अमरीकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व द्वारा जारी की गई नवीनतम बेज बुक रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि जुलाई महीने की शुरुआत से लेकर अब तक अमरीका की आर्थिक गतिविधियों में मामूली स्तर पर विस्तार देखा गया है। विभिन्न अमरीकी जिलों में आर्थिक परिस्थितियों का विस्तृत ब्योरा देने वाले इस दस्तावेज के मुताबिक, देश के कई हिस्सों में विनिर्माण और निर्माण क्षेत्रों पर इनपुट लागत का भारी दबाव देखा जा रहा है। ऊर्जा, कच्चे माल, परिवहन और पेट्रोकेमिकल की कीमतों में हुई बढ़ोतरी के कारण उद्योगों को उत्पादन लागत में वृद्धि का सामना करना पड़ रहा है।
रोजगार और श्रम बाजार की स्थिति
श्रम बाजार और रोजगार के मोर्चे पर रिपोर्ट में मिला-जुला और सीमित बदलाव देखने को मिला है। समग्र रूप से अमरीका में रोजगार के आंकड़ों में केवल नाममात्र या मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई है। विभिन्न जिलों के आंकड़ों का विश्लेषण करने पर पता चलता है कि तीन फेडरल रिजर्व जिलों ने अपने यहाँ रोजगार में मध्यम स्तर का सुधार दर्ज किया है, जबकि चार जिलों ने हल्की बढ़त की बात कही है। दूसरी ओर, देश के पांच अन्य जिलों में रोजगार की स्थिति में कोई बदलाव नहीं हुआ है और वहाँ रोजगार का स्तर स्थिर बना हुआ है।
मूल्य वृद्धि और महंगाई का जिलावार ब्योरा
कीमतों में बदलाव और मुद्रास्फीति के दबाव के संदर्भ में बेज बुक रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि देश के अधिकांश हिस्सों में मूल्य वृद्धि का माहौल बना हुआ है। रिपोर्ट में शामिल आठ फेडरल रिजर्व जिलों ने अपने क्षेत्रों में मध्यम स्तर की मूल्य वृद्धि दर्ज की है। दो जिलों में यह वृद्धि मामूली रही, जबकि एक जिला ऐसा रहा जहां बहुत मामूली मूल्य वृद्धि देखी गई। इसके विपरीत, एक जिला ऐसा भी दर्ज किया गया जहाँ कीमतों में काफी तेज और मजबूत उछाल देखा गया है।
फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति और ब्याज दरों का प्रभाव
अमरीका में मौद्रिक नीति का संचालन और नियंत्रण फेडरल रिजर्व द्वारा किया जाता है। अमरीकी केंद्रीय बैंक को मुख्य रूप से दो प्रमुख जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं, जिन्हें उसके दोहरे जनादेश के रूप में जाना जाता है। पहला जनादेश देश में मूल्य स्थिरता सुनिश्चित करना और दूसरा पूर्ण रोजगार के अवसरों को बढ़ावा देना है। इन लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए फेडरल रिजर्व का सबसे प्रमुख हथियार बेंचमार्क ब्याज दरों में बदलाव करना होता है। जब अर्थव्यवस्था में वस्तुओं और सेवाओं की कीमतें बहुत तेजी से बढ़ने लगती हैं और मुद्रास्फीति केंद्रीय बैंक के निर्धारित 2 प्रतिशत के लक्ष्य से ऊपर निकल जाती है, तो फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर देता है। ब्याज दरें बढ़ने से पूरी अमरीकी अर्थव्यवस्था में कर्ज लेना महंगा हो जाता है। इसका एक सीधा प्रभाव मुद्रा बाजार पर भी पड़ता है, क्योंकि ऊंची ब्याज दरें