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गूगल के डिफ्यूजन गेमा को मात देकर इनसेप्शन लैब्स का मर्करी 2 बना दुनिया का सबसे तेज एआई मॉडलएआई
21 जून 2026, 10:59 pm (45 दिन पहले)· 4

गूगल के डिफ्यूजन गेमा को मात देकर इनसेप्शन लैब्स का मर्करी 2 बना दुनिया का सबसे तेज एआई मॉडल

इनसेप्शन लैब्स ने मर्करी 2 नामक एक बेहद तेज रीज़निंग लैंग्वेज मॉडल लॉन्च किया है, जो प्रति सेकंड 1,000 टोकन जनरेट कर गूगल और अन्य प्रतिस्पर्धियों को पीछे छोड़ रहा है।

इनसेप्शन लैब्स ने आधिकारिक तौर पर मर्करी 2 पेश कर दिया है, जिसे दुनिया का सबसे तेज रीज़निंग लैंग्वेज मॉडल बताया जा रहा है। कंपनी के दावों के अनुसार, यह मॉडल लगभग 1,000 टोकन प्रति सेकंड जनरेट करता है। इस गति की तुलना अगर दूसरे बड़े एआई मॉडल्स से करें, तो एंथ्रोपिक का क्लाउड हायकू 4.5 रीज़निंग करीब 89 टोकन प्रति सेकंड और ओपनएआई का GPT-5 Mini लगभग 71 टोकन प्रति सेकंड की रफ्तार पर काम करते हैं। इस बेजोड़ स्पीड के कारण मर्करी 2 सीधे उस श्रेणी में खड़ा हो गया है जिसका दावा गूगल ने बाद में अपने डिफ्यूजनगेमा के लिए किया था।

पैरेलल जनरेशन: 'टाइपराइटर' वाले पुराने तरीके से छुटकारा

ये नए मॉडल इतनी तेज रफ्तार कैसे हासिल करते हैं? आम चैटबॉट किसी टाइपराइटर की तरह काम करते हैं, जो एक बार में केवल एक शब्द लिखते हैं, फिर जांचते हैं और अगला शब्द लिखते हैं। यह प्रक्रिया लगातार चलती रहती है। इसके विपरीत, डिफ्यूजन मॉडल पूरी तरह से अलग तकनीक का इस्तेमाल करते हैं। ये सबसे पहले खाली जगह पर रैंडम टोकन भर देते हैं। इसके बाद, कई पैरेलल पास के जरिए वे उस अनचाहे शोर को हटाते हैं, ठीक वैसे ही जैसे स्टेबल डिफ्यूजन जैसे इमेज जनरेटर किसी धुंधली तस्वीर को साफ इमेज में बदल देते हैं। इससे पूरा जवाब एक साथ तैयार हो जाता है।

बेंचमार्क टेस्ट: मर्करी 2 बनाम गूगल का डिफ्यूजनगेमा

स्पीड के साथ-साथ कठिन कार्यों को हल करने की क्षमता भी बेहद जरूरी है। अमेरिकी इनविटेशनल मैथमैटिक्स एग्जामिनेशन के असली सवालों पर आधारित AIME 2026 टेस्ट में मर्करी 2 ने 90% स्कोर हासिल किया। इसकी तुलना में, गूगल ने जब डिफ्यूजनगेमा का परीक्षण किया तो वह केवल 69.1% स्कोर कर पाया, जबकि सामान्य (बिना डिफ्यूजन वाला) गेमा 4 मॉडल इसी टेस्ट में 88.3% तक पहुंच गया था।

पीएचडी स्तर के विज्ञान बेंचमार्क GPQA पर दोनों मॉडल्स का प्रदर्शन काफी करीब रहा। मर्करी 2 ने 77% और डिफ्यूजनगेमा ने 73.2% स्कोर किया। हालांकि, खुद गूगल की डेवलपर गाइड उन कामों के लिए सामान्य गेमा 4 का उपयोग करने की सलाह देती है जिनमें बेहतरीन क्वालिटी की जरूरत हो, क्योंकि गूगल भी यह मानता है कि डिफ्यूजनगेमा कई मामलों में क्वालिटी के मामले में पीछे रह जाता है।

वास्तविक दुनिया में लागत और लेटेंसी में कमी

मर्करी 2 के रफ्तार के ये दावे प्रयोगशाला से बाहर भी पूरी तरह खरे उतरे हैं। ट्रेंडकिया द्वारा देखी गई एक संयुक्त केस स्टडी के अनुसार, एआई कोडिंग-एजेंट कंपनी ऑगमेंट कोड ने अपने कॉन्टेक्स्ट-कॉम्पैक्शन सब-एजेंट के लिए एंथ्रोपिक के क्लाउड ओपस 4.7 की जगह मर्करी 2 का इस्तेमाल शुरू किया। इसके बाद लेटेंसी में 82% की भारी कमी देखी गई और कुल लागत में भी 90% की गिरावट आई, जबकि काम की क्वालिटी बिल्कुल पहले जैसी ही बनी रही।

