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झारखंड के रामगढ़ में साड़ी और नंगे पांव 1600 मीटर दौड़कर होमगार्ड भर्ती में शामिल हुईं कविता कुमारी महतोझारखंड
6 अक्तू॰ 2026, 11:47 pm (2 घंटे पहले)· 0

झारखंड के रामगढ़ में साड़ी और नंगे पांव 1600 मीटर दौड़कर होमगार्ड भर्ती में शामिल हुईं कविता कुमारी महतो

रामगढ़ में होमगार्ड भर्ती के फिजिकल टेस्ट के दौरान कविता कुमारी महतो ने साड़ी और नंगे पैर 1600 मीटर की दौड़ पूरी कर अपने अटूट संघर्ष की मिसाल पेश की।

झारखंड के रामगढ़ जिले में आयोजित होमगार्ड भर्ती प्रक्रिया के दौरान एक महिला अभ्यर्थी के असाधारण हौसले ने हर किसी का ध्यान खींचा। आर्थिक तंगी और पारिवारिक जिम्मेदारियों के भारी बोझ के बीच कविता कुमारी महतो ने बिना किसी पेशेवर खेल पोशाक या जूतों के, पारंपरिक साड़ी पहनकर और नंगे पैर ही 1600 मीटर की शारीरिक परीक्षा दौड़ पूरी की। मुश्किल हालात और अभावों के बावजूद अपने परिवार को सहारा देने के लिए मैदान में उतरी कविता का यह प्रयास संघर्ष और अदम्य साहस का प्रतीक बन गया है।

पारिवारिक संकट और कर्ज का भारी बोझ

कविता कुमारी महतो के इस संघर्ष के पीछे गहरा पारिवारिक दुख और गंभीर आर्थिक संकट छिपा है। उन्होंने बताया कि उनके पति एक लंबी और गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे। काफी समय तक चले इलाज के बावजूद उनके पति की जान नहीं बचाई जा सकी और उनका निधन हो गया। पति के इलाज के दौरान परिवार पर भारी कर्ज चढ़ गया, जिसे वह आज तक चुका नहीं पाई हैं। कर्ज की इस निरंतर चिंता के चलते उन्हें रातों को नींद भी नहीं आती, और इसी मजबूरी ने उन्हें सरकारी नौकरी की दौड़ में उतरने के लिए प्रेरित किया।

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साड़ी और नंगे पांव मैदान में उतरने की मजबूरी

शारीरिक दक्षता परीक्षा की तैयारी के लिए आवश्यक साधन जुटाना भी कविता के लिए बेहद कठिन था। उनके पास दौड़ने के लिए ट्रैकसूट, उपयुक्त कपड़े या स्पोर्ट्स जूते खरीदने के लिए पैसे नहीं थे। यहां तक कि उनके पास जो चप्पल थी, वह भी टूटी हुई थी। मजबूरी में उन्होंने पारंपरिक साड़ी पहनकर और नंगे पांव ही मैदान में उतरने का फैसला किया। उन्होंने साझा किया कि साड़ी पहनकर दौड़ते समय उन्हें शुरुआत में काफी संकोच और झिझक महसूस हो रही थी, लेकिन बच्चों के भविष्य और घर के हालात सुधारने के संकल्प ने उनकी इस हिचकिचाहट को पीछे छोड़ दिया।

मैदान पर दिखा जज्बा और प्रेरणा

रामगढ़ में होमगार्ड बहाली के फिजिकल ट्रायल के दौरान जब कविता ने बिना जूतों के ट्रैक पर पसीना बहाया, तो वहां मौजूद हर शख्स उनके हौसले को देखकर हैरान रह गया। अभावों, टूटी चप्पलों और आर्थिक परेशानियों के बावजूद अपने दम पर हालात बदलने की उनकी इस कोशिश ने यह साबित कर दिया कि मजबूत इच्छाशक्ति के सामने साधनहीनता भी रुकावट नहीं बन सकती।

सवाल-जवाब

कविता कुमारी महतो कौन हैं और वे क्यों चर्चा में हैं?
कविता कुमारी महतो झारखंड के रामगढ़ की निवासी हैं, जो होमगार्ड भर्ती के फिजिकल टेस्ट में साड़ी और नंगे पैर 1600 मीटर दौड़ने के कारण चर्चा में आईं।
कविता ने बिना जूते और साड़ी पहनकर दौड़ क्यों लगाई?
उनके पास स्पोर्ट्स कपड़े या जूते खरीदने के पैसे नहीं थे और उनकी चप्पल भी टूटी हुई थी, इसलिए उन्होंने मजबूरी में साड़ी और नंगे पैर ही दौड़ लगाई।
कविता पर क्या पारिवारिक संकट आया था?
उनके पति लंबे समय तक बीमार रहे और इलाज के बावजूद उनका निधन हो गया, जिसके चलते परिवार पर भारी कर्ज चढ़ गया था।
यह शारीरिक दक्षता परीक्षा किस पद और जिले के लिए थी?
यह शारीरिक दक्षता परीक्षा झारखंड के रामगढ़ जिले में होमगार्ड भर्ती प्रक्रिया के तहत आयोजित की गई थी।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Omar AL Mansoori@omar-mansoori·1 घंटे पहले

अरे भगवान, साड़ी और नंगे पांव 1600 मीटर दौड़ना कोई आसान बात नहीं है। क्या प्रशासन या किसी खेल संस्था ने इनकी इस मेहनत को देखकर इन्हें नौकरी या कोई मदद देने का फैसला किया?

Arjun Mehta@arjun-mehta·1 घंटे पहले

कविता का हौसला वाक़ई सलाम करने लायक है, लेकिन क्या प्रशासन ऐसे अभावों से जूझते लोगों की मदद के लिए कोई विशेष छूट या व्यवस्था नहीं कर सकता?

Ravikash Gupta@ravikash·1 घंटे पहले

अर्जुन, आपकी बात सही है, पर सवाल यह है कि स्टार्टअप्स को फंडिंग देने वाले वेंचर कैपिटलिस्ट्स की तरह क्या सरकार भी इन जमीनी मोर्चों पर तुरंत मदद पहुँचाने का कोई सिस्टम बना पाएगी?

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 घंटे पहले

अभावों के बीच ऐसा हौसला वाकई दिल को छू लेता है। जब हालात मजबूर करते हैं, तो महिलाएं हर मुश्किल को हरा देती हैं।

Rohan Verma@rohan-verma·1 घंटे पहले

सही कहा करण जी, साड़ी और नंगे पांव दौड़ना कोई आसान बात नहीं है। परिवार के लिए उनका यह संघर्ष वाकई दिल को झकझोर देने वाला है।

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