अंतरराष्ट्रीय निवेशकों को अपनी पूंजी अमरीका में लगाने के लिए आकर्षित करती हैं, जिससे अमरीकी डॉलर को मजबूती मिलती है। इसके ठीक उलट, जब मुद्रास्फीति 2 प्रतिशत के लक्ष्य से नीचे गिर जाती है या बेरोजगारी दर चिंताजनक रूप से बढ़ जाती है, तो केंद्रीय बैंक आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहन देने के लिए ब्याज दरों में कटौती कर सकता है। दरों में कटौती से कर्ज सस्ता होता है और व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलता है, हालांकि इस स्थिति में अमरीकी डॉलर पर दबाव बनता है और उसकी विनिमय दर में गिरावट देखने को मिलती है।
फेडरल ओपन मार्केट कमेटी का ढांचा और निर्णय प्रक्रिया
फेडरल रिजर्व अपनी मौद्रिक नीतियों की समीक्षा और ब्याज दरों पर फैसला लेने के लिए हर साल आठ नीतिगत बैठकें आयोजित करता है। ये बैठकें फेडरल ओपन मार्केट कमेटी द्वारा आयोजित की जाती हैं, जहां अमरीकी अर्थव्यवस्था की समग्र स्थिति का गहन मूल्यांकन किया जाता है। इस शक्तिशाली समिति में कुल 12 अधिकारी शामिल होते हैं जो मतदान के जरिए फैसले लेते हैं। इनमें बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के 7 सदस्य और फेडरल रिजर्व बैंक ऑफ न्यूयॉर्क के अध्यक्ष स्थायी रूप से शामिल होते हैं। बाकी बचे 11 क्षेत्रीय रिजर्व बैंकों के अध्यक्षों में से 4 अध्यक्षों को बारी-बारी से एक-एक साल के कार्यकाल के लिए इस समिति में वोटिंग का अधिकार दिया जाता है।
क्वांटिटेटिव ईज़िंग और क्वांटिटेटिव टाइटनिंग की कार्यप्रणाली
असाधारण या संकटपूर्ण आर्थिक परिस्थितियों में अमरीकी केंद्रीय बैंक अपनी मौद्रिक नीति में गैर-पारंपरिक तरीकों का सहारा लेता है, जिसे क्वांटिटेटिव ईज़िंग कहा जाता है। इस प्रक्रिया के माध्यम से फेडरल रिजर्व वित्तीय प्रणाली में नकदी और ऋण के प्रवाह को व्यापक स्तर पर बढ़ाता है। यह कदम तब उठाया जाता है जब अर्थव्यवस्था मंदी की चपेट में हो या मुद्रास्फीति का स्तर बेहद कम हो जाए। वर्ष 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट के दौरान अमरीकी केंद्रीय बैंक ने इसी नीति का व्यापक उपयोग किया था। क्वांटिटेटिव ईज़िंग के तहत फेडरल रिजर्व नई मुद्रा छापता है और उसका उपयोग वित्तीय संस्थानों से उच्च गुणवत्ता वाले बॉन्ड खरीदने के लिए करता है। बाजार में डॉलर की आपूर्ति अत्यधिक बढ़ने के कारण सामान्यतः इस कदम से अमरीकी डॉलर कमजोर होता है। दूसरी तरफ, क्वांटिटेटिव टाइटनिंग इसकी ठीक विपरीत प्रक्रिया है। इस प्रक्रिया में केंद्रीय बैंक वित्तीय संस्थानों से बॉन्ड खरीदना बंद कर देता है और अपने पास मौजूद मैच्योर हो रहे बॉन्डों से मिलने वाली मूल राशि का उपयोग नए बॉन्ड खरीदने में नहीं करता है। वित्तीय प्रणाली से डॉलर की तरलता कम होने के कारण क्वांटिटेटिव टाइटनिंग को आमतौर पर अमरीकी डॉलर के मूल्य के लिए सकारात्मक माना जाता है।
विदेशी मुद्रा बाजार में करेंसी जोड़ों का हाल