मजबूत नींव और दिग्गजों का निवेश

इनसेप्शन लैब्स की नींव इसके संस्थापक स्टेफानो एरमों के रिसर्च पर टिकी है। स्टेफानो स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर हैं और उन्होंने उन कोर स्कोर-बेस्ड डिफ्यूजन तकनीकों को विकसित करने में अहम भूमिका निभाई है जो आज के दौर के इमेज जनरेटर्स को चलाती हैं। कंपनी के 50 मिलियन डॉलर के शुरुआती फंडिंग राउंड में एनवीडिया की वेंचर आर्म के साथ-साथ एआई जगत के बड़े नाम जैसे एंड्रयू एनजी और आंद्रेज करपैथी ने भी निवेश किया है।

यूजर्स के लिए 'फ्लो' और सब-एजेंट आर्किटेक्चर का बदलाव

साधारण यूजर्स के लिए सबसे बड़ा बदलाव इसका स्मूद "फ्लो" है। पुराने मॉडल के साथ काम करते समय यूजर को लंबे रिस्पॉन्स के बीच इंतजार करना पड़ता था, लेकिन इस तरह के डिफ्यूजन मॉडल्स के साथ ऐसा महसूस होता है जैसे एआई बिल्कुल आपके साथ तालमेल मिलाकर चल रहा हो। इससे रीयल-टाइम ऑटो-कंप्लीट, कोडिंग और प्लानिंग को बेहद तेज रफ्तार मिलती है।

यही वजह है कि एआई आर्किटेक्चर में एक बड़ा बदलाव आ रहा है। अब जटिल एआई सिस्टम कोई एक विशाल मॉडल नहीं रह गए हैं, बल्कि वे अलग-अलग एक्सपर्ट सब-एजेंट्स का एक पूरा ग्रुप होते हैं। इसमें एक सब-एजेंट गहन रीज़निंग के लिए, कुछ अन्य समरी बनाने, टूल सर्च करने या आउटपुट की जांच करने के लिए इस्तेमाल होते हैं। पुराने तरीके के सीक्वेंशियल मॉडल में ये सब-एजेंट कॉल बहुत धीमी और महंगी होती थीं, लेकिन पैरेलल डिफ्यूजन मॉडल इन्हें इतना सस्ता और तेज बना देते हैं कि इनका खुलकर इस्तेमाल किया जा सकता है।

कुछ व्यावहारिक सीमाएं

सामान्य यूजर्स के लिए कुछ बातों को ध्यान में रखना जरूरी है। मर्करी 2 फिलहाल उन कामों के लिए सबसे बेहतरीन है जहां ज्यादा वॉल्यूम और तेज स्पीड की जरूरत हो। बहुत ज्यादा जटिल रीज़निंग के मामले में बड़े पारंपरिक ऑटो-रिग्रेसिव मॉडल अब भी बेहतर हो सकते हैं। इसके अलावा मर्करी 2 का कोई ओपन-सोर्स वर्जन उपलब्ध नहीं है, इसलिए इसका इस्तेमाल केवल API या क्लाउड के जरिए ही किया जा सकता है।

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सवाल-जवाब

मर्करी 2 क्या है और इसे किसने विकसित किया है?
मर्करी 2 इनसेप्शन लैब्स द्वारा विकसित एक रीज़निंग लैंग्वेज मॉडल है, जिसे दुनिया में सबसे तेजी से टेक्स्ट जनरेट करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
मर्करी 2 दूसरे एआई मॉडल्स की तुलना में कितना तेज है?
मर्करी 2 लगभग 1,000 टोकन प्रति सेकंड जनरेट करता है, जो एंथ्रोपिक के क्लाउड हायकू 4.5 रीज़निंग (89 टोकन/सेकंड) और ओपनएआई के GPT-5 Mini (71 टोकन/सेकंड) से कहीं ज्यादा तेज है।
डिफ्यूजन-बेस्ड एलएलएम पारंपरिक चैटबॉट्स से कैसे अलग हैं?
पारंपरिक चैटबॉट टाइपराइटर की तरह एक-एक करके शब्द लिखते हैं, जबकि डिफ्यूजन मॉडल रैंडम टोकन भरकर पैरेलल पास के जरिए पूरे रिस्पॉन्स को एक साथ तैयार करते हैं।
मर्करी 2 ने गणित और विज्ञान के बेंचमार्क टेस्ट में कैसा प्रदर्शन किया?
मर्करी 2 ने गणित के AIME 2026 बेंचमार्क में 90% और पीएचडी स्तर के विज्ञान टेस्ट GPQA में 77% स्कोर किया, और दोनों में ही गूगल के डिफ्यूजनगेमा को पीछे छोड़ दिया।
क्या आम यूजर्स मर्करी 2 को डाउनलोड करके स्थानीय स्तर पर चला सकते हैं?
नहीं, मर्करी 2 का कोई ओपन-सोर्स वर्जन उपलब्ध नहीं है, इसलिए फिलहाल इसका इस्तेमाल केवल क्लाउड प्लेटफॉर्म और एपीआई (API) के जरिए ही किया जा सकता है।
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