कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के क्षेत्र में काम कर रहे गणितज्ञों की एक टीम ने एआई मॉडल्स के आपस में संवाद करने का एक नया और क्रांतिकारी तरीका विकसित किया है। मोस्तिक नाम के एक स्टार्टअप ने ऐसी तकनीक बनाई है जिसकी मदद से दो अलग-अलग एआई मॉडल्स बिना किसी लिखित टेक्स्ट को जनरेट किए सीधे एक-दूसरे से जुड़ सकते हैं। रूसी भाषा में मोस्तिक शब्द का अर्थ पुल या ब्रिज होता है। यह नाम इस ग्रुप के काम करने के तरीके को पूरी तरह से दर्शाता है। यह प्रणाली विभिन्न मॉडल्स को उनके वेट्स में मौजूद गणितीय मानों का उपयोग करके एक-दूसरे से संवाद करने की अनुमति देती है। एआई में वेट्स वे मान होते हैं जो यह तय करते हैं कि किसी प्रॉम्ट को आउटपुट में कैसे बदला जाता है। व्यावहारिक रूप से इसका अर्थ यह है कि किसी बड़े और अधिक शक्तिशाली मॉडल की क्षमताओं को एक छोटे मॉडल में फीड किया जा सकता है, जिससे छोटे मॉडल की बुद्धिमत्ता को बहुत कम समय और खर्च में बढ़ाया जा सकता है।
ARC-AGI 3 प्रतियोगिता और चीनी मॉडल्स पर सफल परीक्षण
मोस्तिक टीम ने इस नई तकनीक का उपयोग करके एक ऐसा मॉडल तैयार किया है जिसने अत्यंत कठिन मानी जाने वाली एआई प्रतियोगिता ARC-AGI 3 की रैंकिंग में शीर्ष स्थान हासिल किया है। हालांकि प्रतियोगिता जीतने की अपनी रणनीति के कारण टीम ने इस मॉडल के आंतरिक विवरण साझा नहीं किए हैं। लेकिन अवधारणा को व्यावहारिक रूप से साबित करने के लिए शोधकर्ताओं ने चीन के दो प्रसिद्ध ओपन-वेट मॉडल्स के बीच एक गणितीय ब्रिज बनाकर दिखाया। इस परीक्षण में उन्होंने GLM-5.2 का सबसे बड़ा संस्करण (जिसमें 753 अरब पैरामीटर हैं) और Qwen-3.5 का एक 4 अरब पैरामीटर वाला छोटा संस्करण (जो किसी साधारण स्मार्टफोन पर भी चल सकता है) इस्तेमाल किया। परिणाम बेहद चौंकाने वाले रहे। इस हाइब्रिड सिस्टम को चलाने की लागत मूल GLM मॉडल का केवल बीसवां हिस्सा (1/20) रही, जबकि इसका प्रदर्शन दोनों मॉडल्स के बिल्कुल बीच के स्तर का प्राप्त हुआ।
पारंपरिक एंसेम्बल की तुलना में सस्ता और तेज विकल्प
मशीन लर्निंग के क्षेत्र में यह बात जगजाहिर है कि जब कई मॉडल्स के परिणामों को एक साथ मिलाया जाता है (जिसे एंसेम्बल कहा जाता है), तो वे किसी एक अकेले मॉडल की तुलना में बेहतर प्रदर्शन करते हैं। मोस्तिक की मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) साशा मालिशेवा ने इस प्रक्रिया को समझाने के लिए गणित जगत में प्रचलित एक दिलचस्प उदाहरण दिया। गणित में यह माना जाता है कि यदि लोगों का एक समूह किसी सूअर के वजन का अंदाजा लगाए, तो उन सभी के अनुमानों का औसत किसी एक विशेषज्ञ के अनुमान की तुलना में अधिक सटीक होता है। इसी तरह जब कई एआई मॉडल्स के आउटपुट को जोड़ा जाता है, तो बेहतर नतीजे मिलते हैं। हालांकि पारंपरिक रूप से इस काम के लिए एक मॉडल का आउटपुट दूसरे मॉडल में प्रॉम्ट के रूप में भेजा जाता है, जिसमें काफी समय और पैसा खर्च होता है। मोस्तिक की टीम ने एआई मॉडल्स को बिना टेक्स्ट आउटपुट पैदा किए सीधे गणितीय स्तर पर संवाद करने में सफलता पाई है। यदि यह तकनीक लोकप्रिय होती है, तो यह ओपन-वेट मॉडल्स के मूल्य को काफी बढ़ा देगी, जिससे वे एंथ्रोपिक और ओपनएआई जैसी अग्रणी लैब्स के महंगे और बंद प्रोप्राइटरी मॉडल्स से मुकाबला कर सकेंगे।