मुद्रा बाजार के रुझानों की बात करें तो अमरीकी डॉलर ने प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मुद्राओं के मुकाबले मिश्रित प्रदर्शन किया है। आज के व्यापारिक आंकड़ों के अनुसार अमरीकी डॉलर का सबसे मजबूत प्रदर्शन न्यू ज़ीलैंड डॉलर के खिलाफ दर्ज किया गया है। वहीं अन्य प्रमुख करेंसी पेअर्स में भी उतार-चढ़ाव देखा गया। GBP/USD की विनिमय दर में लगातार कई दिनों से जारी गिरावट का दौर बुधवार को भी बना रहा। हालांकि, इस ब्रिटिश पाउंड जोड़े ने दिन के दौरान 1.3470 के आसपास बने चार सप्ताह के निचले स्तर से थोड़ा सुधरने में सफलता पाई है। अमरीकी डॉलर की सुस्त चाल और लगातार बनी हुई भू-राजनीतिक चिंताओं के बावजूद पाउंड में यह सुधार दर्ज किया गया। दूसरी ओर, EUR/USD मुद्रा जोड़ा बुधवार को यूरोपीय बाजारों की समाप्ति के बाद 1.1600 के स्तर के आसपास उतार-चढ़ाव के दौर से गुजरता नजर आया। अमरीकी डॉलर की गति धीमी होने के साथ ही यह यूरो जोड़ा 1.1560 के दो सप्ताह के निचले स्तर से उबरने में सफल रहा।
कमोडिटी बाजार: सोना, क्रूड ऑयल और डीजल क्रैक स्प्रेड का रिकॉर्ड
कमोडिटी और ऊर्जा बाजारों में भी बुधवार को उल्लेखनीय हलचल देखने को मिली। सोने की कीमतों में सुधार का सिलसिला जारी रहा और अंतर्राष्ट्रीय बाजार में पीली धातु प्रति ट्रॉय औंस 4,400 डॉलर के स्तर की ओर बढ़ती दिखाई दी। अमरीकी डॉलर में मामूली कमजोरी, अनिश्चित भू-राजनीतिक माहौल और अमरीकी ट्रेजरी यील्ड में मिले-जुले रुख ने सोने की कीमतों को सहारा दिया है। ऊर्जा क्षेत्र में अमरीकी क्रूड ऑयल बेंचमार्क वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट की कीमतों में लगातार तीसरे दिन तेजी दर्ज की गई। पिछले छह कारोबारी सत्रों में से पांच दिनों में सकारात्मक रुख दिखाते हुए WTI क्रूड बुधवार को एशियाई व्यापारिक सत्र के दौरान 24 जुलाई के बाद के अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। इस बीच तेल रिफाइनिंग क्षेत्र से एक अभूतपूर्व आंकड़ा सामने आया है। हालांकि कच्चा तेल बाजार पहले के मुकाबले अधिक स्थिर दिख रहा है, लेकिन डीजल बाजार में जबरदस्त तेजी देखी जा रही है। अमरीका में अल्ट्रा-लो सल्फर डीजल फ्यूचर्स और WTI क्रूड ऑयल के बीच का अंतर यानी डीजल क्रैक स्प्रेड इतिहास में पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गया। दिन के कारोबार के दौरान यह अंतर 102.00 डॉलर प्रति बैरल से अधिक के रिकॉर्ड intraday स्तर तक पहुंच गया।
क्रिप्टोकरेंसी बाजार में नरमी और कंसोलिडेशन
डिजिटल परिसंपत्ति और क्रिप्टो बाजार में बुधवार को व्यापक रूप से गिरावट और सतर्कता का माहौल देखने को मिला। निवेशक सावधानी का रुख अपना रहे हैं, जिससे प्रमुख क्रिप्टो संपत्तियों में सुधार का दबाव बना हुआ है। दुनिया की सबसे बड़ी क्रिप्टोकरेंसी बिटकॉइन 77,000 डॉलर के अपने अल्पकालिक समर्थन स्तर के पास मजबूती हासिल करने और टिकने की कोशिश कर रही है। एथेरियम पर भी बिकवाली का दबाव हावी रहा और यह नीचे गिरकर 2,400 डॉलर के स्तर की ओर खिसकता दिखाई दिया। इसी तरह रिपल की कीमतों में भी नीचे की ओर जाने का रुझान देखा गया है।


















