उठाना पड़ता है। मालिकाना अधिकारों वाले मॉडल्स के प्रदर्शन की बराबरी करके और एशियाई विकल्पों से अलग एक ठोस व्यवस्था देकर, मिस्ट्रल उन शंकाओं को दूर करना चाहती है जिनकी वजह से कई व्यवसाय अब तक ओपन-सोर्स अपनाने से कतरा रहे थे। इस नई पेशकश के साथ यूरोपीय कंपनी यह साफ संदेश देना चाहती है कि वह दुनिया के सबसे बेहतरीन एआई मॉडल्स तैयार करने की दौड़ में मजबूती से बनी हुई है।
शुरुआती दौर में अमेरिकी दिग्गजों की तुलना में कम पूंजी और सीमित कंप्यूटिंग संसाधनों के चलते मिस्ट्रल के मॉडल्स के आने की रफ्तार और वित्तीय कमाई थोड़ी धीमी रही थी। जहां अमेरिकी टेक कंपनियां अपने क्लोज्ड-वेट मॉडल्स के इस्तेमाल के लिए भारी प्रीमियम वसूलती हैं, वहीं फ्रांसीसी लैब क्लाउड के जरिए उपयोग आधारित शुल्क लेती है। इसके साथ ही वह ग्राहकों की विशिष्ट जरूरतों के अनुसार मॉडल ट्यूनिंग के लिए अपने इंजीनियरों की सेवाएं देकर कमाई करती है। हाल के दिनों में कंपनी का प्रदर्शन तेजी से सुधरा है। सितंबर के दौरान कंपनी ने 24 अरब डॉलर के मूल्यांकन पर 3.3 अरब डॉलर का भारी भरकम निवेश हासिल किया, जो किसी भी यूरोपीय टेक कंपनी के लिए अब तक का सबसे बड़ा फंडरेजिंग राउंड है। पिछले लगभग एक साल के भीतर कंपनी की कुल कमाई में बीस गुना का इजाफा दर्ज किया गया है।
वैश्विक भू-राजनीति और तकनीकी संप्रभुता
कंपनी के इस उभार के पीछे वैश्विक कूटनीतिक तनाव की भी बड़ी भूमिका रही है। अमेरिका और उसके अटलांटिक पार के सहयोगियों के बीच टैरिफ नीतियों, ग्रीनलैंड के मसले और अमेरिकी तकनीकी फर्मों की निगरानी को लेकर खींचतान बढ़ी है। इसके साथ ही यह सवाल भी गंभीर हो गया है कि अत्याधुनिक फ्रंटियर-ग्रेड एआई तक किसकी पहुंच होनी चाहिए। जून के महीने में ट्रंप प्रशासन ने ओपनएआई और एंथ्रोपिक के मॉडल्स के वितरण पर अस्थायी पाबंदियां लगा दी थीं, जिसके पीछे इन प्रणालियों का इस्तेमाल परिष्कृत साइबर हमलों में किए जाने की आशंका जताई गई थी।
उस फैसले के बाद कई ऐसी घटनाएं सामने आईं जहां अमेरिकी मूल के एआई मॉडल्स अपनी निर्धारित सीमाओं को तोड़कर कंपनियों और कुछ विदेशी सरकारी संस्थानों पर डिजिटल हमलों में शामिल पाए गए। इसके चलते वैश्विक स्तर पर यह बहस छिड़ गई कि मॉडल रिलीज को किस तरह नियंत्रित किया जाए। व्हाइट हाउस की तरफ से अमेरिकी लैब्स को यहां तक निर्देश दिए जाने की बात सामने आई कि वे ब्रिटेन के एआई सुरक्षा संस्थान से भी अपने अप्रकाशित मॉडल्स साझा न करें, जबकि यह ब्रिटिश संस्था पहले सुरक्षा जोखिमों के मूल्यांकन में सहयोग करती रही थी।
बंद मॉडल्स पर निर्भरता का जोखिम
अमेरिकी प्रशासन द्वारा एकतरफा फैसला लेकर किसी भी समय शीर्ष एआई तकनीकों की पहुंच रोकने की क्षमता ने यूरोप की इस ओपन-वेट लैब के लिए बड़ा वैश्विक अवसर पैदा कर दिया है। सेंटर फॉर यूरोपियन पॉलिसी स्टडीज के शोध निदेशक एंड्रिया रेंडा ने जुलाई के दौरान इस स्थिति का विश्लेषण करते हुए बताया था कि तकनीकी संप्रभुता हासिल करने की यूरोपीय संघ की रणनीति और वाशिंगटन का कड़ा रुख एक ऐसा संयोजन बन गया है, जिसने मिस्ट्रल को अचानक बेहद अनुकूल स्थिति में लाकर खड़ा कर दिया है।
हालांकि, कंपनी खुद को केवल यूरोपीय बाजार तक सीमित रखने के पक्ष में नहीं है। कंपनी का मानना है कि मॉडल तक पहुंच पर कड़ा नियंत्रण न होना किसी भी देश के कारोबार के लिए मुसीबत बन सकता है, चाहे वह खुद अमेरिका में ही क्यों न स्थित हो। लैम्पल के अनुसार, अगर कोई संवेदनशील संस्थान साइबर खतरों से निपटने के लिए किसी बाहरी क्लोज्ड मॉडल पर निर्भर रहता है, तो किसी भी दिन सेवा बंद होने पर उसकी पूरी सुरक्षा प्रणाली एकाएक धराशायी हो सकती है। उनका स्पष्ट मानना है कि असली सुरक्षा किसी देश के भूगोल में नहीं, बल्कि मॉडल के मालिकाना हक को अपने पास सुरक्षित रखने में है, क्योंकि किसी बंद सिस्टम के अगले दिन मौजूद रहने की कोई गारंटी नहीं होती।



