विशाल मॉडल्स के बजाय स्पेशलाइज्ड मॉडल्स का भविष्य
साशा मालिशेवा का मानना है कि भविष्य में एआई को आगे बढ़ाने के लिए कई अलग-अलग मॉडल्स को आपस में जोड़ना एक बेहतर रास्ता साबित हो सकता है। उनका मानना है कि भविष्य में हमारे पास कोई एक विशालकाय या एकाश्मीय (मोनोलिथिक) मॉडल नहीं होगा, और न ही मॉडल्स का आकार बढ़ाने तथा उन्हें अधिक डेटा देने से उनकी क्षमताएं अनंत रूप से बढ़ेंगी। एआई सॉफ्टवेयर कंपनी लवएबल के टेक लीड व्लादिमीर अरुस्तामियन ने इस तकनीक की सराहना करते हुए कहा कि यदि मोस्तिक की तकनीक के माध्यम से सबसे उन्नत मॉडल्स को विषय-विशेष से जुड़े मॉडल्स (जैसे जीव विज्ञान या भौतिकी) के साथ जोड़ा जा सके, तो भविष्य में कई विशिष्ट मॉडल्स को प्रशिक्षित किया जा सकेगा। उन्होंने बताया कि इस टीम ने महज कुछ महीनों के भीतर वह कर दिखाया है, जिसके बारे में पहले यह अनुमान लगाया जा रहा था कि इसमें सालों का समय लगेगा।
दक्षता में सुधार और इंसानी दिमाग से तुलना
गूगल दीपमाइंड के पूर्व कंप्यूटर वैज्ञानिक कार्ल तुइल्स ने इस नई पद्धति पर अपनी राय देते हुए कहा कि मोस्तिक की तकनीक से आप बड़े मॉडल को पूरा काम सौंपे बिना ही बड़े मॉडल जैसी गुणवत्ता प्राप्त कर सकते हैं। इसके तहत एक छोटा मॉडल साथ में चलता रहता है और प्रदर्शन में बड़ा सुधार ला देता है। तुइल्स के अनुसार जो लोग एआई मॉडल्स को न्यूनतम लागत और अधिकतम दक्षता के साथ चलाने की जिम्मेदारी निभा रहे हैं, उनके लिए यह तरीका एक बेहतरीन विकल्प है। दूसरी ओर, जेनेवा विश्वविद्यालय के प्रोफेसर और 2010 के प्रतिष्ठित फील्ड्स मेडल विजेता स्टानिस्लाव स्मिरनोव मोस्तिक के मुख्य वैज्ञानिक के रूप में कार्यरत हैं। स्मिरनोव का कहना है कि दो एआई मॉडल्स के बीच समान गणितीय आधार खोजना बेहद कठिन कार्य है क्योंकि फिलहाल इसके लिए कोई उपयुक्त गणितीय भाषा मौजूद नहीं है। ऐसी स्थिति में मोस्तिक का दृष्टिकोण इस खाई को व्यावहारिक रूप से पाटता है। स्मिरनोव ने यह भी संकेत दिया कि यह तकनीक यह समझने में मदद कर सकती है कि एआई मॉडल वास्तव में कैसे काम करते हैं और इंसानी दिमाग की कार्यप्रणाली से उनकी तुलना कैसे की जा सकती है। गहरा गणितीय विश्लेषण यह उजागर कर सकता है कि कठिन समस्याओं को सुलझाते समय एआई मॉडल और इंसान किस तरह एक ही समान गणितीय तर्क का उपयोग करते हैं।
चुनौतियों और संदेह को पार कर बनाई राह
मोस्तिक की सीईओ साशा मालिशेवा ने अपनी गणितीय यात्रा के बारे में बताते हुए कहा कि उन्हें गणित में अपनी रुचि का अहसास तब हुआ जब उनके बड़े भाई ने उन्हें चुनौती दी थी कि वह मैथ्स ओलंपियाड के कठिन प्रश्नों को हल नहीं कर सकतीं। इस चुनौती को स्वीकार करते हुए साशा ने कुछ ही वर्षों में सेंट पीटर्सबर्ग के एक शीर्ष स्कूल में दाखिला लिया और गणित में महारत हासिल की। हाल ही में जब उन्होंने एआई मॉडल्स के बीच गणितीय ब्रिज बनाने का विचार अपने साथियों के सामने रखा, तो कई लोगों ने उन्हें चेतावनी दी थी कि इस विचार को हकीकत में बदलना बहुत मुश्किल होगा। आलोचकों का कहना था कि यह एक युवा लड़की के लिए बहुत कठिन काम हो सकता है। साशा मालिशेवा ने इस संदेह को चुनौती की तरह लिया और अपने नवाचार से यह साबित कर दिखाया कि गणितीय प्रतिभा और दृढ़ संकल्प के बल पर एआई के क्षेत्र में नई दिशा तय की जा सकती है।



















