डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर पोस्ट होने वाले भारी-भरकम डेटा और संदेशों की निगरानी को आसान बनाने के उद्देश्य से मुसुबी ने एक नया समाधान पेश किया है। कंपनी ने मंगलवार को पॉलिसीएलएम-1.7बी नाम से एक हल्का डिसीजन मॉडल पेश किया, जिसे ओपन वेट्स के साथ उपलब्ध कराया गया है। इस मॉडल का मुख्य काम सोशल मीडिया और अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर रियल-टाइम कंटेंट मॉडरेशन को तेज और किफायती बनाना है।
साधारण भाषा में लिखे नियमों को तुरंत लागू करने की क्षमता
इस नई प्रणाली की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह आम बोलचाल की अंग्रेजी में लिखे गए कंटेंट नियमों को समझकर उन्हें 50 मिलीसेकंड से भी कम समय में किसी भी संदेश पर लागू कर सकती है। वर्तमान में अधिकांश सोशल मीडिया मंचों पर कंटेंट जांचने के लिए पारंपरिक क्लासिफायर सिस्टम काम करते हैं। मुसुबी का यह नया सिस्टम लागत और गति के मामले में उन पुराने क्लासिफायर जितना ही सक्षम है, जबकि इसकी कार्यक्षमता आधुनिक लार्ज लैंग्वेज मॉडल जैसी लचीली है। इसके चलते जटिल नियमों को लागू करने के लिए मॉडल को बार-बार विशेष प्रशिक्षण देने की आवश्यकता नहीं पड़ती है।
जब भी सुरक्षा या कंटेंट से जुड़ी गाइडलाइंस में कोई बदलाव होता है, तब भी इस मॉडल को नए सिरे से ट्रेन करने की जरूरत नहीं होती। इससे नियम तय करने वाली इंसानी टीमों को अपनी पॉलिसी में मनचाहे बदलाव करने और तुरंत प्रयोग करने की पूरी आजादी मिलती है। मुसुबी के सह-संस्थापक और चीफ एआई ऑफिसर फिलिप यानकोविच के अनुसार, यह तकनीक प्लेटफॉर्म प्रबंधकों को पहले से सक्रिय होकर सामग्री को वर्गीकृत करने का सशक्त जरिया देती है। सामग्री में हो रही बेतहाशा बढ़ोतरी के बीच प्लेटफॉर्म की गतिविधियों को बेहतर तरीके से समझने और उसे बड़े पैमाने पर कस्टमाइज करने में यह प्रणाली काफी मददगार साबित होती है।
डिसीजन मॉडल्स की बढ़ती लोकप्रियता और कार्यप्रणाली
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दुनिया में डिसीजन मॉडल्स को लेकर दिलचस्पी हाल के महीनों में तेजी से बढ़ी है। सितंबर में टाइपसेफ एआई की ओर से जेव जारी किए जाने के बाद यह तकनीक चर्चा में आई थी, जिसके तुरंत बाद ओपनएआई और अमेज़न ने भी अपने प्रतिस्पर्धी डिसीजन मॉडल्स पेश किए। पारंपरिक लार्ज लैंग्वेज मॉडल जहां बड़े टेक्स्ट उत्तर तैयार करते हैं, वहीं डिसीजन मॉडल केवल संभावनाओं या पूर्व-निर्धारित विकल्पों पर परिणाम देते हैं।
पॉलिसीएलएम-1.7बी मॉडल भी टेक्स्ट लिखने के बजाय बाइनरी फैसला सुनाता है, यानी जांची जा रही सामग्री तय श्रेणी के दायरे में आती है अथवा नहीं। आउटपुट को पहले से तय सीमित विकल्पों तक सीमित रखने की वजह से यह मॉडल ट्रांसफॉर्मर आर्किटेक्चर की खूबियों को बरकरार रखते हुए काफी तेज गति से और बेहद कम लागत में काम करता है। शुरुआती दौर में इस तकनीक का इस्तेमाल गलत व्यवहार करने वाले एआई एजेंट्स को नियंत्रित करने के लिए देखा गया था, और अब उसी तकनीक को इंसानी गलतियों व आपत्तिजनक कंटेंट को रोकने में इस्तेमाल किया जा रहा है।
तकनीकी पृष्ठभूमि और मॉडरेशन पर फोकस
डिसीजन मॉडल्स से जुड़े दृष्टिकोण पर बात करते हुए यानकोविच ने स्पष्ट किया कि उनकी इस तकनीक में रुचि जेव के आने से पहले से है। उन्होंने इसका संबंध वर्ष 2024 के एक प्रोजेक्ट ग्लिनर (नेमड एंटिटी रिकग्निशन के लिए जनरलिस्ट मॉडल) से जोड़ा, जिसमें इसी प्रकार की कई तकनीकों का प्रयोग किया गया था।
मुसुबी अन्य मॉडल्स से तुलना से बचने के बजाय इस तकनीक के जरिए कंटेंट मॉडरेशन के क्षेत्र को नई दिशा देने को लेकर पूरी तरह आश्वस्त है। कंपनी के उत्पाद विवरण के अनुसार, यह मॉडल उन डेवलपर्स और टीमों के लिए एक सीधा विकल्प है जो खुद के बुनियादी ढांचे पर रियल-टाइम मॉडरेशन मॉडल चलाना चाहते हैं।


















