झारखंड के रामगढ़ जिले में आयोजित होमगार्ड भर्ती प्रक्रिया के दौरान एक महिला अभ्यर्थी के असाधारण हौसले ने हर किसी का ध्यान खींचा। आर्थिक तंगी और पारिवारिक जिम्मेदारियों के भारी बोझ के बीच कविता कुमारी महतो ने बिना किसी पेशेवर खेल पोशाक या जूतों के, पारंपरिक साड़ी पहनकर और नंगे पैर ही 1600 मीटर की शारीरिक परीक्षा दौड़ पूरी की। मुश्किल हालात और अभावों के बावजूद अपने परिवार को सहारा देने के लिए मैदान में उतरी कविता का यह प्रयास संघर्ष और अदम्य साहस का प्रतीक बन गया है।
पारिवारिक संकट और कर्ज का भारी बोझ
कविता कुमारी महतो के इस संघर्ष के पीछे गहरा पारिवारिक दुख और गंभीर आर्थिक संकट छिपा है। उन्होंने बताया कि उनके पति एक लंबी और गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे। काफी समय तक चले इलाज के बावजूद उनके पति की जान नहीं बचाई जा सकी और उनका निधन हो गया। पति के इलाज के दौरान परिवार पर भारी कर्ज चढ़ गया, जिसे वह आज तक चुका नहीं पाई हैं। कर्ज की इस निरंतर चिंता के चलते उन्हें रातों को नींद भी नहीं आती, और इसी मजबूरी ने उन्हें सरकारी नौकरी की दौड़ में उतरने के लिए प्रेरित किया।
साड़ी और नंगे पांव मैदान में उतरने की मजबूरी
शारीरिक दक्षता परीक्षा की तैयारी के लिए आवश्यक साधन जुटाना भी कविता के लिए बेहद कठिन था। उनके पास दौड़ने के लिए ट्रैकसूट, उपयुक्त कपड़े या स्पोर्ट्स जूते खरीदने के लिए पैसे नहीं थे। यहां तक कि उनके पास जो चप्पल थी, वह भी टूटी हुई थी। मजबूरी में उन्होंने पारंपरिक साड़ी पहनकर और नंगे पांव ही मैदान में उतरने का फैसला किया। उन्होंने साझा किया कि साड़ी पहनकर दौड़ते समय उन्हें शुरुआत में काफी संकोच और झिझक महसूस हो रही थी, लेकिन बच्चों के भविष्य और घर के हालात सुधारने के संकल्प ने उनकी इस हिचकिचाहट को पीछे छोड़ दिया।
मैदान पर दिखा जज्बा और प्रेरणा
रामगढ़ में होमगार्ड बहाली के फिजिकल ट्रायल के दौरान जब कविता ने बिना जूतों के ट्रैक पर पसीना बहाया, तो वहां मौजूद हर शख्स उनके हौसले को देखकर हैरान रह गया। अभावों, टूटी चप्पलों और आर्थिक परेशानियों के बावजूद अपने दम पर हालात बदलने की उनकी इस कोशिश ने यह साबित कर दिया कि मजबूत इच्छाशक्ति के सामने साधनहीनता भी रुकावट नहीं बन सकती।
























